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मथुरा में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल, 5 एसडीएम के कार्यक्षेत्र बदले, डीएम सीपी सिंह ने जारी किया आदेश

मथुरा। उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले में प्रशासनिक व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए जिलाधिकारी चंद्र प्रकाश सिंह (सीपी सिंह) ने बड़ा फेरबदल किया है। डीएम ने एसडीएम स्तर के पांच अधिकारियों के कार्यक्षेत्र में बदलाव करते हुए उन्हें नई जिम्मेदारियां सौंपी हैं। इस फेरबदल में गोवर्धन, छाता, महावन और सदर तहसील से जुड़े अधिकारी शामिल हैं। सभी अधिकारियों की नई तैनाती तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई है। प्रशासनिक बदलाव के बाद संबंधित अधिकारियों को नई जिम्मेदारियों के अनुसार कार्यभार संभालने की व्यवस्था की गई है।
जिलाधिकारी के आदेश के मुताबिक, गोवर्धन में उपजिलाधिकारी के पद पर तैनात प्रशिक्षु आईएएस अधिकारी सलोनी गौतम को अब गोवर्धन में ही उपजिलाधिकारी न्यायिक की जिम्मेदारी सौंपी गई है। वहीं, गोवर्धन में उपजिलाधिकारी न्यायिक के पद पर कार्यरत संजय सिंह को गोवर्धन का नया एसडीएम बनाया गया है। इस बदलाव के बाद गोवर्धन तहसील की प्रशासनिक जिम्मेदारी संजय सिंह के हाथों में आ गई है।
इसके अलावा मथुरा में तैनात उपजिलाधिकारी न्यायिक साक्षी शर्मा को छाता तहसील का नया एसडीएम नियुक्त किया गया है। छाता में अब तक एसडीएम की जिम्मेदारी संभाल रहे अखिलेश कुमार को महावन में एसडीएम न्यायिक बनाया गया है। वहीं, महावन में एसडीएम न्यायिक के पद पर तैनात अश्वनी कुमार को सदर तहसील में इसी पद पर स्थानांतरित किया गया है।
इस तरह जिले में पांच अधिकारियों की जिम्मेदारियों में बदलाव किया गया है। अधिकारियों के नए कार्यक्षेत्र तय होने के बाद तहसील स्तर पर प्रशासनिक और न्यायिक कामकाज की व्यवस्था में बदलाव देखने को मिलेगा।
मथुरा जिले में गोवर्धन तहसील का विशेष महत्व है। यह क्षेत्र धार्मिक और पर्यटन गतिविधियों के कारण देशभर में प्रसिद्ध है। यहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और पर्यटकों का आवागमन होता है। गोवर्धन परिक्रमा मार्ग, धार्मिक स्थलों और आसपास के गांवों से जुड़े प्रशासनिक मामलों के कारण एसडीएम की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है।
गोवर्धन में नए एसडीएम के रूप में संजय सिंह की नियुक्ति के बाद राजस्व प्रशासन, जनसुनवाई, भूमि विवाद और अन्य प्रशासनिक कार्यों की जिम्मेदारी उनके पास होगी। तहसील क्षेत्र में कानून-व्यवस्था से संबंधित मामलों में भी एसडीएम स्थानीय पुलिस और अन्य विभागों के साथ समन्वय करते हैं।
वहीं, सलोनी गौतम को गोवर्धन में एसडीएम न्यायिक की जिम्मेदारी मिलने से उनका कार्यक्षेत्र प्रशासनिक जिम्मेदारियों से न्यायिक कार्यों की ओर केंद्रित होगा। एसडीएम न्यायिक का प्रमुख कार्य संबंधित राजस्व मामलों और निर्धारित अधिकार क्षेत्र में आने वाले प्रकरणों की सुनवाई तथा उनका निस्तारण करना होता है।
मथुरा प्रशासन में यह बदलाव ऐसे समय किया गया है, जब तहसील स्तर पर आम नागरिकों से जुड़े मामलों के समयबद्ध निस्तारण पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता बनी हुई है। जमीन के स्वामित्व, राजस्व अभिलेखों, नामांतरण और अन्य विवादों के समाधान के लिए बड़ी संख्या में लोग तहसील कार्यालयों का रुख करते हैं।
छाता तहसील में भी एसडीएम का पद महत्वपूर्ण माना जाता है। यह क्षेत्र ग्रामीण आबादी, कृषि गतिविधियों और राजस्व मामलों के कारण प्रशासनिक दृष्टि से अहम है। यहां साक्षी शर्मा को एसडीएम नियुक्त किए जाने के बाद तहसील प्रशासन की जिम्मेदारी उनके पास होगी।
छाता में कार्यरत रहे अखिलेश कुमार को अब महावन में एसडीएम न्यायिक की जिम्मेदारी दी गई है। महावन क्षेत्र में राजस्व संबंधी न्यायिक मामलों की सुनवाई और लंबित प्रकरणों के निस्तारण में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण होगी।
इसी क्रम में अश्वनी कुमार को महावन से सदर तहसील भेजा गया है। वह सदर में एसडीएम न्यायिक के रूप में कार्य करेंगे। सदर तहसील में शहरी और ग्रामीण, दोनों क्षेत्रों से संबंधित राजस्व मामलों की सुनवाई होती है। ऐसे में न्यायिक पद पर तैनात अधिकारी को विभिन्न प्रकार के प्रकरणों का निस्तारण करना होता है।
जिले में प्रशासनिक और न्यायिक पदों के बीच इस तरह के बदलाव का उद्देश्य अधिकारियों की जिम्मेदारियों को नए सिरे से निर्धारित करना और कार्यालयों के कामकाज को सुचारु बनाए रखना होता है। हालांकि, प्रत्येक अधिकारी के तबादले के पीछे अलग-अलग कारणों का विवरण उपलब्ध जानकारी में नहीं दिया गया है।
तहसील प्रशासन आम नागरिकों से सीधे जुड़ा होता है। आय, जाति और निवास प्रमाणपत्रों से संबंधित प्रक्रियाओं से लेकर राजस्व विवादों और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन तक अनेक कार्य तहसील स्तर पर संपन्न होते हैं। इन कार्यालयों में अधिकारियों की उपलब्धता और कार्यों का समय पर निस्तारण होने से लोगों को राहत मिलती है।
राजस्व न्यायालयों में लंबित मामलों का समाधान भी प्रशासन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों में शामिल है। जमीन से जुड़े विवाद अक्सर लंबे समय तक चलते हैं। ऐसे मामलों में सुनवाई की नियमित व्यवस्था और निर्धारित प्रक्रिया का पालन जरूरी होता है। एसडीएम न्यायिक की तैनाती इसी व्यवस्था का हिस्सा है।
मथुरा में प्रशासनिक फेरबदल के बाद संबंधित तहसीलों में नई जिम्मेदारियों का बंटवारा स्पष्ट हो गया है। इससे नागरिकों को यह जानकारी मिल सकेगी कि किस तहसील में प्रशासनिक और न्यायिक कार्यों की जिम्मेदारी किस अधिकारी के पास है।
फिलहाल डीएम सीपी सिंह के आदेश के बाद सभी पांच अधिकारियों की नई तैनाती तत्काल प्रभाव से लागू हो गई है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस बदलाव का असर जनसुनवाई, राजस्व मामलों के निस्तारण और तहसील कार्यालयों की कार्यप्रणाली पर किस प्रकार पड़ता है।





