उत्तर प्रदेश

Lucknow: NEP के तहत स्कूलों की गुणवत्ता मापी जाएगी

Admindelhi1
1 Jan 2026 3:16 PM IST
Lucknow: NEP के तहत स्कूलों की गुणवत्ता मापी जाएगी
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लखनऊ: राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के तहत परिषदीय विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए उत्तर प्रदेश में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। स्कूलों के पठन-पाठन, संसाधनों और कार्यप्रणाली के आधार पर एक्रीडिटेशन यानी ग्रेडिंग की तैयारी शुरू कर दी गई है। इसके लिए राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) स्कूल क्वालिटी एसेसमेंट एंड एक्रीडिटेशन फ्रेमवर्क (स्क्वाफ) विकसित कर रहा है, जिसे नए सत्र 2026-27 से पहले प्रभावी करने की योजना है।

एनईपी के प्रावधानों के तहत प्रत्येक राज्य में स्टेट स्कूल स्टैंडर्ड अथॉरिटी (एसएसएसए) की स्थापना की जा रही है, जिसका उद्देश्य स्कूलों का गुणवत्तापूर्ण मूल्यांकन और एक्रीडिटेशन सुनिश्चित करना है। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश में एससीईआरटी के अंतर्गत एसएसएसए का गठन किया गया है। एससीईआरटी के संयुक्त निदेशक डॉ. पवन सचान के अनुसार, बेसिक और माध्यमिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा के निर्देशन में यह व्यवस्था तैयार की जा रही है। स्क्वाफ के माध्यम से स्कूलों का व्यापक आकलन किया जाएगा, जिससे शैक्षणिक चुनौतियों की पहचान कर उनमें सुधार किया जा सकेगा और विद्यालयों को वैश्विक गुणवत्ता मानकों के अनुरूप विकसित किया जाएगा।

स्क्वाफ के तहत स्कूलों का मूल्यांकन और ग्रेडिंग पांच प्रमुख पैरामीटर पर आधारित होगी। इनमें विद्यालयों का ढांचागत विकास, शिक्षक और कर्मचारियों की स्थिति, पढ़ाई की गुणवत्ता, आवश्यक संसाधन और छात्रों से जुड़ी व्यवस्थाएं शामिल होंगी। कक्षा-कक्ष, बच्चों की नामांकन स्थिति, स्मार्ट क्लास, शौचालय, मिड-डे मील यूनिट और निपुण मूल्यांकन जैसे मानकों के आधार पर स्कूलों की ग्रेडिंग तय की जाएगी। इसी ग्रेडिंग के अनुसार आगे आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे।

उत्तर प्रदेश स्क्वाफ को लागू करने वाला देश का पहला राज्य बन सकता है। फिलहाल किसी भी प्रदेश में यह व्यवस्था पूरी तरह लागू नहीं है, हालांकि गुजरात और असम ने भी इस दिशा में प्रयास शुरू किए हैं। इसके साथ ही एनईपी के तहत प्रदेश में इस सत्र से बैगलेस डे की व्यवस्था भी लागू की गई है। महीने के अंतिम शनिवार को बच्चे बिना बैग के स्कूल आएंगे और गतिविधियों व खेलकूद के माध्यम से व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त करेंगे। चालू सत्र में इसे दस दिनों के लिए लागू किया गया है, जिससे बच्चों की सीखने की प्रक्रिया को अधिक रोचक और प्रभावी बनाया जा सके।

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