उत्तर प्रदेश

Lucknow: चोरों ने IPS अधिकारी के घर की सुरक्षा तोड़ी

Admindelhi1
26 Sept 2025 11:55 AM IST
Lucknow: चोरों ने IPS अधिकारी के घर की सुरक्षा तोड़ी
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लखनऊ: विकास नगर इलाके में आईपीएस अधिकारी यमुना प्रसाद के घर चोरी हो गई है। चोरों ने कैश, घड़ी के साथ टोटियां तक चोरी कर ली हैं। यमुना प्रसाद वही पुलिस अधिकारी हैं जिन्होंने माफिया मुख्तार अंसारी पर शिकंजा कसा था। उसे पंजाब में लग्जरी एम्बुलेंस में पकड़ा था। उस एम्बुलेंस का रजिस्ट्रेशन फर्जी डॉक्यूमेंट पर बना था। इसमें यमुना प्रसाद ने मुकदमा दर्ज किया जो मुख्तार अंसारी को यूपी लाने का सबसे बड़ी वजह बना था।

आईपीएस यमुना प्रसाद का विकासनगर में घर है। इस घर में वह काफी समय से रहते नहीं हैं। चूंकि उनकी तैनाती नोएडा में डीएसपी पद पर है इसलिए वह परिवार के साथ नोएडा में ही हैं। उनके लखनऊ वाले घर पर उनके रिश्तेदार असित सिद्धार्थ कर रहे हैं। चोरी होने के बाद असित ने ही पुलिस को इसकी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि खिड़की की ग्रिल काट दी गई है। नकदी सहित कई सामान चोरी हो गए। असित सिद्धार्थ के मुताबिक, 22 सितंबर की शाम वह जब घर पहुंचे तो बिजली नहीं थी। अगले दिन 23 सितंबर को बिजली विभाग के कर्मचारियों के आने के बाद घर खोला गया, तो भीतर सबकुछ अस्त-व्यस्त था। घर की खिड़की की ग्रिल कटी हुई थी और कमरे में सामान इधर-उधर फेंके गए थे। अलमारियां पूरी तरह से बिखरी हुई थीं।

घटना की सूचना विकासनगर थाना को दे दी गई। पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी। कई सीसीटीवी फुटेज देखी जा रही हैं। कुल ₹50 हजार नकद, चांदी के 10 सिक्के, 3 कलाई घड़ी, 2 दीवार घड़ी, गिफ्ट आइटम, चांदी के 2 गिलास, 2 कटोरी, करीब 20 टोटियां चोरी होने की रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। उत्तर प्रदेश के छोटे से जिले सिद्धार्थनगर में यमुना प्रसाद का जन्म 1977 में हुआ। पिता घनश्याम प्रसाद जिले में ही ठेकेदारी करते थे। बढ़नी कस्बे में स्कूलिंग की। 2001 में स्टेट पीसीएस में चयन हो गया। 2004 में कोऑपरेटिव एंड पंचायत डिपार्टमेंट में नौकरी जॉइन की। 2009 के सिविल सर्विस में पेपर देने के लिए फिर अप्लाई कर दिया। पहली बार सफलता नहीं मिली। 2010 में फिर फॉर्म भरा। इसमें भी सफलता नहीं मिली। तीसरे अटेंप्ट में सिविल सर्विस क्रेक कर दिया। 2012 में उत्तर प्रदेश कैडर में तैनाती मिली। पहली बार वाराणसी में इंडिपेंडेंट एएसपी बने। तब तक लोकसभा चुनाव की घोषणा हो चुकी थी। वाराणसी से नरेंद्र मोदी चुनाव लड़ने आ रहे थे। महकमे की ओर से वाराणसी का चुनावी प्रबंधन संभालने की जिम्मेदारी प्रसाद को ही दी गई।

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