उत्तर प्रदेश

Lucknow: मिशन शक्ति केंद्रों से महिलाओं को मिलेगी त्वरित मदद

Admindelhi1
16 Jan 2026 6:03 PM IST
Lucknow: मिशन शक्ति केंद्रों से महिलाओं को मिलेगी त्वरित मदद
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लखनऊ: मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश योगी आदित्यनाथ के निर्देशन में प्रदेशभर में संचालित मिशन शक्ति अभियान फेज-5 के अंतर्गत महिला सुरक्षा, सम्मान एवं स्वावलंबन को और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की गई। इसी क्रम में पुलिस महानिदेशक उत्तर प्रदेश राजीव कृष्ण के मार्गदर्शन में 16 जनवरी को बरेली परिक्षेत्र के सभी जनपदों—बरेली, बदायूँ, पीलीभीत एवं शाहजहाँपुर—में स्थापित मिशन शक्ति केंद्रों के प्रभावी संचालन हेतु जीआईसी ऑडिटोरियम, बरेली में मिशन शक्ति कौशल कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का शुभारम्भ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से किया गया।

इस कार्यशाला में पुलिस एवं प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ-साथ चिकित्सकों, मनोवैज्ञानिकों, काउंसलरों, विधिक विशेषज्ञों तथा परिवार परामर्श केंद्रों के प्रभारियों ने सहभागिता की। कार्यशाला का उद्देश्य मिशन शक्ति केंद्रों को एक मानकीकृत, संवेदनशील एवं भरोसेमंद मंच के रूप में विकसित करना रहा।कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पुलिस महानिदेशक उत्तर प्रदेश ने कहा कि आगामी समय में प्रत्येक मिशन शक्ति केंद्र के लिए Minimum Service Standards निर्धारित किए जाएंगे, जिससे प्रदेश के किसी भी थाने में महिलाओं को समान गुणवत्ता की सेवाएं प्राप्त हो सकें। उन्होंने स्पष्ट किया कि मिशन शक्ति केंद्रों को एक भरोसेमंद “ब्रांड” के रूप में स्थापित किया जाएगा, जिसके लिए प्रशिक्षण, मानक संचालन प्रक्रियाओं (SOP) के सरलीकरण और संसाधनों की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी।

पुलिस महानिदेशक ने कहा कि मिशन शक्ति केंद्रों की सफलता का मूल आधार संवेदनशीलता, धैर्य और सुनने की क्षमता है। पीड़िता से संवाद के प्रारंभिक 10 मिनट अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं। बिना किसी पूर्वाग्रह के पीड़िता की बात सुनना, सम्मानजनक व्यवहार और सहानुभूति कई मामलों में समाधान का सबसे प्रभावी माध्यम बनता है।उन्होंने बताया कि जागरूकता, संवाद और प्री-एफआईआर काउंसलिंग के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। इसके चलते इलोपमेंट और अन्य सामाजिक अपराधों में उल्लेखनीय कमी आई है, बलात्कार के मामलों में लगभग 33 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है तथा दहेज हत्या जैसे गंभीर सामाजिक अपराधों में करीब 13 प्रतिशत की कमी देखी गई है। यह दर्शाता है कि संवाद, संवेदनशीलता और कम्युनिटी आउटरीच पुलिस के अत्यंत प्रभावी उपकरण हैं।

पुलिस महानिदेशक ने कहा कि अपराधियों के प्रति कठोर दृष्टिकोण आवश्यक है, लेकिन पीड़ितों और आम नागरिकों के प्रति पुलिस का मानवीय, सहयोगात्मक और भरोसेमंद व्यवहार अनिवार्य है। मिशन शक्ति केंद्र आज केवल शिकायत दर्ज करने का स्थान नहीं, बल्कि संवाद, परामर्श और समन्वित समाधान का एक सशक्त मंच बन चुके हैं।उन्होंने बताया कि वर्ष 2020 में प्रारंभ किया गया मिशन शक्ति अभियान Whole of Government Approach के तहत संचालित हो रहा है, जिसका उद्देश्य विभिन्न विभागों की योजनाओं और सेवाओं को एकीकृत रूप से नागरिकों तक पहुंचाना है। मिशन शक्ति फेज-5 के अंतर्गत प्रत्येक थाने पर मिशन शक्ति केंद्र स्थापित किए गए हैं, जिससे महिला संबंधी समस्याओं का समाधान एफआईआर तक सीमित न रहकर प्री-एफआईआर काउंसलिंग, जागरूकता, कानूनी सहायता, मेडिकल रेफरल और पोस्ट-ट्रॉमा केयर तक विस्तारित हो सका है।

मिशन शक्ति केंद्रों के माध्यम से डिस्ट्रिक्ट लीगल सर्विस अथॉरिटी (DLSA) के सहयोग से निःशुल्क विधिक सहायता तथा सरकारी और निजी अस्पतालों के साथ समन्वय कर आवश्यक चिकित्सीय सहायता सुनिश्चित की जा रही है। कई गंभीर मामलों में इससे पीड़िताओं को नया और सुरक्षित जीवन मिला है। इसके अतिरिक्त मिशन शक्ति केंद्रों की फील्ड गतिविधियों को मजबूत करने के लिए प्रत्येक थाने पर चार-चार स्कूटी उपलब्ध कराने की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है।

कार्यशाला में बरेली जोन के अपर पुलिस महानिदेशक रमित शर्मा एवं मंडलायुक्त बरेली भूपेन्द्र एस. चौधरी ने मार्गदर्शन प्रदान किया। पुलिस उपमहानिरीक्षक बरेली परिक्षेत्र अजय कुमार साहनी ने मिशन शक्ति से संबंधित महत्वपूर्ण केस स्टडीज प्रस्तुत कीं। महिला एवं बाल सुरक्षा संगठन की अपर पुलिस महानिदेशक पद्मजा चौहान ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सहभागिता करते हुए अपने विचार साझा किए।

जिलाधिकारी बरेली अविनाश सिंह ने भी कार्यशाला को संबोधित किया। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक बरेली अनुराग आर्या ने कार्यशाला में प्रतिभाग करने वाले सभी अधिकारियों, कर्मचारियों एवं वक्ताओं का आभार व्यक्त करते हुए उत्कृष्ट कार्य करने वाली मिशन शक्ति केंद्र टीम, आंवला परिवार परामर्श केंद्र के परामर्शदाताओं तथा अतिथि वक्ताओं को सम्मानित किया।मुख्य विकास अधिकारी देवयानी ने महिला सशक्तिकरण से जुड़ी शासन की विभिन्न योजनाओं पर प्रस्तुतिकरण दिया। आंवला परिवार परामर्श केंद्र के जय गोविंद सिंह ने लगभग 100 टूटते परिवारों को सफल मध्यस्थता के माध्यम से जोड़ने के अनुभव साझा किए, जिन्हें संवाद और समझदारी का प्रतीक बताया गया।

एसआरएमएस के चिकित्सकों ने डॉ. जसविंदर के नेतृत्व में मेडिकल जूरिसप्रुडेंस और साइकोलॉजी पर जानकारी दी। क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट डॉ. मनाली ने यौन हिंसा पीड़िताओं से संवाद में पुलिस की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि संवेदनशील व्यवहार और समय पर मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं के लिए रेफरल पीड़िता के जीवन को नई दिशा दे सकता है। वरिष्ठ अधिवक्ता सर्वोच्च न्यायालय डॉ. शांतनु ने महिला अपराधों की विवेचना से संबंधित मानक संचालन प्रक्रिया पर व्याख्यान दिया।

कार्यशाला में परिक्षेत्र के सभी जनपदों के मिशन शक्ति केंद्रों के नोडल अधिकारी, केंद्र प्रभारी एवं महिला बीट आरक्षियों ने फील्ड में किए जा रहे कार्यों के अनुभव और सुझाव साझा किए। अंत में यह निष्कर्ष निकला कि संवाद, संवेदनशीलता और समन्वय के माध्यम से मिशन शक्ति केंद्र प्रदेश में महिला सुरक्षा और सामाजिक विश्वास का एक मजबूत स्तंभ बनकर उभर रहे हैं।

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