उत्तर प्रदेश

JPNIC को लेकर बड़ा फैसला लीज पर देकर बेहतर सुविधाओं की तैयारी

Ratna Netam
26 Aug 2026 9:01 PM IST
JPNIC को लेकर बड़ा फैसला लीज पर देकर बेहतर सुविधाओं की तैयारी
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उत्तर प्रदेश : राजधानी लखनऊ स्थित **जयप्रकाश नारायण इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर (JPNIC)** को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। लंबे समय से बंद पड़े इस प्रतिष्ठित प्रोजेक्ट को अब **30 साल की लीज पर देने का फैसला** किया गया है। इसके रखरखाव और संचालन की जिम्मेदारी निजी कंपनियों को सौंपी जाएगी।
जानकारी के मुताबिक, **वृंदावन बॉटलर्स और राकवुड कंपनी** मिलकर JPNIC का रखरखाव और संचालन करेंगी। इस फैसले के बाद एक बार फिर यह मामला राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है।
30 साल की लीज पर दिया गया JPNIC
JPNIC को बेहतर तरीके से संचालित करने और उसकी उपयोगिता बढ़ाने के उद्देश्य से इसे लंबी अवधि के लिए लीज पर देने का निर्णय लिया गया है।
करीब 30 साल की लीज अवधि में निजी कंपनियां कन्वेंशन सेंटर की देखरेख, मरम्मत, रखरखाव और संचालन का काम संभालेंगी।
प्रशासन का मानना है कि निजी भागीदारी से इस बड़े परिसर का बेहतर उपयोग हो सकेगा और इसे फिर से सक्रिय बनाया जा सकेगा।
वृंदावन बॉटलर्स और राकवुड संभालेंगी जिम्मेदारी
JPNIC के रखरखाव की जिम्मेदारी वृंदावन बॉटलर्स और राकवुड कंपनी को दी गई है। दोनों कंपनियां मिलकर इस परिसर की सुविधाओं को बेहतर बनाने का काम करेंगी।
इसमें भवन की देखरेख, तकनीकी व्यवस्था, साफ-सफाई, सुरक्षा और अन्य जरूरी सुविधाओं को व्यवस्थित करना शामिल होगा।
कंपनियों का लक्ष्य JPNIC को एक आधुनिक और उपयोगी आयोजन स्थल के रूप में विकसित करना बताया जा रहा है।
अखिलेश सरकार की योजना से जुड़ा था JPNIC
जयप्रकाश नारायण इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर का निर्माण समाजवादी पार्टी की सरकार के कार्यकाल में शुरू किया गया था। इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रमों, सम्मेलनों और आयोजनों के लिए तैयार किया गया था।
हालांकि निर्माण पूरा होने के बाद भी लंबे समय तक इसका उपयोग नहीं हो पाया। इसके चलते यह परिसर लगातार राजनीतिक विवादों में रहा।
JPNIC को लेकर राजनीतिक विवाद
JPNIC को लेकर उत्तर प्रदेश की राजनीति में समय-समय पर विवाद सामने आते रहे हैं। समाजवादी पार्टी ने कई बार इसे लेकर सरकार पर निशाना साधा है।
सपा नेताओं का आरोप रहा है कि सरकार जानबूझकर इस परियोजना को नजरअंदाज कर रही है। वहीं सरकार का कहना है कि परिसर का सही इस्तेमाल और रखरखाव जरूरी है।
अब लीज पर दिए जाने के फैसले के बाद राजनीतिक बहस फिर तेज हो सकती है।
निजी हाथों में जाने से क्या होगा फायदा?
प्रशासन का तर्क है कि निजी कंपनियों को जिम्मेदारी देने से JPNIC का बेहतर रखरखाव हो सकेगा।
लंबे समय से बंद पड़े परिसर में कई जगह मरम्मत और सुविधाओं के उन्नयन की जरूरत है। निजी निवेश आने से इसे दोबारा उपयोग के लायक बनाया जा सकता है।
इसके अलावा यहां बड़े कार्यक्रम, कॉर्पोरेट मीटिंग, सांस्कृतिक आयोजन और अन्य गतिविधियां आयोजित की जा सकेंगी।
लखनऊ को मिल सकता है बड़ा आयोजन स्थल
लखनऊ देश के तेजी से विकसित होते शहरों में शामिल है। यहां बड़े स्तर पर सरकारी, निजी और अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम आयोजित होते हैं।
JPNIC के दोबारा सक्रिय होने से शहर को एक बड़े कन्वेंशन और इवेंट सेंटर के रूप में फायदा मिल सकता है।
इससे पर्यटन और स्थानीय कारोबार को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
रखरखाव पर रहेगा खास जोर
किसी भी बड़े भवन को लंबे समय तक बेहतर स्थिति में रखने के लिए नियमित रखरखाव जरूरी होता है।
JPNIC में आधुनिक सुविधाएं मौजूद हैं, लेकिन लंबे समय तक उपयोग न होने के कारण इसकी देखरेख चुनौती बन गई थी।
अब नई व्यवस्था के तहत इसकी सुविधाओं को फिर से बेहतर बनाने पर ध्यान दिया जाएगा।
विपक्ष उठा सकता है सवाल
JPNIC को लीज पर देने के फैसले पर विपक्ष सरकार को घेर सकता है। विपक्षी दल पहले भी इस परियोजना को लेकर सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते रहे हैं।
वहीं सरकार का पक्ष है कि सार्वजनिक संपत्ति का बेहतर उपयोग होना चाहिए और इसे खाली छोड़ना उचित नहीं है।
आगे की प्रक्रिया
अब लीज समझौते के तहत कंपनियां JPNIC के रखरखाव और संचालन की जिम्मेदारी संभालेंगी।
आने वाले समय में यह साफ होगा कि परिसर में क्या बदलाव किए जाते हैं और इसे आम लोगों के लिए किस तरह उपयोगी बनाया जाता है।
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