उत्तर प्रदेश

लापता हिस्ट्रीशीटर मामले में बड़ा फैसला हाई कोर्ट का CBI को आदेश

Ratna Netam
1 Sept 2026 8:27 PM IST
लापता हिस्ट्रीशीटर मामले में बड़ा फैसला हाई कोर्ट का CBI को आदेश
x
प्रयागराज : उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर से जुड़े एक मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने बड़ा कदम उठाते हुए एक हिस्ट्रीशीटर की कथित गुमशुदगी की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंप दी है। अदालत ने यह फैसला उस याचिका पर सुनवाई के बाद लिया, जिसमें आरोप लगाया गया था कि जमानत पर जेल से बाहर आने के बाद पुलिस ने व्यक्ति को हिरासत में लिया और उसके बाद से उसका कोई पता नहीं है।
मामला मुजफ्फरनगर निवासी हिस्ट्रीशीटर मुत्तलिव से जुड़ा है। उसके खिलाफ जिले के अलग-अलग थानों में करीब 30 आपराधिक मामले दर्ज बताए गए हैं। हाई कोर्ट के जमानत आदेश के बाद उसे 4 मई 2026 को जेल से रिहा किया गया था। आरोप है कि रिहाई के तुरंत बाद पुलिस ने उसे और उसके पिता को हिरासत में ले लिया। कुछ दिन बाद पिता को छोड़ दिया गया, लेकिन मुत्तलिव तभी से लापता है।
भाई ने दाखिल की थी बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका
मुत्तलिव के लापता होने के बाद उसके भाई आलम ने इलाहाबाद हाई कोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दाखिल की। याचिका में आरोप लगाया गया कि पुलिस हिरासत के बाद से मुत्तलिव का कोई सुराग नहीं मिल रहा है और परिवार को उसके बारे में कोई जानकारी नहीं दी जा रही है।
बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका का उद्देश्य किसी व्यक्ति को अवैध हिरासत से मुक्त कराना या अदालत के सामने उसकी स्थिति स्पष्ट कराना होता है। इस मामले में भी याचिकाकर्ता ने अदालत से अपने भाई को पेश करने और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की थी।
पुलिस पर उठे सवाल
मामले में पुलिस की भूमिका पर सवाल खड़े हुए हैं। परिवार का आरोप है कि मुत्तलिव को हिरासत में लेने के बाद पुलिस ने उसे कहीं और भेज दिया या उसके बारे में जानकारी छिपाई। हालांकि पुलिस की ओर से इस मामले में क्या जवाब दिया गया, इस पर आगे की जांच में स्थिति साफ होगी।
अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी से कराने का फैसला लिया। हाई कोर्ट का मानना है कि मामले की निष्पक्ष जांच जरूरी है ताकि सच्चाई सामने आ सके।
CBI करेगी पूरे मामले की जांच
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने अब इस मामले की जांच CBI को सौंप दी है। केंद्रीय एजेंसी अब यह पता लगाएगी कि मुत्तलिव के साथ रिहाई के बाद क्या हुआ, वह कहां गया और उसकी कथित गुमशुदगी के पीछे क्या कारण हैं।
CBI जांच में पुलिस अधिकारियों की भूमिका, हिरासत से जुड़े रिकॉर्ड, कॉल डिटेल और अन्य सबूतों की जांच की जा सकती है। इसके अलावा यह भी देखा जाएगा कि क्या नियमों के अनुसार कार्रवाई की गई थी या नहीं।
परिवार को न्याय की उम्मीद
मुत्तलिव के परिवार का कहना है कि उन्हें लंबे समय से अपने सदस्य के बारे में कोई जानकारी नहीं मिल पा रही है। परिवार ने अदालत से उम्मीद जताई थी कि निष्पक्ष जांच होने पर सच्चाई सामने आएगी।
अब CBI की जांच शुरू होने के बाद परिवार को उम्मीद है कि मुत्तलिव के लापता होने की पूरी कहानी सामने आएगी और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई होगी।
आपराधिक रिकॉर्ड के कारण भी चर्चा में रहा मामला
मुत्तलिव का नाम पहले से कई आपराधिक मामलों में दर्ज होने के कारण यह मामला और भी चर्चा में आ गया है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार उसके खिलाफ करीब 30 मामले दर्ज हैं। हालांकि, किसी व्यक्ति का आपराधिक रिकॉर्ड होने से उसकी हिरासत या गुमशुदगी के मामले में कानून के तहत प्रक्रिया का पालन करना जरूरी होता है।
अब CBI जांच से खुलेगा राज
फिलहाल पूरा मामला CBI जांच के हवाले है। जांच एजेंसी के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह पता लगाना होगी कि रिहाई के बाद मुत्तलिव के साथ क्या हुआ और वह कहां है।
इलाहाबाद हाई कोर्ट के इस फैसले के बाद अब सभी की नजर CBI की जांच रिपोर्ट पर है। अगर जांच में किसी तरह की लापरवाही या अवैध कार्रवाई सामने आती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई हो सकती है।
Next Story