उत्तर प्रदेश

वाराणसी के IIT BHU की बड़ी उपलब्धि 57 वैज्ञानिकों को मिली वैश्विक पहचान

Ratna Netam
14 Oct 2026 8:10 PM IST
वाराणसी के IIT BHU की बड़ी उपलब्धि 57 वैज्ञानिकों को मिली वैश्विक पहचान
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वाराणसी। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (काशी हिंदू विश्वविद्यालय), वाराणसी यानी IIT-BHU के शोधकर्ताओं ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। स्टैनफोर्ड-एल्सेवियर की वर्ष 2026 की दुनिया के शीर्ष दो प्रतिशत वैज्ञानिकों की सूची में संस्थान के कई शोधकर्ताओं को स्थान मिला है। इस सूची में IIT-BHU के 33 शोधकर्ताओं को करियर के समग्र शोध प्रभाव के आधार पर जगह मिली है, जबकि 57 शोधकर्ताओं को एक वर्ष के शोध प्रभाव के आधार पर शामिल किया गया है। इस उपलब्धि ने विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में संस्थान के शोध कार्यों को वैश्विक पहचान दिलाई है।यह सूची 7 अक्टूबर 2026 को एल्सेवियर के डेटा रिपॉजिटरी में प्रकाशित की गई थी। इसमें दुनियाभर के वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं के कार्यों का मूल्यांकन उनके शोध पत्रों को मिलने वाले उद्धरणों और अन्य वैज्ञानिक मानकों के आधार पर किया गया है।
33 शोधकर्ताओं को करियर के आधार पर मिला स्थान
स्टैनफोर्ड-एल्सेवियर की सूची दो प्रमुख श्रेणियों में तैयार की जाती है। पहली श्रेणी करियर-लॉन्ग इम्पैक्ट की है, जिसमें किसी वैज्ञानिक के लंबे शोध करियर के दौरान किए गए कार्यों और उनके प्रभाव का मूल्यांकन किया जाता है।इस श्रेणी में IIT-BHU के 33 शोधकर्ताओं को स्थान मिला है। यह सूची शोधकर्ताओं के करियर में प्रकाशित वैज्ञानिक कार्यों और उनके उद्धरण संबंधी प्रभाव को दर्शाती है।दूसरी श्रेणी सिंगल-ईयर इम्पैक्ट की है। इसमें किसी विशेष वर्ष के दौरान वैज्ञानिक शोध कार्यों को मिले उद्धरणों के प्रभाव का आकलन किया जाता है।वर्ष 2026 की इस सूची में IIT-BHU के 57 शोधकर्ताओं को सिंगल-ईयर इम्पैक्ट श्रेणी में जगह मिली है।
2025 के शोध प्रभाव को बनाया गया आधार
एल्सेवियर की आधिकारिक जानकारी के अनुसार, वर्ष 2026 की सूची स्कोपस डेटाबेस के आंकड़ों से तैयार की गई है।इसमें करियर-लॉन्ग श्रेणी के लिए वर्ष 2025 के अंत तक के उद्धरण संबंधी डेटा का उपयोग किया गया है। वहीं, सिंगल-ईयर इम्पैक्ट श्रेणी के लिए कैलेंडर वर्ष 2025 के दौरान प्राप्त उद्धरणों का मूल्यांकन किया गया है।डेटाबेस तैयार करने के लिए 1 अगस्त 2026 तक उपलब्ध स्कोपस रिकॉर्ड का उपयोग किया गया। इसमें वैज्ञानिकों के शोध कार्यों के प्रभाव का तुलनात्मक आकलन किया गया है।
कैसे तैयार होती है दुनिया के शीर्ष वैज्ञानिकों की सूची?
स्टैनफोर्ड-एल्सेवियर की इस सूची में वैज्ञानिकों का मूल्यांकन कई मानकों के आधार पर किया जाता है।इसमें शोध पत्रों को मिले उद्धरणों की संख्या, एच-इंडेक्स, सह-लेखकों की भूमिका और शोध पत्रों में लेखक की स्थिति जैसे मानक शामिल हैं।इनके अतिरिक्त सी-स्कोर नामक एक संयुक्त संकेतक का उपयोग किया जाता है, जो शोध के उद्धरण प्रभाव को मापने में सहायता करता है।सूची में विज्ञान के 20 प्रमुख क्षेत्रों और 174 उप-क्षेत्रों का वर्गीकरण किया गया है। चयन प्रक्रिया में संबंधित उप-क्षेत्र के शीर्ष दो प्रतिशत या निर्धारित सी-स्कोर सीमा तक पहुंचने वाले शोधकर्ताओं को शामिल किया जाता है।हालांकि, इस सूची में शामिल होना शोध के उद्धरण प्रभाव का संकेतक है। इसे किसी वैज्ञानिक की समग्र योग्यता का एकमात्र मापदंड नहीं माना जाना चाहिए।
IIT-BHU के निदेशक ने शोधकर्ताओं को दी बधाई
IIT-BHU के निदेशक प्रोफेसर अमित पात्रा ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त की है।उन्होंने कहा कि वैश्विक सूची में संस्थान के शोधकर्ताओं का स्थान प्राप्त करना उच्च गुणवत्ता वाले अनुसंधान और प्रभावशाली नवाचार के प्रति उनकी निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाता है।प्रोफेसर पात्रा ने सूची में शामिल सभी शोधकर्ताओं को बधाई देते हुए उनके योगदान की सराहना की।उनके अनुसार, वैज्ञानिकों की यह उपलब्धि संस्थान की अनुसंधान उत्कृष्टता और अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक प्रतिष्ठा को मजबूत करती है।
भारतीय संस्थानों के वैज्ञानिकों को भी मिली पहचान
स्टैनफोर्ड-एल्सेवियर की 2026 सूची में देश के कई प्रमुख शिक्षण और अनुसंधान संस्थानों के वैज्ञानिक शामिल हुए हैं।प्रकाशित आंकड़ों के अनुसार, सिंगल-ईयर इम्पैक्ट श्रेणी में भारतीय संस्थानों से जुड़े लगभग 6,953 शोधकर्ताओं को स्थान मिला है। वहीं, करियर-लॉन्ग इम्पैक्ट श्रेणी में भारत से जुड़े 3,898 शोधकर्ता शामिल हैं।यह आंकड़े भारतीय संस्थानों में किए जा रहे अनुसंधान के अंतरराष्ट्रीय उद्धरण प्रभाव को सामने लाते हैं
विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में बढ़ रही पहचान
IIT-BHU देश के प्रमुख तकनीकी शिक्षण संस्थानों में शामिल है। यहां इंजीनियरिंग, विज्ञान, तकनीक और अन्य विषयों में अनुसंधान कार्य किए जाते हैं।संस्थान के शोधकर्ताओं का वैश्विक सूची में स्थान प्राप्त करना उनके वैज्ञानिक कार्यों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिल रहे उद्धरणों और मान्यता को दर्शाता है।इस उपलब्धि से संस्थान के विद्यार्थियों और युवा शोधकर्ताओं को भी प्रेरणा मिल सकती है। इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय अनुसंधान सहयोग और शैक्षणिक संपर्क बढ़ाने के अवसरों को प्रोत्साहन मिल सकता है।वर्ष 2026 की स्टैनफोर्ड-एल्सेवियर सूची में IIT-BHU के 33 शोधकर्ताओं का करियर-लॉन्ग और 57 का सिंगल-ईयर श्रेणी में शामिल होना संस्थान के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है। दोनों श्रेणियों में कुछ शोधकर्ताओं के नाम समान भी हो सकते हैं, इसलिए इन आंकड़ों को जोड़कर 90 अलग-अलग वैज्ञानिकों की संख्या नहीं माना जाना चाहिए।
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