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ट्रेन रोकने पर महाभारत: आरपीएफ जवानों ने डीएसएम को सरेआम पीटा।

आगरा: उत्तर प्रदेश के आगरा कैंट रेलवे स्टेशन पर रविवार सुबह उस समय एक बेहद शर्मनाक और हैरान करने वाला वाकया सामने आया, जब रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) के जवानों ने अपनी दबंगई दिखाते हुए ड्यूटी पर तैनात डिप्टी स्टेशन मास्टर (डीएसएम) के साथ न केवल मारपीट की, बल्कि उन्हें सरेआम प्लेटफॉर्म पर घसीटते हुए ले गए। इस हाई-वोल्टेज ड्रामे के कारण प्लेटफॉर्म संख्या एक पर यात्रियों के बीच भारी अफ़रातफ़री और दहशत का माहौल बन गया। पूरा विवाद सुबह के समय प्लेटफॉर्म पर आकर रुकी हीराकुंड एक्सप्रेस ट्रेन को रोकने और एक यात्री की मदद करने को लेकर शुरू हुआ, जिसने देखते ही देखते दो सुरक्षा और प्रशासनिक विभागों के बीच हिंसक रूप ले लिया।
घटना के संबंध में मिली जानकारी के अनुसार, रविवार की सुबह विशाखापत्तनम से अमृतसर जाने वाली हीराकुंड एक्सप्रेस आगरा कैंट स्टेशन के प्लेटफॉर्म संख्या एक पर आकर रुकी थी। ट्रेन जब स्टेशन से रवाना होने लगी, तभी एक महिला यात्री चलती हुई ट्रेन में चढ़ने का प्रयास करने लगी। महिला को चलती गाड़ी में चढ़ते देख और किसी बड़े हादसे की आशंका को भांपते हुए ड्यूटी पर तैनात डिप्टी स्टेशन मास्टर (डीएसएम) नरेंद्र चाहर ने तुरंत तत्परता दिखाई। उन्होंने चलती ट्रेन को रुकवाने के लिए तत्काल वॉकी-टॉकी का इस्तेमाल किया और ट्रेन के गार्ड से संपर्क साधकर गाड़ी को वहीं रोकने का निर्देश दिया। डीएसएम की सूझबूझ से ट्रेन तुरंत रुक गई और महिला यात्री को सुरक्षित गाड़ी के भीतर चढ़ा दिया गया।
इसी बीच, वहाँ तैनात आरपीएफ के जवान भी मौके पर पहुँच गए। आरपीएफ जवानों का आरोप था कि ट्रेन में किसी ने अवैध रूप से अलार्म चेन पुलिंग (एसीपी) की है। इस संदेह में आरपीएफ कर्मियों ने प्लेटफॉर्म पर मौजूद एक पति-पत्नी को हिरासत में ले लिया और उनके साथ सख्ती बरतने लगे। मौके पर मौजूद डिप्टी स्टेशन मास्टर नरेंद्र चाहर ने जब इस बात का विरोध किया और आरपीएफ जवानों को पूरी सच्चाई से अवगत कराया, तो विवाद की स्थिति बन गई। डीएसएम नरेंद्र चाहर का साफ कहना था कि कोई अवैध चेन पुलिंग नहीं हुई है, बल्कि उन्होंने खुद एक महिला यात्री की जान बचाने और उसे चलती गाड़ी में सुरक्षित चढ़ाने के लिए नियमों के तहत वॉकी-टॉकी से गार्ड से बात करके आधिकारिक रूप से ट्रेन को रुकवाया है।
लेकिन, खाकी के रौब में चूर आरपीएफ जवानों ने ड्यूटी पर तैनात रेल अधिकारी की एक न सुनी। बहस इतनी बढ़ गई कि आरपीएफ के जवान आपा खो बैठे और उन्होंने सीधे डिप्टी स्टेशन मास्टर नरेंद्र चाहर पर हमला बोल दिया। जवानों ने सरेआम रेलवे अधिकारी के साथ मारपीट शुरू कर दी और उन्हें पकड़कर प्लेटफॉर्म पर बेरहमी से घसीटते हुए ले जाने लगे। एक जिम्मेदार रेल अधिकारी के साथ सुरक्षाकर्मियों द्वारा की जा रही इस बर्बरता को देखकर प्लेटफॉर्म पर मौजूद सैकड़ों रेल यात्री दंग रह गए। रेलवे स्टेशन जैसे सुरक्षित और सार्वजनिक स्थान पर हुई इस गुंडागर्दी से प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया।
इस हिंसक झड़प की सूचना मिलते ही स्टेशन के अन्य रेल कर्मचारी, स्टेशन मास्टर और वरिष्ठ अधिकारी तुरंत मौके पर पहुँचे और किसी तरह स्थिति को संभाला। आरपीएफ की इस शर्मनाक हरकत से रेलवे कर्मचारियों में भारी आक्रोश व्याप्त हो गया है और उन्होंने सुरक्षाकर्मियों के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग की है। ड्यूटी पर तैनात अधिकारी के साथ इस तरह की मारपीट ने रेलवे स्टेशनों पर आरपीएफ की कार्यशैली और उनके रवैये पर एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा कर दिया है। वरिष्ठ रेलवे अधिकारियों ने इस पूरे मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं और प्लेटफॉर्म पर लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाले जा रहे हैं ताकि दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी और विभागीय कार्रवाई की जा सके।





