उत्तर प्रदेश

मोदी सरकार के 12 वर्षों में प्रशासनिक व्यवस्था में बड़ा बदलाव

Kavita2
23 Oct 2026 3:42 PM IST
मोदी सरकार के 12 वर्षों में प्रशासनिक व्यवस्था में बड़ा बदलाव
x

लखनऊ। केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में वर्ष 2014 से प्रशासनिक सुधारों को प्राथमिकता दी गई है। सरकार का उद्देश्य ऐसी व्यवस्था विकसित करना है, जिसमें नागरिकों का विश्वास मजबूत हो और सरकारी सेवाएं अधिक सरल, पारदर्शी तथा जवाबदेह बनें। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक सुधार केवल सरकारी कार्यालयों की कार्यप्रणाली बदलने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इनके माध्यम से आम नागरिकों के जीवन को आसान बनाने का प्रयास किया जा रहा है। डॉ. सिंह के अनुसार, बीते 12 वर्षों में डिजिटल तकनीक, शिकायत निवारण, पेंशन व्यवस्था और सरकारी प्रक्रियाओं के सरलीकरण के जरिए नागरिक केंद्रित प्रशासन को मजबूत करने की दिशा में कई कदम उठाए गए हैं।

2014 से प्रशासनिक सुधारों पर विशेष जोर

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि वर्ष 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार बनने के बाद प्रशासनिक व्यवस्था में सुधार को प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल किया गया।

उन्होंने बताया कि सरकार ने ऐसी कार्यप्रणाली विकसित करने का प्रयास किया, जिसमें नागरिकों को सामान्य सेवाओं के लिए अनावश्यक सरकारी प्रक्रियाओं से न गुजरना पड़े।

इसके लिए विभिन्न विभागों में डिजिटल तकनीक के इस्तेमाल को बढ़ावा दिया गया।

सरकारी सेवाओं को ऑनलाइन उपलब्ध कराने और शिकायतों के समयबद्ध समाधान की दिशा में भी काम किया गया।

केंद्रीय मंत्री के अनुसार, इन पहलों का मुख्य उद्देश्य सरकारी संस्थानों और नागरिकों के बीच विश्वास बढ़ाना है।

नागरिकों का विश्वास मजबूत करना जरूरी

जितेंद्र सिंह ने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में नागरिकों का सरकारी संस्थानों पर विश्वास अत्यंत महत्वपूर्ण होता है।

उनके अनुसार, प्रशासन तभी प्रभावी माना जा सकता है, जब आम नागरिक बिना अनावश्यक परेशानी के सरकारी सेवाओं का लाभ प्राप्त कर सकें।

उन्होंने कहा कि सरकार को नागरिकों की समस्याओं के समाधान में सहयोगी की भूमिका निभानी चाहिए।

इसी उद्देश्य से पिछले वर्षों में कई प्रक्रियाओं को सरल बनाया गया है।

सरकारी सेवाओं में पारदर्शिता बढ़ाने और निर्णय प्रक्रिया को अधिक जवाबदेह बनाने पर भी जोर दिया गया है।

पुराने नियमों को समाप्त करने की पहल

केंद्रीय मंत्री ने प्रशासनिक सुधारों का उल्लेख करते हुए बताया कि सरकार ने लगभग दो हजार पुराने और अप्रासंगिक नियमों तथा प्रक्रियाओं को समाप्त किया है।

उनका कहना है कि इनमें कई ऐसे प्रावधान शामिल थे, जिनके कारण नागरिकों और कर्मचारियों को अनावश्यक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था।

नियमों के सरलीकरण का उद्देश्य सरकारी कामकाज में देरी कम करना और सेवाओं की उपलब्धता बेहतर बनाना है।

डॉ. सिंह ने कहा कि आधुनिक प्रशासनिक व्यवस्था में ऐसे नियमों की आवश्यकता है, जो नागरिकों की जरूरतों के अनुरूप हों।

उन्होंने प्रशासनिक सोच में बदलाव को भी तकनीकी सुधारों जितना महत्वपूर्ण बताया।

दस्तावेजों के स्व-सत्यापन से मिली सुविधा

केंद्र सरकार ने वर्ष 2014 में दस्तावेजों के स्व-सत्यापन की व्यवस्था को बढ़ावा देने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया था।

इसका उद्देश्य नागरिकों को अनेक सामान्य सरकारी प्रक्रियाओं में राजपत्रित अधिकारियों से दस्तावेज सत्यापित कराने की अनिवार्यता से राहत देना था।

जितेंद्र सिंह ने कहा कि इस बदलाव के पीछे नागरिकों पर विश्वास करने की सोच थी।

पहले कई सरकारी कार्यों में लोगों को दस्तावेजों के सत्यापन के लिए अधिकारियों के कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते थे।

स्व-सत्यापन की व्यवस्था से संबंधित प्रक्रियाओं में सुविधा बढ़ाने का प्रयास किया गया।

हालांकि, कुछ विशेष कार्यों में आज भी संबंधित नियमों के अनुसार अतिरिक्त सत्यापन आवश्यक हो सकता है।

शिकायत निवारण प्रणाली में बड़ा बदलाव

केंद्रीय मंत्री ने केंद्रीकृत लोक शिकायत निवारण एवं निगरानी प्रणाली यानी सीपीग्राम्स का उल्लेख करते हुए कहा कि इस मंच ने नागरिक शिकायतों के समाधान की व्यवस्था को मजबूत किया है।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2014 में केंद्र सरकार के पास सालाना लगभग दो लाख शिकायतें दर्ज होती थीं।

यह संख्या बढ़कर करीब 25 लाख प्रतिवर्ष तक पहुंच गई है।

डॉ. सिंह ने इसे शिकायत दर्ज कराने की व्यवस्था के प्रति बढ़ते नागरिक विश्वास का संकेत बताया।

उन्होंने कहा कि तकनीकी सुधारों और निरंतर निगरानी के कारण शिकायतों के निपटान में लगने वाला औसत समय भी कम हुआ है।

सरकार के जून 2026 के विवरण के अनुसार, औसत निपटान अवधि 157 दिनों से घटकर लगभग 13 दिन रह गई थी।

डिजिटल तकनीक से सरकारी सेवाओं में सुधार

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि डिजिटल तकनीक प्रशासनिक सुधारों का महत्वपूर्ण आधार बन गई है।

उन्होंने बताया कि ई-ऑफिस, ऑनलाइन शिकायत पोर्टल और डिजिटल दस्तावेजों जैसी व्यवस्थाओं से सरकारी कामकाज को अधिक प्रभावी बनाने का प्रयास किया गया है।

डिजिटल सेवाओं के माध्यम से नागरिकों को कई सरकारी कार्यालयों में व्यक्तिगत रूप से जाने की आवश्यकता कम हो सकती है।

इसके अलावा ऑनलाइन आवेदन और शिकायत की स्थिति जानने की सुविधा से प्रक्रियाओं की पारदर्शिता बढ़ाने में मदद मिलती है।

हालांकि, इन सुविधाओं का वास्तविक लाभ नागरिकों तक पहुंचाने के लिए इंटरनेट की उपलब्धता और डिजिटल साक्षरता भी महत्वपूर्ण है।

पेंशनभोगियों के लिए नई सुविधाएं

केंद्रीय मंत्री ने पेंशनभोगियों की सुविधा के लिए शुरू की गई डिजिटल जीवन प्रमाणपत्र व्यवस्था का भी उल्लेख किया।

इसके माध्यम से पेंशन प्राप्त करने वाले लोग निर्धारित प्रक्रिया के तहत डिजिटल तरीके से अपना जीवन प्रमाणपत्र जमा कर सकते हैं।

चेहरे की पहचान पर आधारित तकनीक ने भी इस प्रक्रिया को अधिक सुविधाजनक बनाने में भूमिका निभाई है।

विशेष रूप से बुजुर्ग और चलने-फिरने में कठिनाई महसूस करने वाले पेंशनभोगियों को इससे लाभ मिल सकता है।

जितेंद्र सिंह ने कहा कि सरकार का प्रयास है कि नागरिकों को आवश्यक सेवाओं के लिए अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।

मिशन कर्मयोगी से कर्मचारियों को प्रशिक्षण

सरकारी कर्मचारियों की कार्यक्षमता बढ़ाने के लिए मिशन कर्मयोगी जैसी पहल भी शुरू की गई है।

इसका उद्देश्य कर्मचारियों को आधुनिक प्रशासनिक आवश्यकताओं के अनुरूप प्रशिक्षित करना है।

इस कार्यक्रम के तहत कर्मचारियों के कौशल विकास, तकनीकी जानकारी और नागरिक केंद्रित सेवाओं पर जोर दिया जाता है।

सरकार का मानना है कि बेहतर प्रशिक्षित कर्मचारी सरकारी योजनाओं और सेवाओं को अधिक प्रभावी तरीके से लागू कर सकते हैं।

प्रशासनिक सुधारों की सफलता के लिए कर्मचारियों की कार्यशैली और व्यवहार में बदलाव भी महत्वपूर्ण माना गया है।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उपयोग पर जोर

डॉ. जितेंद्र सिंह ने भविष्य की प्रशासनिक व्यवस्था में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया है।

उनके अनुसार, एआई आधारित तकनीक शिकायतों की निगरानी, सूचनाओं के विश्लेषण और सरकारी प्रक्रियाओं को बेहतर बनाने में सहायता कर सकती है।

सरकार डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे, साइबर सुरक्षा और एकीकृत नागरिक सेवाओं जैसे क्षेत्रों में सुधार को आगे बढ़ाना चाहती है।

हालांकि, ऐसी तकनीकों के इस्तेमाल के दौरान नागरिकों की गोपनीयता, डेटा सुरक्षा और मानवीय निगरानी सुनिश्चित करना भी आवश्यक होगा।

राज्यों से सफल व्यवस्थाएं अपनाने की अपील

केंद्रीय मंत्री ने राज्य सरकारों से भी सफल प्रशासनिक व्यवस्थाओं को अपनाने की अपील की है।

उन्होंने कहा कि अलग-अलग राज्यों में विकसित अच्छी कार्यप्रणालियों को साझा करने से सार्वजनिक सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार किया जा सकता है।

इसके लिए केंद्र और राज्यों के बीच समन्वय बढ़ाने की आवश्यकता है।

उनके अनुसार, प्रशासनिक सुधारों का लाभ तभी व्यापक स्तर पर मिलेगा, जब वे ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों तक पहुंचेंगे।

सरकारी सेवाओं में सुधार के लिए स्थानीय परिस्थितियों और नागरिकों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखना भी जरूरी है।

विकसित भारत 2047 के लक्ष्य से जुड़े प्रशासनिक सुधार

डॉ. जितेंद्र सिंह ने प्रशासनिक सुधारों को वर्ष 2047 तक विकसित भारत बनाने के लक्ष्य से भी जोड़ा।

उन्होंने कहा कि देश के आर्थिक और सामाजिक विकास के लिए प्रभावी शासन व्यवस्था आवश्यक है।

पारदर्शी प्रक्रियाएं, समय पर सेवाएं और जवाबदेह संस्थान विकास योजनाओं को लागू करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि प्रशासनिक सुधार एक निरंतर प्रक्रिया है, जिसे बदलती तकनीक और सामाजिक आवश्यकताओं के अनुसार आगे बढ़ाना होगा।

नागरिक केंद्रित शासन पर सरकार का जोर

केंद्रीय मंत्री के अनुसार, पिछले 12 वर्षों में सरकार ने प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक सरल और नागरिक केंद्रित बनाने के लिए अनेक पहल की हैं।

उन्होंने दावा किया कि शिकायत निवारण, डिजिटल सेवाओं और नियमों के सरलीकरण से सरकारी संस्थानों की कार्यप्रणाली में बदलाव आया है।

हालांकि, इन सुधारों की वास्तविक सफलता का मूल्यांकन सेवाओं की गुणवत्ता, नागरिकों की संतुष्टि और शिकायतों के प्रभावी समाधान के आधार पर किया जाना आवश्यक है।

डॉ. सिंह ने कहा कि आने वाले वर्षों में प्रशासन को और अधिक आधुनिक, जवाबदेह तथा नागरिकों की आवश्यकताओं के अनुरूप बनाने के प्रयास जारी रहेंगे।

Next Story