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Lucknow: रिटायमेंट से एक माह पूर्व सुर्खियों में मानवेंद्र सिंह

लखनऊ: आयुष विधा को यूपी में आगे बढ़ाना सीएम योगी आदित्यनाथ की प्राथमिकता में है। इसके लिए यूनानी, आयुर्वेद और होम्योपैथिक विभाग में आयुष महानिदेशक (डीजी)का पद भी सृजित किया गया।
उम्मीद थी कि प्रशासनिक संचालन को रफ्तार मिलेगी। हुआ इसके ठीक उलट। तबादलों में गड़बडिय़ों की कलंक कथा के बाद नया खेल नियम विपरीत ओएसडी बनाने का है। रिटायर होने के चंद दिन पहले महानिदेशक मानवेन्द्र सिंह की कार्यप्रणाली आयुर्वेद विभाग में सुर्खियां बटोर रही है।
गड़बड़ तबादलों के कारण डॉक्टर काफी आक्रोशित
तीन जुलाई को आदेश जारी करके राजकीय आयुर्वेद चिकित्सालय चंद्रामऊ अयोध्या में तैनात डॉक्टर ऋषि प्रताप चौधरी को आयुष महानिदेशक का विशेष कार्याधिकारी (ओएसडी) बनाया गया है। एक तरफ जहां गड़बड़ तबादलों के कारण डॉक्टर काफी आक्रोशित हैं। वहीं दूसरी तरफ जनहित में मरीजों का इलाज करने के लिए जिस डॉक्टर का चंद दिनों पहले लखनऊ से अयोध्या तबादला हुआ। उसे नियम विपरीत जानबूझकर वापस लखनऊ बुला लिया गया है।
जबकि शासन ने आयुष डीजी के अलावा ओएसडी का पद सृजित भी नहीं किया है। मानवेन्द्र को सरकार ने 25 जून 2024 को डीजी आयुष के पद पर तैनात किया था। इस दौरान महानिदेशक दफ्तर में उन्हें ओएसडी की जरूरत नहीं महसूस हुई। अब रिटायरमेंट के सिर्फ एक माह शेष रहते मानो ओएसडी बिना आयुष महानिदेशक का काम ही नहीं चल पा रहा है। महानिदेशक दफ्तर में पहले से निजी सचिव मौजूद हैं।
लखनऊ या मुख्यालय से किसी भी डॉक्टर को ओएसडी पद की अतिरिक्त जिम्मेदारी के लायक नहीं समझा गया। ओएसडी बनाने के लिए महानिदेशक को डॉक्टर भी वही रास आया, जिसकी पूरी नौकरी (तकरीबन 13 साल) ही लखनऊ की तैनाती में गुजर रही थी। शायद इसे ही कहते हैं अंधा बांटे रेवड़ी फिर-फिर अपने को दे।
तबादलों में दाम्पत्य नीति की धज्जियां, हाईकोर्ट ने दिखाया आईना
संदेश वाहक ने खुलासा किया था कि तबादलों में दाम्पत्य नीति की धज्जियां उड़ाई गयी हैं। डॉक्टरों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। दायर याचिकाओं में डॉक्टर अनिता के मामले में एक जुलाई को पारित आदेश में हाईकोर्ट ने अफसरों को दाम्पत्य नीति की धज्जियां उड़ाने पर आईना दिखाया है। डॉ अनिता को कौशाम्बी से 400 किमी दूर बलिया भेजा गया था। कौशाम्बी में उनके डॉक्टर पति भी तैनात हैं। जो यूनियन में पदाधिकारी भी हैं। हाईकोर्ट ने डॉ अनिता के प्रत्यावेदन पर तत्काल विचार करने का आदेश देते हुए छह हफ्ते में पति-पत्नी को एक जगह तैनाती देने के लिए सरकार से कहा है।





