उत्तर प्रदेश

यूपी में 1198 पदों की भर्ती में बड़ा फर्जीवाड़ा, OMR शीट में अलग-अलग स्याही का इस्तेमाल

Kavita2
18 Oct 2026 11:53 AM IST
यूपी में 1198 पदों की भर्ती में बड़ा फर्जीवाड़ा, OMR शीट में अलग-अलग स्याही का इस्तेमाल
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लखनऊ। उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी के शासनकाल में हुई पशुधन प्रसार अधिकारी भर्ती में कथित धांधली का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। आर्थिक अपराध शाखा (EOW) की जांच में दस्तावेजी साक्ष्यों के साथ कई महत्वपूर्ण वैज्ञानिक प्रमाण भी सामने आए हैं। वर्ष 2014 में पशुपालन विभाग के अंतर्गत 1198 पदों पर हुई भर्ती में ओएमआर शीट के मूल्यांकन और मेरिट सूची तैयार करने में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं के आरोप लगे थे। अब लखनऊ स्थित विधि विज्ञान प्रयोगशाला में कराए गए परीक्षण से ओएमआर शीट के कई नमूनों में अलग-अलग स्याही के इस्तेमाल की पुष्टि होने की जानकारी सामने आई है। जांच एजेंसी को संदेह है कि पात्र अभ्यर्थियों को नुकसान पहुंचाकर अपात्र उम्मीदवारों को लाभ देने के लिए उत्तर पुस्तिकाओं में हेरफेर किया गया। इस मामले में ईओडब्ल्यू ने पूर्व प्रमुख सचिव और सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी योगेश कुमार को गिरफ्तार किया है।

ओएमआर शीट की फोरेंसिक जांच में मिले अहम साक्ष्य

पशुधन प्रसार अधिकारी भर्ती घोटाले की जांच के दौरान ईओडब्ल्यू ने ओएमआर शीट की वैज्ञानिक जांच कराने का फैसला किया था।

सूत्रों के अनुसार, लखनऊ स्थित विधि विज्ञान प्रयोगशाला में उत्तर पुस्तिकाओं के कई नमूनों का परीक्षण कराया गया। परीक्षण में कुछ ओएमआर शीट पर एक से अधिक प्रकार की स्याही इस्तेमाल किए जाने की पुष्टि हुई।

इससे उत्तर पुस्तिकाओं में बाद में बदलाव किए जाने की आशंका को बल मिला है।

जांच एजेंसी अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि उत्तर पुस्तिकाओं में कथित बदलाव कब, कैसे और किसके निर्देश पर किए गए।

हालांकि, अलग-अलग स्याही की मौजूदगी महत्वपूर्ण वैज्ञानिक साक्ष्य हो सकती है, लेकिन किसी विशेष व्यक्ति की आपराधिक जिम्मेदारी का निर्धारण अन्य साक्ष्यों और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर होगा।

2014 में हुई थी 1198 पदों पर भर्ती

उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार के दौरान पशुपालन विभाग ने वर्ष 2014 में पशुधन प्रसार अधिकारी के 1198 पदों पर भर्ती प्रक्रिया आयोजित की थी।

इसके लिए दो फरवरी 2014 को लिखित परीक्षा कराई गई थी। भर्ती प्रक्रिया सहारनपुर मंडल को छोड़कर प्रदेश के 17 मंडलों में आयोजित हुई थी।

भर्ती परीक्षा के बाद 1005 अभ्यर्थियों का चयन किया गया था। चयनित उम्मीदवारों को प्रशिक्षण देकर नियुक्तियां भी प्रदान की गई थीं।

लेकिन भर्ती प्रक्रिया पूरी होने के बाद ओएमआर शीट के मूल्यांकन और मेरिट सूची तैयार करने में अनियमितताओं के आरोप सामने आए।

शिकायतों के बाद शासन ने पूरे मामले की जांच कराने का निर्णय लिया।

पात्र अभ्यर्थियों को बाहर करने की साजिश का आरोप

ईओडब्ल्यू की जांच में यह आरोप सामने आया कि चयन प्रक्रिया में कुछ अभ्यर्थियों को अनुचित लाभ पहुंचाने के लिए उत्तर पुस्तिकाओं से छेड़छाड़ की गई।

जांच एजेंसी के अनुसार, ओएमआर शीट में बदलाव करके कुछ पात्र उम्मीदवारों के अंक प्रभावित किए गए, जबकि अपात्र अभ्यर्थियों को चयन प्रक्रिया में लाभ पहुंचाने का प्रयास किया गया।

सूत्रों का दावा है कि अलग-अलग पेन और स्याही का इस्तेमाल इसी कथित हेरफेर का हिस्सा हो सकता है।

इस मामले में जांच एजेंसी उत्तर पुस्तिकाओं के मूल रिकॉर्ड, मूल्यांकन संबंधी दस्तावेज और चयन सूची का मिलान कर रही है।

मूल्यांकन के लिए रायबरेली के संस्थान को दी गई जिम्मेदारी

भर्ती प्रक्रिया में सबसे महत्वपूर्ण अनियमितताओं में ओएमआर शीट के केंद्रीयकृत मूल्यांकन का मामला भी शामिल है।

जांच में सामने आया कि मंडलीय चयन समितियों के अधिकारों के विपरीत उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन की जिम्मेदारी रायबरेली स्थित फिरोज गांधी इंस्टीट्यूट को सौंप दी गई थी।

ईओडब्ल्यू का आरोप है कि इस निर्णय के दौरान उत्तर प्रदेश पशुधन प्रसार एवं कुक्कुट विकास सेवा नियमावली-2002 और संशोधित नियमावली-2013 के प्रावधानों का पालन नहीं किया गया।

जांच एजेंसी के अनुसार, निर्धारित प्रक्रिया से हटकर लिए गए फैसलों ने भर्ती की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

पूर्व प्रमुख सचिव योगेश कुमार गिरफ्तार

इस मामले में ईओडब्ल्यू ने 14 अक्टूबर 2026 को बड़ी कार्रवाई करते हुए सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी योगेश कुमार को गिरफ्तार किया था।

योगेश कुमार वर्ष 2014 में भर्ती प्रक्रिया के दौरान पशुपालन विभाग के प्रमुख सचिव के पद पर तैनात थे।

ईओडब्ल्यू की टीम ने उन्हें लखनऊ के गोमतीनगर स्थित आवास से गिरफ्तार किया।

जांच एजेंसी का आरोप है कि भर्ती प्रक्रिया में नियमों के विपरीत लिए गए निर्णयों में उनकी भूमिका रही थी।

हालांकि, योगेश कुमार के खिलाफ लगाए गए आरोप अभी न्यायिक परीक्षण के अधीन हैं। गिरफ्तारी को दोष सिद्ध होने के रूप में नहीं देखा जा सकता।

वर्ष 2017 में एसआईटी को सौंपी गई थी जांच

भर्ती प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आने के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने दिसंबर 2017 में मामले की जांच विशेष जांच दल (SIT) को सौंपी थी।

जांच के दौरान चयन प्रक्रिया, ओएमआर शीट के मूल्यांकन और अधिकारियों की भूमिका से संबंधित कई दस्तावेजों की पड़ताल की गई।

इसके बाद वर्ष 2019 में एसआईटी थाने में मुकदमा दर्ज किया गया।

मामले में धोखाधड़ी, जालसाजी, आपराधिक षड्यंत्र और साक्ष्य मिटाने सहित भारतीय दंड संहिता तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की संबंधित धाराएं लगाई गई थीं।

बाद में एसआईटी का ईओडब्ल्यू में विलय हो गया और आर्थिक अपराध शाखा ने जांच आगे बढ़ाई।

28 आरोपियों के नाम आए सामने

ईओडब्ल्यू की जांच के दौरान इस कथित भर्ती घोटाले में कुल 28 आरोपियों की पहचान किए जाने की जानकारी सामने आई है।

इनमें छह आरोपी प्रारंभिक शिकायत में नामजद थे, जबकि जांच के दौरान 22 अन्य व्यक्तियों की कथित भूमिका सामने आई।

रिपोर्टों के अनुसार, 25 आरोपियों के खिलाफ अलग-अलग चरणों में आरोपपत्र दाखिल किए जा चुके हैं।

जांच एजेंसी भर्ती प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों, मूल्यांकन व्यवस्था और चयन संबंधी निर्णयों की पड़ताल कर रही है।

तत्कालीन मंत्री राजकिशोर सिंह की भूमिका भी जांच के दायरे में

वर्ष 2014 में पशुधन प्रसार अधिकारी भर्ती के दौरान राजकिशोर सिंह पशुपालन विभाग के मंत्री थे।

ईओडब्ल्यू की जांच में उनकी भूमिका से जुड़े पहलुओं की भी पड़ताल की गई है।

रिपोर्टों के अनुसार, राजकिशोर सिंह के खिलाफ अभियोजन स्वीकृति से संबंधित प्रस्ताव राज्य सरकार के पास लंबित है।

अभियोजन स्वीकृति मिलने के बाद ही इस संबंध में आगे की कानूनी प्रक्रिया निर्धारित होगी।

फिलहाल राजकिशोर सिंह के खिलाफ किसी न्यायालय द्वारा दोष सिद्ध किए जाने की पुष्टि नहीं हुई है।

भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल

पशुधन प्रसार अधिकारी भर्ती में सामने आए आरोपों ने सरकारी नौकरियों की चयन प्रक्रिया की विश्वसनीयता को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं।

ओएमआर शीट का उपयोग परीक्षाओं में निष्पक्ष और मशीन आधारित मूल्यांकन के उद्देश्य से किया जाता है।

यदि उत्तर पुस्तिकाओं में मूल्यांकन से पहले या बाद में अनधिकृत बदलाव किए जाते हैं, तो इससे उम्मीदवारों की वास्तविक योग्यता और मेरिट सूची प्रभावित हो सकती है।

ऐसे मामलों में दस्तावेजी जांच के साथ फोरेंसिक परीक्षण महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

वैज्ञानिक साक्ष्यों से जांच को मिल सकती है मजबूती

लगभग 12 साल पुराने इस मामले में ओएमआर शीट पर विभिन्न स्याही के इस्तेमाल से जुड़े वैज्ञानिक निष्कर्ष जांच एजेंसी के लिए महत्वपूर्ण हो सकते हैं।

ईओडब्ल्यू अब दस्तावेजी प्रमाण, फोरेंसिक रिपोर्ट और संबंधित अधिकारियों की भूमिका को जोड़कर मामले की कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ा रही है।

पूर्व प्रमुख सचिव योगेश कुमार की गिरफ्तारी के बाद इस पुराने भर्ती प्रकरण पर एक बार फिर ध्यान केंद्रित हुआ है।

हालांकि, मामले में किस व्यक्ति ने उत्तर पुस्तिकाओं में बदलाव किया और किन उम्मीदवारों को वास्तविक लाभ मिला, इसका अंतिम निष्कर्ष न्यायालय में प्रस्तुत साक्ष्यों के परीक्षण के बाद ही सामने आएगा।

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