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उत्तर प्रदेश
कानपुर में चीनी उद्योग पर महामंथन, आनंदीबेन पटेल होंगी शामिल
Rajeshwari Nishad
13 Oct 2026 2:38 PM IST

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कानपुर। राष्ट्रीय शर्करा संस्थान (एनएसआई), कानपुर का 91वां स्थापना दिवस समारोह 15 अक्टूबर को आयोजित किया जाएगा। इस विशेष अवसर पर उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगी, जबकि प्रदेश के गन्ना विकास एवं शर्करा उद्योग मंत्री लक्ष्मी नारायण चौधरी विशिष्ट अतिथि के तौर पर कार्यक्रम की शोभा बढ़ाएंगे। समारोह में प्रगतिशील गन्ना किसानों के साथ संस्थान के पूर्व वरिष्ठ अधिकारियों और वैज्ञानिकों को उनके योगदान के लिए सम्मानित किया जाएगा।
संस्थान की निदेशक डॉ. सीमा परोहा ने बताया कि स्थापना दिवस समारोह सुबह 11 बजे संस्थान परिसर स्थित शर्करा सौध में आयोजित होगा। कार्यक्रम में संस्थान की उपलब्धियों, शर्करा प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में हुए विकास और गन्ना किसानों के योगदान को प्रमुखता से रेखांकित किया जाएगा। इस आयोजन को संस्थान की ऐतिहासिक यात्रा और देश के चीनी उद्योग में उसकी भूमिका को याद करने के अवसर के रूप में देखा जा रहा है।
15 अक्टूबर को होगा स्थापना दिवस समारोह
राष्ट्रीय शर्करा संस्थान में स्थापना दिवस को लेकर तैयारियां की जा रही हैं। समारोह में प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल की मौजूदगी कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण होगी। वहीं, गन्ना विकास एवं शर्करा उद्योग मंत्री लक्ष्मी नारायण चौधरी की सहभागिता से प्रदेश के गन्ना और चीनी उद्योग से जुड़े मुद्दों पर भी ध्यान केंद्रित होने की उम्मीद है।
कार्यक्रम के दौरान प्रगतिशील गन्ना किसानों को सम्मानित किया जाएगा। इसके साथ ही संस्थान के पूर्व वरिष्ठ अधिकारियों और वैज्ञानिकों को भी उनके योगदान के लिए सम्मान प्रदान किया जाएगा। इन लोगों ने संस्थान के विकास, शोध कार्यों और शर्करा प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
गन्ना किसानों का सम्मान इस आयोजन का एक अहम हिस्सा होगा। गन्ना उत्पादन और चीनी उद्योग देश की कृषि आधारित अर्थव्यवस्था के महत्वपूर्ण अंग हैं। किसानों की बेहतर उत्पादन तकनीकों, गुणवत्ता और वैज्ञानिक खेती से संबंधित प्रयासों को प्रोत्साहित करना कृषि क्षेत्र के विकास के लिए उपयोगी माना जाता है।
वर्ष 1936 में हुई थी संस्थान की स्थापना
राष्ट्रीय शर्करा संस्थान का इतिहास देश में चीनी प्रौद्योगिकी के विकास से जुड़ा हुआ है। संस्थान की स्थापना अक्टूबर 1936 में हुई थी। उस समय हरकोर्ट बटलर टेक्नोलॉजिकल इंस्टीट्यूट (एचबीटीआई) के शर्करा अनुभाग को अलग करके इसे इंपीरियल इंस्टीट्यूट ऑफ शुगर टेक्नोलॉजी के नाम से स्थापित किया गया था।
बाद में यह संस्थान राष्ट्रीय शर्करा संस्थान के रूप में जाना जाने लगा। इसकी स्थापना का उद्देश्य चीनी उद्योग से संबंधित तकनीकी ज्ञान, वैज्ञानिक शोध और प्रशिक्षित मानव संसाधन के विकास को बढ़ावा देना था।
बीते दशकों में चीनी उद्योग की जरूरतों में कई बदलाव आए हैं। उत्पादन प्रक्रिया में आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल, गुणवत्ता नियंत्रण, ऊर्जा दक्षता और औद्योगिक प्रक्रियाओं में सुधार जैसे विषय लगातार महत्वपूर्ण होते गए हैं। ऐसे में शर्करा प्रौद्योगिकी से जुड़े संस्थानों की भूमिका भी बढ़ी है।
चीनी उद्योग के विकास में संस्थान की भूमिका
भारत में चीनी उद्योग कृषि और औद्योगिक क्षेत्र के बीच महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में काम करता है। इस उद्योग का सीधा संबंध गन्ना किसानों, चीनी मिलों, तकनीकी विशेषज्ञों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से है। गन्ने की खेती से लेकर चीनी के उत्पादन और उसकी गुणवत्ता सुनिश्चित करने तक कई चरणों में वैज्ञानिक तकनीकों की आवश्यकता होती है।
राष्ट्रीय शर्करा संस्थान जैसे संस्थान शर्करा प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में शिक्षा, प्रशिक्षण और अनुसंधान को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। तकनीकी रूप से प्रशिक्षित युवाओं की उपलब्धता और उत्पादन प्रक्रियाओं में सुधार से उद्योग की कार्यक्षमता बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
चीनी उद्योग के सामने समय-समय पर उत्पादन लागत, ऊर्जा खपत, संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल और पर्यावरण संबंधी चुनौतियां भी आती हैं। इन चुनौतियों से निपटने के लिए शोध और नई तकनीकों का विकास आवश्यक है। स्थापना दिवस जैसे आयोजन संस्थान की अब तक की उपलब्धियों की समीक्षा करने और भविष्य की जरूरतों पर चर्चा करने का अवसर प्रदान करते हैं।
प्रगतिशील किसानों और वैज्ञानिकों को मिलेगा सम्मान
स्थापना दिवस समारोह में प्रगतिशील गन्ना किसानों को सम्मानित करने का निर्णय कृषि क्षेत्र में उनके योगदान को पहचान देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। किसानों की मेहनत और बेहतर कृषि पद्धतियां गन्ने की उत्पादकता तथा गुणवत्ता में सुधार के लिए अहम होती हैं।
इसके अलावा, संस्थान के पूर्व वरिष्ठ अधिकारियों और वैज्ञानिकों को सम्मानित करके उनके लंबे समय के योगदान को याद किया जाएगा। संस्थान के विकास में प्रशासनिक नेतृत्व, तकनीकी विशेषज्ञता और वैज्ञानिक अनुसंधान की भूमिका महत्वपूर्ण रही है।
इस प्रकार का सम्मान समारोह वर्तमान पीढ़ी के विद्यार्थियों, शोधार्थियों और तकनीकी विशेषज्ञों को भी प्रेरित कर सकता है। इससे उन्हें संस्थान की विरासत और शर्करा प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में उपलब्ध अवसरों को समझने का मौका मिलेगा।
कृषि और तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण आयोजन
राष्ट्रीय शर्करा संस्थान का 91वां स्थापना दिवस केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि संस्थान की ऐतिहासिक यात्रा और उसके कार्यक्षेत्र को समझने का अवसर भी होगा। वर्ष 1936 में स्थापित इस संस्थान ने शर्करा प्रौद्योगिकी को केंद्र में रखकर अपनी पहचान बनाई है।
15 अक्टूबर को सुबह 11 बजे शर्करा सौध में आयोजित होने वाले समारोह में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल मुख्य अतिथि और मंत्री लक्ष्मी नारायण चौधरी विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल होंगे। कार्यक्रम में किसानों, वैज्ञानिकों और पूर्व वरिष्ठ अधिकारियों का सम्मान किया जाएगा।
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