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गाजियाबाद। उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले में शनिवार देर रात आग लगने की बड़ी घटना सामने आई है। मुरादनगर थाना क्षेत्र के पुरसी गांव में प्लास्टिक मेडिकल वेस्ट से भरे एक गोदाम में अचानक भीषण आग लग गई। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप धारण कर लिया और गोदाम से उठती ऊंची लपटों तथा काले धुएं के घने गुबार से आसपास के इलाके में अफरा-तफरी मच गई। घटना की सूचना मिलते ही मोदीनगर फायर स्टेशन से दमकल की तीन गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और आग बुझाने का अभियान शुरू किया गया। गोदाम में बड़ी मात्रा में प्लास्टिक सामग्री होने के कारण आग तेजी से फैल गई, जिससे दमकलकर्मियों को आग पर काबू पाने में मुश्किलों का सामना करना पड़ा।
जानकारी के अनुसार, यह घटना शनिवार देर रात की है। मुरादनगर थाना क्षेत्र के पुरसी गांव में स्थित गोदाम में प्लास्टिक मेडिकल वेस्ट रखा हुआ था। अचानक गोदाम के अंदर आग लग गई। शुरुआत में आग सीमित हिस्से में लगी होने की आशंका है, लेकिन वहां मौजूद ज्वलनशील सामग्री के कारण कुछ ही समय में लपटें तेजी से फैल गईं। आग की तीव्रता इतनी अधिक थी कि गोदाम से उठने वाला धुआं दूर तक दिखाई देने लगा।
घटना के बाद आसपास मौजूद लोगों में हड़कंप मच गया। आग की लपटें और धुएं का गुबार देखकर स्थानीय लोगों ने संबंधित अधिकारियों को सूचना दी। सूचना मिलते ही अग्निशमन विभाग हरकत में आया और मोदीनगर फायर स्टेशन से दमकल की तीन गाड़ियों को घटनास्थल के लिए रवाना किया गया। मौके पर पहुंची दमकल टीम ने आग बुझाने का अभियान शुरू किया।
गोदाम में प्लास्टिक मेडिकल वेस्ट होने के कारण आग बुझाना चुनौतीपूर्ण रहा। प्लास्टिक सामग्री में आग लगने पर वह तेजी से फैल सकती है और बड़ी मात्रा में धुआं पैदा कर सकती है। इसके अलावा जलती हुई प्लास्टिक से निकलने वाली गर्मी आसपास रखी दूसरी सामग्री को भी अपनी चपेट में ले सकती है। ऐसे में दमकलकर्मियों को आग बुझाने के साथ उसके आसपास फैलने के खतरे को भी ध्यान में रखना पड़ता है।
इस घटना में गोदाम के अंदर रखी सामग्री को नुकसान पहुंचने की आशंका है। हालांकि, आग से हुए कुल आर्थिक नुकसान का आकलन अभी सामने नहीं आया है। गोदाम में कितनी मात्रा में मेडिकल वेस्ट रखा गया था और उसमें किस प्रकार की सामग्री शामिल थी, इसकी भी आधिकारिक जानकारी उपलब्ध नहीं है।
प्लास्टिक मेडिकल वेस्ट में इस्तेमाल किए गए चिकित्सा उपकरणों से जुड़ी प्लास्टिक सामग्री, पैकेजिंग और अन्य प्रकार का कचरा शामिल हो सकता है। हालांकि, पुरसी गांव के इस गोदाम में वास्तव में किस श्रेणी का मेडिकल वेस्ट रखा गया था, यह जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। मेडिकल वेस्ट का सुरक्षित संग्रहण और निस्तारण बेहद जरूरी होता है, क्योंकि कुछ प्रकार के जैव-चिकित्सीय कचरे से संक्रमण और पर्यावरण प्रदूषण का खतरा हो सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, प्लास्टिक में आग लगने से कार्बन मोनोऑक्साइड सहित कई हानिकारक गैसें और सूक्ष्म कण निकल सकते हैं। इनका प्रभाव इस्तेमाल की गई प्लास्टिक के प्रकार और आग लगने की परिस्थितियों पर निर्भर करता है। धुएं के संपर्क में आने से आंखों में जलन, खांसी और सांस लेने में परेशानी हो सकती है। विशेष रूप से अस्थमा और अन्य श्वसन संबंधी बीमारियों से पीड़ित लोगों के लिए ऐसा धुआं नुकसानदायक हो सकता है।
मेडिकल वेस्ट के संग्रहण और निस्तारण को लेकर देश में बायो-मेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स, 2016 लागू हैं। इन नियमों के तहत जैव-चिकित्सीय कचरे को निर्धारित श्रेणियों में अलग-अलग रखना, सुरक्षित तरीके से परिवहन करना और अधिकृत सुविधाओं में उसका निस्तारण करना आवश्यक है। ऐसे कचरे का अनधिकृत भंडारण या असुरक्षित निस्तारण पर्यावरण और सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर समस्या पैदा कर सकता है।
पुरसी गांव में जिस गोदाम में आग लगी, उसके संचालन और अनुमति संबंधी स्थिति की पुष्टि अभी नहीं हुई है। यह भी स्पष्ट नहीं है कि वहां रखी सामग्री के संग्रहण के लिए संबंधित विभाग से आवश्यक अनुमति ली गई थी या नहीं। ऐसे में बिना जांच के किसी प्रकार की अनियमितता का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।
आग लगने के वास्तविक कारणों का भी अभी पता नहीं चल सका है। शॉर्ट सर्किट, किसी ज्वलनशील पदार्थ के संपर्क या अन्य तकनीकी कारणों की संभावना की जांच की जा सकती है, लेकिन फिलहाल किसी विशेष कारण की पुष्टि नहीं हुई है। आग बुझाने के बाद संबंधित अधिकारियों द्वारा घटनास्थल की जांच किए जाने पर स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
इस घटना ने प्लास्टिक और मेडिकल वेस्ट के भंडारण स्थलों पर अग्नि सुरक्षा व्यवस्था के महत्व को एक बार फिर सामने ला दिया है। ऐसे गोदामों में पर्याप्त अग्निशमन उपकरण, सुरक्षित विद्युत व्यवस्था और आपातकालीन निकासी के इंतजाम होना आवश्यक है। इसके अलावा ज्वलनशील सामग्री का भंडारण निर्धारित सुरक्षा मानकों के अनुसार किया जाना चाहिए।
फिलहाल घटना में किसी व्यक्ति के घायल होने या जनहानि की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। दमकल की तीन गाड़ियों के मौके पर पहुंचने और आग बुझाने का अभियान शुरू किए जाने की जानकारी सामने आई है। आग पर पूरी तरह काबू पाने, गोदाम को हुए नुकसान और घटना के कारणों को लेकर विस्तृत आधिकारिक रिपोर्ट की प्रतीक्षा है।
मुरादनगर के पुरसी गांव में हुई इस घटना ने स्थानीय स्तर पर चिंता बढ़ा दी है। प्लास्टिक मेडिकल वेस्ट से भरे गोदाम में लगी भीषण आग और उससे उठे धुएं के घने गुबार ने यह स्पष्ट कर दिया कि ज्वलनशील कचरे का सुरक्षित भंडारण और प्रभावी अग्नि सुरक्षा व्यवस्था कितनी जरूरी है।
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