उत्तर प्रदेश

स्वच्छ हवा की रेस में लखनऊ अव्वल देशभर में हासिल किया पहला पायदान

Ratna Netam
7 Sept 2026 4:42 PM IST
स्वच्छ हवा की रेस में लखनऊ अव्वल देशभर में हासिल किया पहला पायदान
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लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ ने स्वच्छ हवा के मामले में राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी उपलब्धि हासिल की है। **स्वच्छ वायु सर्वेक्षण-2026** में लखनऊ को 10 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों की श्रेणी में देश का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाला शहर चुना गया है। राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP) के तहत लखनऊ ने पहला स्थान हासिल किया। सोमवार, 7 सितंबर को नई दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में शहर को इस उपलब्धि के लिए सम्मानित किया गया।
लखनऊ ने सर्वेक्षण में 198 अंक हासिल किए। इस श्रेणी में इंदौर 197 अंकों के साथ दूसरे और जबलपुर 195 अंकों के साथ तीसरे स्थान पर रहा। लखनऊ को पहले स्थान के लिए 1.50 करोड़ रुपये की पुरस्कार राशि भी दी गई।
महापौर ने ग्रहण किया पुरस्कार
नई दिल्ली में पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की ओर से आयोजित कार्यक्रम में लखनऊ की महापौर सुषमा खर्कवाल, नगर आयुक्त गौरव कुमार समेत नगर निगम के अधिकारियों ने पुरस्कार ग्रहण किया। कार्यक्रम में राष्ट्रीय हरित अधिकरण के अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव, वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग के अध्यक्ष राजेश वर्मा और पर्यावरण मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
यह उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पिछले स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में लखनऊ 15वें स्थान पर था। इस बार शहर ने बड़ी छलांग लगाते हुए सीधे पहला स्थान हासिल किया है।
पेपर मिल कॉलोनी वार्ड भी देश में नंबर-1
लखनऊ को दोहरी सफलता मिली है। नगर निगम के जोन-4 स्थित **वार्ड नंबर-70 पेपर मिल कॉलोनी** को 30 हजार से अधिक आबादी वाले वार्डों की श्रेणी में देश का सर्वश्रेष्ठ वार्ड चुना गया है। वार्ड को इस उपलब्धि के लिए 50 लाख रुपये की पुरस्कार राशि दी गई।
राष्ट्रीय स्तर पर शहर और उसके एक वार्ड दोनों को पहला स्थान मिलने से नगर निगम के प्रदूषण नियंत्रण और पर्यावरण सुधार से जुड़े प्रयासों को बड़ी पहचान मिली है।
1100 इलेक्ट्रिक वाहनों से कचरा कलेक्शन
लखनऊ में वायु प्रदूषण कम करने के लिए नगर निगम की ओर से कई स्तर पर काम किया गया। डोर-टू-डोर कचरा संग्रह के लिए करीब 1100 इलेक्ट्रिक वाहनों का इस्तेमाल किया जा रहा है। इन वाहनों की निगरानी जीपीएस आधारित कंट्रोल कमांड सेंटर के जरिए की जाती है।
इलेक्ट्रिक वाहनों के इस्तेमाल का उद्देश्य कचरा संग्रह व्यवस्था को बेहतर करने के साथ पारंपरिक ईंधन से चलने वाले वाहनों से होने वाले उत्सर्जन को कम करना भी है। शहर में इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए चार्जिंग सुविधाओं का भी विस्तार किया गया है।
सड़क की धूल रोकने पर खास फोकस
बड़े शहरों में वायु प्रदूषण की प्रमुख वजहों में सड़क से उड़ने वाली धूल भी शामिल होती है। लखनऊ में इसे नियंत्रित करने के लिए मैकेनाइज्ड सफाई पर जोर दिया गया। शहर में 97 इलेक्ट्रिक मैकेनाइज्ड स्वीपिंग मशीनों का इस्तेमाल किया गया है।
इसके साथ ही प्रमुख सड़कों की नियमित सफाई और जरूरत के मुताबिक पानी के छिड़काव जैसे उपाय किए गए। रिपोर्ट के मुताबिक करीब 559.85 किलोमीटर सड़कों को पक्का करने का काम भी किया गया, जिससे सड़क की धूल को नियंत्रित करने में मदद मिली।
कचरा प्रबंधन में भी सुधार
स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में सिर्फ हवा की तत्काल गुणवत्ता नहीं, बल्कि प्रदूषण कम करने के लिए शहरों द्वारा किए गए विभिन्न प्रयासों का भी मूल्यांकन किया जाता है। लखनऊ में ठोस कचरा प्रबंधन, सड़क की धूल पर नियंत्रण, इलेक्ट्रिक वाहनों के इस्तेमाल और मैकेनाइज्ड सफाई जैसे उपायों ने शहर के प्रदर्शन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
राष्ट्रीय स्तर पर नंबर-1 रैंक हासिल करना लखनऊ के लिए बड़ी उपलब्धि जरूर है, लेकिन शहर के सामने चुनौतियां भी बनी हुई हैं। बढ़ती आबादी, वाहनों की संख्या, निर्माण गतिविधियां, ट्रैफिक जाम और सड़क की धूल जैसे कारकों पर लगातार नियंत्रण जरूरी होगा।
पिछले सर्वेक्षण में 15वें स्थान से इस बार पहले स्थान तक पहुंचना शहर के लिए बड़ी छलांग है। अब चुनौती इस रैंकिंग को बनाए रखने और प्रदूषण नियंत्रण के उपायों को आगे और प्रभावी बनाने की होगी।
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