उत्तर प्रदेश

चुनाव से पहले बसपा में बड़ा संगठनात्मक झटका

Ratna Netam
2 Aug 2026 2:35 PM IST
चुनाव से पहले बसपा में बड़ा संगठनात्मक झटका
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उत्तर प्रदेश : अगले वर्ष होने वाले विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच बहुजन समाज पार्टी (बसपा) में एक बार फिर बड़ा संगठनात्मक घटनाक्रम सामने आया है। बसपा सुप्रीमो मायावती ने अपने समधी और पूर्व राज्यसभा सांसद अशोक सिद्धार्थ को पार्टी से निष्कासित कर दिया है। यह फैसला ऐसे समय लिया गया है जब पार्टी आगामी चुनावों को लेकर संगठन को मजबूत करने में जुटी है। खास बात यह है कि अशोक सिद्धार्थ बसपा के राष्ट्रीय समन्वयक रहे हैं और उनका पारिवारिक संबंध भी पार्टी नेतृत्व से जुड़ा है। वह बसपा के राष्ट्रीय समन्वयक एवं मायावती के भतीजे आकाश आनंद के ससुर हैं। ऐसे में यह कार्रवाई राजनीतिक और संगठनात्मक दोनों ही दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

इससे पहले शनिवार को मायावती ने अशोक सिद्धार्थ से चार राज्यों का प्रभार वापस ले लिया था। इसके बाद राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा शुरू हो गई थी कि भविष्य में उन्हें उत्तर प्रदेश संगठन में कोई नई जिम्मेदारी दी जा सकती है। हालांकि इन अटकलों पर विराम लगाते हुए रविवार को मायावती ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर स्पष्ट घोषणा की कि अशोक सिद्धार्थ को पार्टी से निष्कासित किया जा रहा है और भविष्य में उन्हें दोबारा बसपा में शामिल नहीं किया जाएगा।

मायावती ने अपने संदेश में कहा कि अशोक सिद्धार्थ को पहले भी अनुशासनहीनता और पार्टी के दिशा-निर्देशों का पालन न करने के कारण निष्कासित किया गया था। उन्होंने बताया कि महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के दौरान टिकट वितरण को लेकर अशोक सिद्धार्थ का प्रदेश नेतृत्व के साथ उचित तालमेल नहीं था। पार्टी के अनुसार, संगठनात्मक अनुशासन का उल्लंघन करने और निर्देशों का पालन नहीं करने के कारण उन्हें उस समय पार्टी से बाहर किया गया था।

हालांकि बाद में उन्हें एक अवसर देते हुए दोबारा पार्टी में शामिल किया गया। मायावती ने बताया कि पुनः शामिल करते समय स्पष्ट शर्त रखी गई थी कि वह भविष्य में ऐसी गलती नहीं दोहराएंगे। साथ ही यह भी तय किया गया था कि उन्हें उत्तर प्रदेश में कोई जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी, बल्कि केवल अन्य राज्यों में पार्टी के जनाधार को मजबूत करने का दायित्व सौंपा जाएगा। लेकिन पार्टी नेतृत्व का आरोप है कि अशोक सिद्धार्थ इन अपेक्षाओं पर खरे नहीं उतर सके।

बसपा प्रमुख के अनुसार, जिन राज्यों की जिम्मेदारी उन्हें सौंपी गई, वहां भी उनका प्रदर्शन संतोषजनक नहीं रहा। मायावती ने कहा कि केवल कर्नाटक ही नहीं, बल्कि ओडिशा और पश्चिम बंगाल से भी लगातार अनुशासनहीनता और पार्टी के दिशा-निर्देशों की अनदेखी की शिकायतें मिलती रहीं। उन्होंने दावा किया कि कई बार चेतावनी देने के बावजूद उनके व्यवहार और कार्यशैली में कोई सुधार नहीं आया। इसी कारण पहले उन्हें सभी संगठनात्मक जिम्मेदारियों से मुक्त किया गया और अब पार्टी से स्थायी रूप से निष्कासित करने का निर्णय लिया गया है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विधानसभा चुनाव से पहले बसपा नेतृत्व संगठन में अनुशासन और जवाबदेही को लेकर कोई समझौता नहीं करना चाहता। पार्टी लगातार अपने संगठन को सक्रिय करने और राज्यों में नए सिरे से मजबूती देने की कोशिश कर रही है। ऐसे समय में वरिष्ठ नेताओं पर की गई कार्रवाई यह संकेत देती है कि पार्टी नेतृत्व अनुशासनहीनता को किसी भी स्तर पर स्वीकार करने के पक्ष में नहीं है, चाहे संबंधित व्यक्ति का संगठन में कितना भी बड़ा पद या पारिवारिक संबंध क्यों न हो।

बसपा के भीतर यह घटनाक्रम इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि अशोक सिद्धार्थ का नाम लंबे समय से पार्टी के प्रमुख नेताओं में शामिल रहा है। उनके निष्कासन को विपक्षी दल भी राजनीतिक दृष्टि से देख रहे हैं। वहीं बसपा नेतृत्व ने साफ संदेश दिया है कि संगठन में वही नेता बने रहेंगे जो पार्टी की नीतियों, दिशा-निर्देशों और अनुशासन का पूरी तरह पालन करेंगे।

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले बसपा संगठन में हुए इस बड़े फैसले ने राजनीतिक हलकों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। आने वाले दिनों में पार्टी संगठन में और बदलाव देखने को मिल सकते हैं, क्योंकि बसपा चुनावी तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुटी हुई है।

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