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Lucknow: कभी अखिलेश के आसपास, अब मनोज, राकेश और अभय को सीट कहाँ

लखनऊ: उत्तर प्रदेश विधानसभा में समाजवादी पार्टी से निष्कासित तीन विधायक — मनोज पांडेय, राकेश प्रताप सिंह और अभय सिंह — अब किसी भी राजनीतिक दल से असंबद्ध घोषित कर दिए गए हैं।
विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना के आदेश के बाद इन तीनों को स्वतंत्र विधायक माना जाएगा और सपा से उनकी कोई औपचारिक पहचान नहीं रहेगी।
ये तीनों विधायक अब विधानसभा में सपा सदस्यों के साथ नहीं बैठेंगे। इनके लिए अलग सीटों का आवंटन मानसून सत्र के दौरान तय किया जाएगा।
इनमें से मनोज पांडेय (ऊंचाहार से विधायक) को विधानसभा में अक्सर अखिलेश यादव के पीछे की सीट पर बैठते देखा जाता था। वे सपा के मुख्य सचेतक (Chief Whip) भी थे।
वहीं, राकेश प्रताप सिंह (गौरीगंज, अमेठी) और अभय सिंह (गोसाईंगंज, अयोध्या) भी अखिलेश यादव के करीब माने जाते थे और विधानसभा में उनके आसपास की सीटों पर बैठते थे।
लेकिन फरवरी 2024 में तीनों विधायकों ने पार्टी लाइन के खिलाफ जाकर बगावत की थी। इसके बाद इन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया गया और अब उन्हें असंबद्ध घोषित कर दिया गया है।
अब विधानसभा में कहां मिलेगी सीट?
तीनों विधायक अब निर्दलीय की श्रेणी में माने जाएंगे।
इनकी नई सीटें अब मानसून सत्र के दौरान विधानसभा सचिवालय द्वारा तय की जाएंगी।
बजट सत्र के दौरान ये तीनों अक्सर एक साथ बैठते नजर आए थे।
5 मार्च को सत्र के अंतिम दिन अभय और राकेश, सत्ताधारी दल के नेताओं और मंत्रियों के पास बैठे देखे गए थे।
आगे क्या है इन विधायकों का राजनीतिक भविष्य?
अब बड़ा सवाल यह है कि इन तीनों नेताओं का अगला कदम क्या होगा? जब इन्हें सपा से निष्कासित किया गया था, तब अटकलें तेज थीं कि ये बीजेपी में शामिल होकर उपचुनाव लड़ सकते हैं। सूत्रों के मुताबिक, रणनीति यह हो सकती है:
तीनों विधायक अपने-अपने पद से इस्तीफा दें
उपचुनाव की घोषणा के बाद बीजेपी टिकट पर चुनाव लड़ें
जीतने पर बीजेपी उन्हें राजनीतिक और प्रशासनिक जिम्मेदारी सौंपे
बीजेपी के सामने भी संकट!
हालांकि बीजेपी इस मामले में सावधानी बरत रही है। 2022 के विधानसभा चुनाव में इन तीनों ने सपा के टिकट पर जीत दर्ज की थी। ऐसे में यदि बीजेपी इन्हें सीधे जिम्मेदारी देती है तो सपा इसे मुद्दा बनाकर राजनीतिक लाभ उठाने की कोशिश करेगी।
बीजेपी को इस बात का भी डर है कि विपक्ष इसे “दलबदल” और “राजनीतिक खरीद-फरोख्त” के रूप में पेश कर सकता है। इसलिए बीजेपी किसी भी फैसला लेने से पहले हर पहलू पर मंथन कर रही है।





