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प्रयागराज। उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में करीब 12 साल पुराने पॉक्सो एक्ट से जुड़े एक मामले में अदालत ने सख्त रुख अपनाया है। गवाह के रूप में बार-बार अदालत में उपस्थित नहीं होने पर विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट पंकज श्रीवास्तव ने एक इंस्पेक्टर समेत चार पुलिसकर्मियों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी करने का आदेश दिया है। इसके साथ ही अदालत ने संबंधित पुलिसकर्मियों का वेतन रोकने के भी निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई के लिए 30 सितंबर की तारीख निर्धारित की गई है।
मामला काफी पुराना होने के बावजूद गवाही की प्रक्रिया पूरी नहीं होने को अदालत ने गंभीरता से लिया है। संबंधित पुलिसकर्मियों को मामले में गवाह के तौर पर अदालत के समक्ष उपस्थित होना था, लेकिन उनके पेश नहीं होने के कारण मुकदमे की सुनवाई प्रभावित हो रही थी। इसके बाद विशेष पॉक्सो अदालत ने कार्रवाई करते हुए गिरफ्तारी वारंट जारी करने का आदेश दिया।
गवाही के लिए अदालत में नहीं हुए पेश
जानकारी के अनुसार, पॉक्सो एक्ट से जुड़े इस मामले में पुलिसकर्मियों की गवाही होनी है। मामले में उनकी भूमिका गवाह के रूप में है और अदालत में उपस्थित होकर उन्हें अपना बयान दर्ज कराना था। निर्धारित प्रक्रिया के बावजूद संबंधित पुलिसकर्मियों के अदालत में उपस्थित नहीं होने पर न्यायालय ने नाराजगी जताई।
अदालत ने एक इंस्पेक्टर समेत चार पुलिसकर्मियों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी करने के साथ उनका वेतन रोकने का निर्देश दिया है। इस आदेश के बाद संबंधित पुलिस अधिकारियों को अदालत में पेश कराने की प्रक्रिया तेज होने की संभावना है।
करीब 12 साल पुराना है मामला
यह पॉक्सो एक्ट से जुड़ा मामला करीब 12 वर्ष पुराना बताया जा रहा है। इतने लंबे समय से लंबित मामले में गवाहों की अनुपस्थिति के कारण सुनवाई पूरी होने में देरी हो रही है। विशेष अदालत ने इसे गंभीरता से लेते हुए यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया है कि जरूरी गवाह निर्धारित तारीख पर उपस्थित हों और मुकदमे की कार्रवाई आगे बढ़ सके।
पुराने मामलों में समय पर गवाही पूरी होना बेहद महत्वपूर्ण होता है। गवाहों के बार-बार अनुपस्थित रहने से न केवल सुनवाई प्रभावित होती है, बल्कि मामले के अंतिम निपटारे में भी देरी हो सकती है। इसी को देखते हुए अदालत ने सख्त कदम उठाया है।
वेतन रोकने का भी दिया निर्देश
विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट पंकज श्रीवास्तव ने गिरफ्तारी वारंट के साथ ही संबंधित पुलिसकर्मियों का वेतन रोकने का भी निर्देश दिया है। अदालत के इस आदेश को पुलिसकर्मियों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए उठाए गए कड़े कदम के रूप में देखा जा रहा है।
सरकारी कर्मचारियों और पुलिसकर्मियों के किसी आपराधिक मुकदमे में गवाह होने पर उनकी गवाही न्यायिक प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा होती है। खासकर जांच से जुड़े पुलिस अधिकारी और कर्मचारी केस से संबंधित दस्तावेजों, कार्रवाई और जांच के दौरान सामने आए तथ्यों के संबंध में अदालत के समक्ष बयान देते हैं।
गवाहों की अनुपस्थिति से प्रभावित होती है सुनवाई
किसी भी आपराधिक मुकदमे में गवाहों के बयान महत्वपूर्ण होते हैं। अदालत में अभियोजन और बचाव पक्ष के सामने गवाहों के बयान दर्ज किए जाते हैं और जरूरत पड़ने पर उनसे सवाल भी किए जाते हैं। यदि महत्वपूर्ण गवाह समय पर उपस्थित नहीं होते हैं तो सुनवाई आगे नहीं बढ़ पाती और अगली तारीख निर्धारित करनी पड़ती है।
पॉक्सो एक्ट के मामलों में सुनवाई की संवेदनशीलता और समयबद्ध निपटारे की आवश्यकता को देखते हुए गवाहों की नियमित उपस्थिति और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। ऐसे मामलों में अदालतें संबंधित पक्षों को समय पर उपस्थित होने के निर्देश देती हैं, ताकि न्यायिक प्रक्रिया अनावश्यक रूप से लंबी न हो।
पुलिसकर्मियों की पेशी पर रहेगी नजर
अदालत के ताजा आदेश के बाद अब संबंधित पुलिसकर्मियों की पेशी पर नजर रहेगी। गिरफ्तारी वारंट जारी करने के आदेश के बाद उन्हें न्यायालय के समक्ष उपस्थित कराने की जिम्मेदारी संबंधित अधिकारियों पर होगी। साथ ही वेतन रोकने के निर्देश के अनुपालन को लेकर भी कार्रवाई की जाएगी।
यह आदेश उन सरकारी गवाहों के लिए भी महत्वपूर्ण संदेश माना जा सकता है, जिनकी अनुपस्थिति के कारण पुराने मुकदमों की सुनवाई प्रभावित होती है। अदालत ने अपने आदेश के जरिए स्पष्ट किया है कि न्यायिक प्रक्रिया में गवाहों की उपस्थिति को हल्के में नहीं लिया जा सकता।
30 सितंबर को अगली सुनवाई
विशेष पॉक्सो अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 30 सितंबर की तारीख तय की है। अब अगली तारीख पर संबंधित पुलिसकर्मियों की उपस्थिति और गवाही की प्रक्रिया पर ध्यान रहेगा। यदि गवाह अदालत में उपस्थित होते हैं तो मामले की सुनवाई आगे बढ़ सकेगी।
करीब 12 साल पुराने इस पॉक्सो मामले में अदालत की सख्ती के बाद अब न्यायिक प्रक्रिया में तेजी आने की उम्मीद है। हालांकि मामले के मूल आरोपों और अन्य तथ्यों के संबंध में उपलब्ध आधिकारिक जानकारी के आधार पर ही निष्कर्ष निकाला जाना उचित होगा।





