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लखनऊ। देश में स्वच्छ हवा के मामले में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ ने बड़ी उपलब्धि हासिल की है। केंद्र सरकार के स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में लखनऊ को देश का सबसे साफ हवा वाला शहर घोषित किया गया है। लखनऊ ने 200 में से 198 अंक हासिल कर पहला स्थान प्राप्त किया है।
वहीं, पिछले आठ वर्षों से लगातार बेहतर प्रदर्शन करने वाला मध्य प्रदेश का इंदौर इस बार दूसरे स्थान पर रहा। इंदौर को 197 अंक मिले हैं। स्वच्छता के क्षेत्र में अपनी पहचान बना चुके इंदौर ने वायु गुणवत्ता सुधार के मामले में भी मजबूत प्रदर्शन किया है।
सर्वेक्षण में देश की राजधानी दिल्ली 21वें स्थान पर रही, जबकि आर्थिक राजधानी मुंबई को 28वां स्थान मिला है। बड़े महानगरों की तुलना में लखनऊ और इंदौर का बेहतर प्रदर्शन चर्चा का विषय बना हुआ है।
लखनऊ की हवा ने मारी बाजी
स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में शहरों की रैंकिंग कई मानकों के आधार पर तय की जाती है। इसमें वायु गुणवत्ता सुधार के प्रयास, प्रदूषण नियंत्रण योजनाएं, धूल नियंत्रण, कचरा प्रबंधन, हरित क्षेत्र बढ़ाने और जनभागीदारी जैसे पहलुओं को शामिल किया जाता है।
लखनऊ ने इन सभी क्षेत्रों में बेहतर प्रदर्शन करते हुए सबसे अधिक अंक हासिल किए। 200 में से 198 अंक प्राप्त करना शहर की वायु गुणवत्ता सुधार दिशा में किए गए प्रयासों को दर्शाता है।
राजधानी लखनऊ में पिछले कुछ वर्षों में प्रदूषण नियंत्रण के लिए कई कदम उठाए गए हैं। सड़क सफाई व्यवस्था में सुधार, धूल नियंत्रण, हरित क्षेत्र बढ़ाने और यातायात प्रबंधन जैसे उपायों का असर अब रैंकिंग में दिखाई दे रहा है।
इंदौर का शानदार प्रदर्शन जारी
मध्य प्रदेश का इंदौर लंबे समय से स्वच्छता के मामले में देशभर में अपनी पहचान बनाए हुए है। पिछले आठ वर्षों से इंदौर स्वच्छता सर्वेक्षण में शीर्ष स्थान पर रहा है।
इस बार स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में भी इंदौर ने शानदार प्रदर्शन किया और 197 अंकों के साथ दूसरे स्थान पर रहा। शहर में प्रदूषण नियंत्रण के लिए किए गए प्रयासों और पर्यावरण संरक्षण की योजनाओं को इसका कारण माना जा रहा है।
इंदौर ने सार्वजनिक परिवहन, कचरा प्रबंधन, हरित क्षेत्र विकास और स्वच्छता अभियान के जरिए अपनी अलग पहचान बनाई है।
दिल्ली और मुंबई की रैंकिंग पर सवाल
देश के दो बड़े महानगर दिल्ली और मुंबई इस बार स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में पीछे रहे हैं। दिल्ली को 21वां स्थान मिला है, जबकि मुंबई 28वें स्थान पर रही।
दिल्ली लंबे समय से वायु प्रदूषण की समस्या से जूझती रही है। खासतौर पर सर्दियों के दौरान राजधानी में प्रदूषण का स्तर काफी बढ़ जाता है। वाहनों का धुआं, निर्माण कार्यों से निकलने वाली धूल और आसपास के क्षेत्रों से आने वाला प्रदूषण दिल्ली की हवा को प्रभावित करता है।
वहीं, मुंबई में बढ़ता शहरीकरण, ट्रैफिक और निर्माण गतिविधियां वायु गुणवत्ता के लिए चुनौती बनी हुई हैं।
प्रदूषण नियंत्रण के प्रयासों पर मिला जोर
स्वच्छ वायु सर्वेक्षण का उद्देश्य केवल शहरों की रैंकिंग तय करना नहीं, बल्कि उन्हें प्रदूषण कम करने के लिए प्रेरित करना भी है।
इसमें शहरों द्वारा अपनाई गई रणनीतियों और जमीनी स्तर पर किए गए कार्यों का मूल्यांकन किया जाता है। धूल नियंत्रण, प्रदूषण फैलाने वाले स्रोतों की निगरानी और पर्यावरण अनुकूल योजनाओं को विशेष महत्व दिया जाता है।
लखनऊ और इंदौर का प्रदर्शन इस बात का संकेत है कि योजनाबद्ध तरीके से काम करने पर बड़े शहरों में भी वायु गुणवत्ता को बेहतर बनाया जा सकता है।
लखनऊ के लिए बड़ी उपलब्धि
लखनऊ का पहले स्थान पर आना उत्तर प्रदेश के लिए भी बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। राजधानी में पिछले कुछ समय से पर्यावरण संरक्षण और प्रदूषण नियंत्रण को लेकर कई योजनाओं पर काम किया जा रहा है।
शहर में सड़कों की सफाई, खुले में धूल रोकने के उपाय और हरियाली बढ़ाने जैसे कदम उठाए गए हैं। इसके अलावा प्रशासन की ओर से प्रदूषण फैलाने वाले स्रोतों पर निगरानी भी बढ़ाई गई है।
आगे भी चुनौतियां बरकरार
हालांकि स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में बेहतर रैंकिंग हासिल करना बड़ी उपलब्धि है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि वायु गुणवत्ता सुधार एक लगातार चलने वाली प्रक्रिया है।
बढ़ती आबादी, वाहनों की संख्या और तेजी से हो रहे निर्माण कार्यों के कारण शहरों पर दबाव लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में प्रदूषण नियंत्रण के प्रयासों को आगे भी जारी रखना होगा।





