उत्तर प्रदेश

लखनऊ के मशहूर कॉफी हाउस पर फिर लटका ताला

Kavita2
30 Aug 2026 4:00 PM IST
लखनऊ के मशहूर कॉफी हाउस पर फिर लटका ताला
x

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के हजरतगंज की पहचान माने जाने वाले प्रसिद्ध इंडियन कॉफी हाउस में इन दिनों सन्नाटा पसरा हुआ है। कभी साहित्यकारों, कलाकारों, बुद्धिजीवियों और आम लोगों की चहल-पहल से गुलजार रहने वाली यह जगह पिछले करीब तीन महीने से बंद पड़ी है।

कॉफी और चाय की चुस्कियों के साथ घंटों बातचीत करने वाले लोग अब यहां पहुंचकर निराश होकर लौट रहे हैं। कॉफी हाउस के मुख्य दरवाजे पर लगा ताला इसकी बदली हुई तस्वीर बयां कर रहा है।

कभी हजरतगंज की पहचान था कॉफी हाउस

हजरतगंज स्थित इंडियन कॉफी हाउस लंबे समय से शहर की सांस्कृतिक गतिविधियों का केंद्र रहा है।

यहां नेताओं, लेखकों, पत्रकारों, कलाकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की बैठकें हुआ करती थीं। कई पीढ़ियों के लोगों की यादें इस जगह से जुड़ी हुई हैं।

एक समय ऐसा था जब कॉफी हाउस में बैठना लखनऊ की तहजीब और सामाजिक मेलजोल का हिस्सा माना जाता था।

संचालन को लेकर हुआ था विवाद

इंडियन कॉफी हाउस के संचालन को लेकर कुछ समय पहले विवाद सामने आया था।

संचालन व्यवस्था में बदलाव के बाद अरुणा सिंह नाम की महिला ने कॉफी हाउस की जिम्मेदारी संभाली थी।

उन्होंने बंद पड़े कॉफी हाउस का ताला खुलवाकर इसकी पुरानी विरासत को फिर से जीवंत करने का प्रयास किया।

उनका उद्देश्य था कि इस ऐतिहासिक स्थान को दोबारा उसी पहचान के साथ खड़ा किया जाए, जिसके लिए यह वर्षों से जाना जाता रहा है।

दोबारा शुरू करने की हुई कोशिश

अरुणा सिंह ने कॉफी हाउस के संचालन को संभालने के बाद इसे फिर से सक्रिय करने का प्रयास किया।

उन्होंने यहां की व्यवस्था सुधारने और लोगों को दोबारा जोड़ने की कोशिश की।

लेकिन धीरे-धीरे ग्राहकों की संख्या कम होती गई और पहले जैसी रौनक वापस नहीं आ सकी।

लगातार घटती भीड़ के कारण यहां फिर से सन्नाटा बढ़ने लगा।

तीन महीने से बंद पड़ा है कॉफी हाउस

बताया जा रहा है कि करीब तीन महीने पहले कॉफी हाउस पर फिर से ताला लगा दिया गया था।

तब से यह बंद पड़ा है और अब तक इसका संचालन दोबारा शुरू नहीं हो पाया है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि हजरतगंज जैसी प्रमुख जगह पर स्थित इस ऐतिहासिक कॉफी हाउस का बंद होना शहर की पुरानी संस्कृति के लिए चिंता का विषय है।

पुराने ग्राहकों को सता रही यादें

कॉफी हाउस से जुड़े पुराने ग्राहक आज भी इसकी पुरानी रौनक को याद करते हैं।

लोग बताते हैं कि यहां सिर्फ कॉफी पीने नहीं, बल्कि विचारों के आदान-प्रदान और मुलाकातों के लिए भी आया जाता था।

कई लोगों के लिए यह जगह केवल एक दुकान नहीं बल्कि लखनऊ की सामाजिक और सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा रही है।

बदलते समय का असर

जानकारों का कहना है कि बदलते समय, नए कैफे कल्चर और लोगों की बदलती पसंद का असर पुराने कॉफी हाउसों पर पड़ा है।

आज युवा वर्ग आधुनिक कैफे और नई सुविधाओं वाली जगहों की ओर ज्यादा आकर्षित हो रहा है।

इसके अलावा संचालन संबंधी विवादों ने भी इस ऐतिहासिक स्थल की मुश्किलें बढ़ाई हैं।

विरासत बचाने की जरूरत

शहर के लोगों का मानना है कि हजरतगंज के इस ऐतिहासिक कॉफी हाउस को बचाने के लिए विशेष प्रयास किए जाने चाहिए।

उनका कहना है कि ऐसी जगहें केवल व्यापारिक प्रतिष्ठान नहीं होतीं, बल्कि शहर की पहचान और इतिहास से जुड़ी होती हैं।

लोग चाहते हैं कि कॉफी हाउस को फिर से शुरू किया जाए और इसकी पुरानी प्रतिष्ठा वापस लाई जाए।

प्रशासन और संचालकों से उम्मीद

अब नजर इस बात पर है कि कॉफी हाउस के संचालन को लेकर आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।

यदि सही योजना और बेहतर प्रबंधन के साथ इसे दोबारा शुरू किया जाता है तो संभव है कि यहां फिर से पुरानी रौनक लौट आए।

फिलहाल हजरतगंज का यह ऐतिहासिक ठिकाना बंद दरवाजों के पीछे अपनी पुरानी यादों को समेटे हुए है। तीन महीने से लगा ताला लखनऊ की बदलती तस्वीर और विरासत को बचाने की चुनौती दोनों को दिखा रहा है।

Next Story