उत्तर प्रदेश

मस्जिद जमीन विवाद में जिला अदालत का बड़ा आदेश पुराना फैसला बरकरार

Ratna Netam
4 Sept 2026 5:55 PM IST
मस्जिद जमीन विवाद में जिला अदालत का बड़ा आदेश पुराना फैसला बरकरार
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सहारनुर : उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में कलक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद को लेकर चल रहे भूमि विवाद में जिला अदालत ने अहम फैसला सुनाया है। जिला जज की अदालत ने मस्जिद पक्ष की ओर से दाखिल याचिका को खारिज करते हुए सिटी मजिस्ट्रेट कोर्ट के पुराने आदेश को बरकरार रखा है। अदालत ने अपने आदेश में विवादित भूमि को सरकारी जमीन माना है।
इस फैसले के बाद मस्जिद पक्ष को बड़ा झटका लगा है। जिला अदालत के निर्णय से पहले सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत ने भी इस मामले में भूमि को सरकारी बताते हुए मस्जिद निर्माण को अवैध कब्जे से जुड़ा मामला माना था। अब जिला कोर्ट ने भी उसी आदेश को कायम रखा है।
क्या है पूरा मामला?
सहारनपुर कलक्ट्रेट परिसर में स्थित मस्जिद को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था। शिकायत के बाद प्रशासन ने मामले की जांच शुरू की थी। विवाद का मुख्य मुद्दा यह था कि जिस जमीन पर मस्जिद बनी है, वह निजी संपत्ति है या सरकारी भूमि।
मामले की सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों ने अपने-अपने दावे और दस्तावेज अदालत के सामने रखे। मस्जिद पक्ष ने इसे वक्फ संपत्ति बताते हुए पुराने दस्तावेजों का हवाला दिया, जबकि सरकारी पक्ष ने राजस्व रिकॉर्ड के आधार पर भूमि को सरकारी बताया।
मस्जिद पक्ष की दलील
मस्जिद पक्ष की ओर से अदालत में कहा गया कि यह संपत्ति सुन्नी वक्फ बोर्ड में दर्ज है और धार्मिक स्थल होने के कारण इसके संबंध में वक्फ कानून लागू होता है।
पक्ष की ओर से यह भी दलील दी गई कि मस्जिद पुरानी है और 1947 से पहले से मौजूद होने का दावा किया गया। इसके समर्थन में पुराने दस्तावेज, बिजली बिल और अन्य रिकॉर्ड पेश किए गए। साथ ही 1991 के पूजा स्थल कानून का भी हवाला दिया गया।
सरकारी पक्ष ने क्या कहा?
सरकारी पक्ष ने अदालत में पुराने राजस्व रिकॉर्ड को आधार बनाया। प्रशासन की ओर से दलील दी गई कि विवादित जमीन सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज है और वहां बने निर्माण के लिए कोई वैध अनुमति या स्वामित्व संबंधी दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं।
सरकारी पक्ष का कहना था कि केवल किसी व्यक्ति या संस्था का दावा करने से जमीन का मालिकाना हक साबित नहीं होता। इसके लिए वैध राजस्व रिकॉर्ड और कानूनी दस्तावेज जरूरी होते हैं।
जिला कोर्ट ने क्यों खारिज की याचिका?
जिला जज की अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और दस्तावेजों की जांच के बाद सिटी मजिस्ट्रेट कोर्ट के आदेश को सही माना। अदालत ने कहा कि उपलब्ध रिकॉर्ड और साक्ष्यों के आधार पर भूमि को सरकारी माना गया है।
इसके साथ ही मस्जिद पक्ष की ओर से दाखिल याचिका को निरस्त कर दिया गया।
पहले सिटी मजिस्ट्रेट कोर्ट ने दिया था फैसला
इस मामले में इससे पहले सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत ने भी फैसला सुनाते हुए कलक्ट्रेट परिसर की जमीन को सरकारी बताया था। अदालत ने निर्माण को अवैध कब्जे से जुड़ा मामला मानते हुए कार्रवाई के आदेश दिए थे।
सिटी मजिस्ट्रेट कोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए मस्जिद पक्ष जिला अदालत पहुंचा था, लेकिन वहां भी राहत नहीं मिली।
1991 के कानून पर भी हुई बहस
सुनवाई के दौरान पूजा स्थल (विशेष प्रावधान) अधिनियम 1991 को लेकर भी दोनों पक्षों ने अपनी दलीलें रखीं।
मस्जिद पक्ष ने कहा कि 1947 से पहले मौजूद धार्मिक स्थलों की स्थिति में बदलाव नहीं किया जा सकता। वहीं सरकारी पक्ष ने तर्क दिया कि यह मामला धार्मिक स्वरूप बदलने का नहीं बल्कि सरकारी भूमि पर कब्जे से जुड़ा है।
आगे क्या होगा?
जिला अदालत के फैसले के बाद अब मस्जिद पक्ष के पास उच्च न्यायालय में अपील का विकल्प मौजूद है। मस्जिद पक्ष पहले ही संकेत दे चुका है कि वह इस आदेश को चुनौती दे सकता है।
वहीं प्रशासन की नजर अब आगे की कानूनी प्रक्रिया पर है। मामला अब भी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है क्योंकि ऊपरी अदालत में चुनौती दी जा सकती है।
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