उत्तर प्रदेश

लखनऊ में पशुओं की नीलामी पर घिरी नगर निगम विपक्ष ने उठाए सवाल

Ratna Netam
24 Aug 2026 7:39 PM IST
लखनऊ में पशुओं की नीलामी पर घिरी नगर निगम विपक्ष ने उठाए सवाल
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लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में सोमवार को 243 भैंसों की नीलामी को लेकर जमकर हंगामा हुआ। नगर निगम की ओर से जब्त की गई भैंसों की नीलामी का विरोध करते हुए समाजवादी पार्टी (सपा) और आजाद समाज पार्टी के कार्यकर्ता सड़क पर उतर आए। प्रदर्शनकारियों ने नगर निगम मुख्यालय पहुंचकर नारेबाजी की और नीलामी प्रक्रिया को तुरंत रोकने की मांग की।
मामला उस समय गरमा गया जब नगर निगम ने अवैध डेयरियों के खिलाफ कार्रवाई के दौरान पकड़ी गई भैंसों की नीलामी शुरू की। प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि पशुपालकों को पर्याप्त मौका दिए बिना इतनी बड़ी संख्या में पशुओं की नीलामी करना गलत है। वहीं नगर निगम प्रशासन का कहना है कि पूरी प्रक्रिया नियमों के तहत की जा रही है।
पारा क्षेत्र से जब्त की गई थीं भैंसें
दरअसल, लखनऊ नगर निगम ने पारा क्षेत्र में अवैध रूप से संचालित डेयरियों के खिलाफ अभियान चलाया था। इस कार्रवाई के दौरान बड़ी संख्या में पशुओं को जब्त किया गया था। इनमें करीब 242 भैंस और एक भैंसा शामिल था। इन पशुओं को अलग-अलग कांजी हाउस और गौशालाओं में रखा गया था।
नगर निगम का कहना था कि शहर में अवैध डेयरियों के कारण गंदगी, जलभराव और यातायात जैसी समस्याएं बढ़ रही थीं। इसी कारण कार्रवाई करते हुए पशुओं को कब्जे में लिया गया और बाद में नीलामी का फैसला किया गया।
सपा और आजाद समाज पार्टी ने किया विरोध
नीलामी के विरोध में समाजवादी पार्टी यूथ ब्रिगेड और आजाद समाज पार्टी के कार्यकर्ता नगर निगम मुख्यालय पहुंचे। उनके साथ कई डेयरी संचालक और पशु मालिक भी मौजूद थे। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि पशुपालकों की आजीविका इन पशुओं पर निर्भर है और बिना उचित सुनवाई के नीलामी करना अन्याय है।
प्रदर्शन के दौरान सपा विधायक अरमान खान सहित कई जनप्रतिनिधि भी मौके पर पहुंचे। उन्होंने अधिकारियों से बातचीत कर नीलामी प्रक्रिया रोकने की मांग की। विधायक की ओर से नीलामी स्थगित करने के लिए पत्र भी दिया गया।
पुलिस ने संभाला मोर्चा
प्रदर्शन बढ़ने के बाद नगर निगम परिसर में पुलिस बल तैनात किया गया। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को समझाने की कोशिश की, लेकिन जब हंगामा बढ़ा तो उन्हें मौके से हटाया गया। कुछ प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने हिरासत में लेकर वहां से हटाया।
मौके पर कुछ समय के लिए तनाव की स्थिति बनी रही। हालांकि पुलिस की कार्रवाई के बाद स्थिति को नियंत्रित कर लिया गया। प्रशासन ने कहा कि कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए गए हैं।
नीलामी को लेकर क्या थी प्रक्रिया?
नगर निगम ने नीलामी के लिए नियम तय किए थे। एक भैंस की न्यूनतम बोली करीब 20 से 21 हजार रुपये रखी गई थी। नीलामी में शामिल होने वाले लोगों से निर्धारित धरोहर राशि भी जमा कराई गई थी।
नगर निगम अधिकारियों का कहना था कि जिन पशुपालकों के पशु जब्त किए गए हैं, उन्हें सीधे नीलामी प्रक्रिया में शामिल होने की अनुमति नहीं दी गई, ताकि दोबारा अवैध डेयरी संचालन की स्थिति न बने।
प्रदर्शनकारियों ने लगाए आरोप
प्रदर्शन कर रहे लोगों का आरोप था कि नीलामी में बाहर के लोगों को शामिल किया जा रहा है और स्थानीय पशु मालिकों की बात नहीं सुनी जा रही। उन्होंने मांग की कि पहले पशुपालकों को अपना पक्ष रखने का मौका दिया जाए और फिर कोई फैसला लिया जाए।
सपा नेताओं ने कहा कि गरीब और छोटे पशुपालकों की रोजी-रोटी इन भैंसों से जुड़ी है। इसलिए प्रशासन को मानवीय दृष्टिकोण अपनाना चाहिए।
नगर निगम ने बताया नियमों के अनुसार कार्रवाई
वहीं नगर निगम प्रशासन का कहना है कि अवैध डेयरियों के खिलाफ अभियान जनहित में चलाया गया है। अधिकारियों के मुताबिक, शहर में स्वच्छता और व्यवस्था बनाए रखने के लिए यह कार्रवाई जरूरी थी।
प्रशासन ने यह भी कहा कि नीलामी प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी तरीके से कराई जा रही है और इसमें सभी निर्धारित नियमों का पालन किया जा रहा है।
राजनीतिक मुद्दा बना मामला
243 भैंसों की नीलामी का मामला अब राजनीतिक रंग ले चुका है। विपक्षी दल इसे पशुपालकों और गरीब वर्ग से जुड़ा मुद्दा बता रहे हैं, जबकि नगर निगम इसे प्रशासनिक कार्रवाई बता रहा है।
लखनऊ में हुई इस घटना ने एक बार फिर अवैध डेयरियों, पशुपालकों की समस्याओं और नगर प्रशासन की कार्रवाई को लेकर बहस छेड़ दी है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा राजनीतिक मंचों पर भी उठ सकता है।
फिलहाल नगर निगम की नीलामी प्रक्रिया और प्रदर्शन के बाद स्थिति पर प्रशासन नजर बनाए हुए है। दोनों पक्षों के अपने-अपने तर्क हैं, लेकिन इस पूरे विवाद ने राजधानी की राजनीति को जरूर गर्मा दिया है।
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