उत्तर प्रदेश

Lucknow: युवा दलित नेता को मिल सकता है भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बनने का मौका

Admindelhi1
24 May 2025 4:30 PM IST
Lucknow: युवा दलित नेता को मिल सकता है भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बनने का मौका
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"जल्द घोषणा संभव"

लखनऊ: राजनीतिक लिहाज से बेहद अहम उत्तर प्रदेश में जल्द ही भाजपा अपना नया अध्यक्ष घोषित करने वाली है। इसका एलान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दिल्ली दौरे से लौटने के बाद कभी भी हो सकता है। योगी की चली तो सपा-बसपा और कांग्रेस का जवाब देने के लिए संगठन की कमान उर्जावान और सबसे अधिक पढ़े-लिखे दलित नेता को मिल सकती है। पहलगाम आतंकी हमला और उसके जवाब में ऑपरेशन सिंदूर के कारण संगठन चुनाव भी स्थगित कर दिया गया था।

प्रदेश में फरवरी, 2027 में विधानसभा के चुनाव होने हैं। भाजपा इसे ध्यान में रखकर ही प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी तय करने में जुटी है। भाजपा यहां 98 जिला और शहरों के अध्यक्षों में से 70 की नियुक्ति कर चुकी है। पार्टी के संविधान के मुताबिक अब वह प्रदेश अध्यक्ष का चयन कर सकती है।

भाजपा और संघ दोनों में दलित अध्यक्ष पर में चल रही चर्चा के बीच कहा जा रहा था कि कोई बड़ा चेहरा नहीं है, ऐसे में ओबीसी वर्ग से आने वाले किसी नेता को ही अध्यक्ष बनाना ठीक रहेगा। हांलाकि भाजपा को पिछड़े वर्ग की राजनीति करने वाले अपना दल (सोनेलाल), सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा), निषाद पार्टी और राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) का साथ है। रालोद के पास जाट, अपना दल (एस) के पास कुर्मी, सुभासपा के पास राजभर, मौर्य और कुशवाहा और निषाद पार्टी के पास निषाद समुदाय के मतदाताओं का समर्थन माना जाता है।

ऐसे में दलित अध्यक्ष के लिए एक नया नाम समाज कल्याण मंत्री असीम अरूण का लखनऊ और दिल्ली के शीर्ष नेतृत्व के बीच चर्चा में है। असीम आईपीएस अफसर रहे हैं, वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पसंद बने और वे ही उन्हें राजनीति में लाए। योगी के भी चहेते हैं। उनकी दलित वर्ग के युवाओं के बीच खासी लोकप्रियता है। हाल में सपा प्रमुख अखिलेश के खिलाफ उनके तेवरों से वे जहां दलितों के चहेते बने, वहीं सपा-बसपा के लिए किरकिरी बन गए।

वैसे दावेदारों में स्वतंत्र देव सिंह, यूपी के मंत्री धर्मपाल सिंह, केंद्रीय राज्य मंत्री बीएल वर्मा, राज्यसभा सांसद बाबूराम निषाद के नाम चर्चा में हैं। इसके अलावा पार्टी कुछ दलित चेहरों में पूर्व सांसद रामशंकर कठेरिया, विनोद सोनकर, नीलम सोनकर और पूर्व एमएलसी विद्यासागर सोनकर के नाम पर भी विचार चल रहा है। ब्राह्मण जाति से राज्यसभा सांसद दिनेश शर्मा और पूर्व सांसद हरीश द्विवेदी के नाम भी चर्चा में हैं।

अहिल्याबाई के जन्मशती अभियान से वोट साधने की कोशिश: वर्ष 2027 में होने वाले यूपी विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा सांस्कृतिक, राष्ट्रवाद और अध्यात्म से हिंदुत्व के एजेंडे को धार देने के साथ अहिल्याबाई के जन्मशती अभियान से वोट साधने की तैयारी है। यूपी के 8135 न्याय पंचायतों में 2 लाख 70 हजार कार्यकर्ताओं की बहुत बड़ी टीम लगाई जा रही है। इस टीम में सरकार के साथ-साथ संगठन के नेता भी शामिल हैं। इस एजेंडे से जातीय समीकरण साधने में भी मदद मिलेगी। यूपी में पाल और धनगर समाज के बड़े वोट बैंक को साधने के लिए ये खास प्लान तैयार हुआ है, जिससे अखिलेश के पीडीए फॉर्मूले को भी बड़ा झटका लग सकता है।

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