उत्तर प्रदेश

यूपी पंचायत चुनाव से पहले योगी सरकार का बड़ा फैसला

Kavita2
27 Oct 2026 9:08 AM IST
यूपी पंचायत चुनाव से पहले योगी सरकार का बड़ा फैसला
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लखनऊ। उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव से पहले मतदाता सूची को लेकर योगी आदित्यनाथ सरकार बड़ा बदलाव करने की तैयारी में है। देशभर में वोटर लिस्ट और चुनावी प्रक्रिया को लेकर जारी राजनीतिक विवाद के बीच प्रदेश सरकार ऐसा कानूनी प्रावधान लाने जा रही है, जिससे गांवों की मतदाता सूची में मनमाने ढंग से नाम शामिल कराना मुश्किल हो जाएगा। इसके लिए उत्तर प्रदेश पंचायत राज अधिनियम, 1947 में संशोधन का प्रस्ताव तैयार किया गया है। सरकार की इस पहल का उद्देश्य पंचायत चुनावों में मतदाता सूची की पारदर्शिता बढ़ाना और चुनावी लाभ के लिए होने वाली कथित गड़बड़ियों पर अंकुश लगाना है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, पंचायती राज विभाग ने संशोधन का मसौदा तैयार कर 15 अक्टूबर 2026 को मंत्रिपरिषद की मंजूरी के लिए भेज दिया है। प्रस्ताव मुख्य रूप से अधिनियम की धारा 9(3) से जुड़ा है, जिसके अंतर्गत ग्राम पंचायत की मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने के लिए सामान्य निवास की पात्रता निर्धारित की गई है। हालांकि प्रस्ताव को अभी अंतिम मंजूरी मिलने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

गांव की वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाने के नियम होंगे स्पष्ट

प्रस्तावित बदलाव के तहत यह स्पष्ट किया जाएगा कि किसी व्यक्ति को संबंधित ग्राम पंचायत का सामान्य निवासी किन परिस्थितियों में माना जाएगा। वर्तमान व्यवस्था में सामान्य निवास को लेकर विवाद सामने आते रहे हैं। कई बार चुनाव के समय ऐसे लोगों के नाम मतदाता सूची में शामिल कराने के आरोप लगते हैं, जो वास्तव में किसी दूसरे स्थान पर रहते हैं।

वहीं दूसरी ओर, गांव में रहने वाले पात्र मतदाताओं को भी निवास संबंधी विवादों के कारण परेशानी उठानी पड़ सकती है। सरकार की कोशिश इन समस्याओं के समाधान के लिए स्पष्ट मानदंड निर्धारित करने की है।

नए प्रावधान लागू होने के बाद मतदाता सूची में नाम शामिल करने के दावों की जांच अधिक व्यवस्थित तरीके से हो सकेगी। इससे चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ने और मतदाता सूची से संबंधित विवाद कम होने की उम्मीद जताई जा रही है।

हाईकोर्ट के आदेश के बाद तेज हुई प्रक्रिया

इस प्रस्ताव के पीछे इलाहाबाद हाईकोर्ट के निर्देशों की भी महत्वपूर्ण भूमिका बताई जा रही है। जानकारी के अनुसार, 17 दिसंबर 2019 को हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को सामान्य निवासी निर्धारित करने के लिए आवश्यक मानदंड बनाने का निर्देश दिया था।

राजेश कुमार और सावित्री देवी से संबंधित विशेष अपील में सामान्य निवास की पात्रता को लेकर सवाल उठाए गए थे। इसके बावजूद लंबे समय तक स्पष्ट नियम तैयार नहीं हो सके।

वर्ष 2026 में मामला मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली की अध्यक्षता वाली खंडपीठ के समक्ष दोबारा पहुंचा। रिपोर्ट के मुताबिक, अदालत ने निर्देशों के अनुपालन में हुई देरी पर नाराजगी जताई और सरकार को आवश्यक कार्रवाई करने के लिए सचेत किया। इसके बाद पंचायती राज विभाग ने संशोधन प्रस्ताव तैयार करने की प्रक्रिया तेज की।

केवल मकान होने से तय नहीं होगा सामान्य निवास

उत्तर प्रदेश पंचायत राज अधिनियम की धारा 9(3) में मतदाता बनने के लिए सामान्य निवास की शर्त पहले से मौजूद है। कानून के अनुसार, केवल किसी गांव में मकान का मालिक होना या मकान पर कब्जा होना सामान्य निवास का निर्णायक आधार नहीं है।

इसके साथ ही, अस्थायी रूप से गांव से बाहर रहने वाला व्यक्ति सिर्फ इसी कारण अपने सामान्य निवास की पात्रता नहीं खो देता। किसी व्यक्ति के निवास से संबंधित विवाद का निर्णय उसके मामले के सभी तथ्यों के आधार पर किया जाना चाहिए।

इन्हीं कानूनी प्रावधानों को लागू करने के लिए अतिरिक्त मानदंड निर्धारित करने की तैयारी है, ताकि संबंधित अधिकारियों को पात्रता का निर्णय लेने में स्पष्ट मार्गदर्शन मिल सके।

पंचायत चुनाव में मतदाता सूची की अहम भूमिका

उत्तर प्रदेश में ग्राम प्रधान, ग्राम पंचायत सदस्य और अन्य पंचायत प्रतिनिधियों के चुनाव में मतदाता सूची बेहद महत्वपूर्ण होती है। कई गांवों में उम्मीदवारों के बीच जीत और हार का अंतर बहुत कम वोटों का रहता है। ऐसी स्थिति में मतदाता सूची में गलत नाम जुड़ने या पात्र व्यक्ति का नाम छूटने से चुनावी परिणाम प्रभावित होने की आशंका रहती है।

पंचायत चुनाव के दौरान मतदाता सूची को लेकर आपत्तियां और शिकायतें भी सामने आती हैं। स्थानीय स्तर पर राजनीतिक प्रतिस्पर्धा के कारण इन विवादों का असर गांवों के सामाजिक माहौल पर भी पड़ सकता है।

सरकार के प्रस्ताव का उद्देश्य ऐसी परिस्थितियों में नाम दर्ज करने की प्रक्रिया को अधिक स्पष्ट बनाना है। हालांकि नए नियम कितने प्रभावी होंगे, यह उनके अंतिम स्वरूप और प्रशासनिक क्रियान्वयन पर निर्भर करेगा।

वास्तविक मतदाताओं के अधिकारों की सुरक्षा भी जरूरी

कानून में बदलाव के दौरान यह सुनिश्चित करना भी आवश्यक होगा कि रोजगार, शिक्षा या अन्य कारणों से अस्थायी रूप से गांव से बाहर रहने वाले पात्र नागरिकों के मतदान अधिकार प्रभावित न हों।

कई ग्रामीण परिवारों के सदस्य कामकाज के लिए शहरों और दूसरे राज्यों में जाते हैं। ऐसे मामलों में सामान्य निवास की कानूनी शर्तों और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर निर्णय लेना महत्वपूर्ण होगा।

मौजूदा कानून के अनुसार, किसी मतदाता के हित को प्रभावित करने वाली प्रविष्टि हटाने या सुधारने से पहले उसे सुनवाई का उचित अवसर देना जरूरी है। इसके अलावा एक व्यक्ति का नाम एक से अधिक पंचायत निर्वाचन क्षेत्रों की मतदाता सूची में दर्ज नहीं किया जा सकता।

कैबिनेट की मंजूरी के बाद आगे बढ़ेगी प्रक्रिया

पंचायती राज विभाग द्वारा तैयार प्रस्ताव पर अब मंत्रिपरिषद के निर्णय का इंतजार है। मंजूरी और आवश्यक कानूनी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद ही नए प्रावधान प्रभावी हो सकेंगे।

सरकार की इस पहल से पंचायत चुनावों में मतदाता सूची तैयार करने की व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाने की उम्मीद है। हालांकि अंतिम नियमों में निवास सत्यापन के लिए कौन से दस्तावेज या अतिरिक्त मानदंड निर्धारित किए जाएंगे, यह अभी स्पष्ट नहीं है।

राजनीतिक दृष्टि से भी यह प्रस्ताव महत्वपूर्ण माना जा रहा है। देशभर में मतदाता सूची की शुद्धता को लेकर जारी बहस के बीच उत्तर प्रदेश की पंचायत चुनाव व्यवस्था में संभावित बदलाव पर राजनीतिक दलों, पंचायत प्रतिनिधियों और ग्रामीण मतदाताओं की नजर बनी हुई है।

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