उत्तर प्रदेश

Lucknow: सदन संचालन के 90 दिन नियम का कोई पालन नहीं

Admindelhi1
22 Jan 2026 4:43 PM IST
Lucknow: सदन संचालन के 90 दिन नियम का कोई पालन नहीं
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लखनऊ: उत्तर प्रदेश में विधानसभा सत्र साल में 90 दिन चलाने का स्पष्ट नियम होने के बावजूद अब तक किसी भी सरकार ने इसका पालन नहीं किया है। सरकार चाहे किसी भी राजनीतिक दल की रही हो, यह नियम हर बार नजरअंदाज किया गया। मौजूदा 18वीं विधानसभा में भी यही स्थिति देखने को मिली, जहां एक साल में विधानसभा की कार्यवाही अधिकतम 20 दिन ही चल सकी।

पीठासीन अधिकारियों के हालिया सम्मेलन में भले ही साल में न्यूनतम 30 बैठकें आयोजित करने का संकल्प लिया गया हो, लेकिन प्रदेश में पहले से लागू 90 दिन सदन चलाने के नियम पर अमल नहीं हो पा रहा है। विधानसभा की प्रक्रिया एवं कार्य-संचालन नियमावली 2023 के तहत हर वर्ष तीन अधिवेशन और कुल 90 कार्य दिवस सदन चलाने का प्रावधान है, जिसे योगी सरकार ने ही संशोधित कर लागू कराया था, फिर भी इसका पालन नहीं हो सका।

आंकड़ों पर नजर डालें तो वर्ष 2022 में प्रस्तावित 16 दिनों के मुकाबले सदन केवल 15 दिन चला। वर्ष 2023 में 23 दिन की योजना के बावजूद कार्यवाही 20 दिन ही हो सकी। वर्ष 2024 में 19 दिन प्रस्तावित थे, लेकिन 17 दिन ही सदन चला, जबकि वर्ष 2025 में 18 दिन तय होने के बाद भी केवल 17 दिन ही कार्यवाही हो पाई। इससे पहले सपा और बसपा सरकारों के कार्यकाल में भी 90 दिन सदन चलाने के नियम का पालन नहीं हो सका।

विशेषज्ञों के अनुसार सरकारें लंबे सत्र से इसलिए बचती हैं क्योंकि इससे असहज सवालों और जवाबदेही का सामना करना पड़ता है। अधिक सत्र चलने पर कानून बनाने की प्रक्रिया में बहस बढ़ती है, विधेयकों को प्रवर समितियों में भेजने का दबाव बनता है और अध्यादेश के जरिए कानून बनाने की सुविधा सीमित हो जाती है। इसके अलावा विपक्ष के शोरगुल, कार्यवाही में व्यवधान और बढ़ती मीडिया कवरेज से सरकारें असहज महसूस करती हैं, जिससे कम सत्र चलाने की प्रवृत्ति लगातार बनी हुई है।

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