उत्तर प्रदेश

Lucknow: परिसीमन से जोड़ना लोकतांत्रिक संतुलन के खिलाफ: अखिलेश

Admindelhi1
20 April 2026 12:07 PM IST
Lucknow: परिसीमन से जोड़ना लोकतांत्रिक संतुलन के खिलाफ: अखिलेश
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लखनऊ: समाजवादी राजनीति के केंद्र में एक बार फिर महिला आरक्षण का मुद्दा गरमा गया है। अखिलेश यादव ने साफ शब्दों में कहा है कि विपक्ष महिला आरक्षण के खिलाफ नहीं है, बल्कि इसे परिसीमन से जोड़ने के फैसले का विरोध कर रहा है।

अखिलेश यादव का यह बयान उस समय आया है जब संसद और सियासी गलियारों में महिला आरक्षण को लेकर तीखी बहस जारी है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने महिला सशक्तिकरण के नाम पर एक ऐसा “राजनीतिक जाल” बिछाया है, जिसमें वास्तविक प्रतिनिधित्व को टालने की रणनीति छिपी है।

अखिलेश ने कहा कि अगर सरकार सच में महिलाओं को अधिकार देना चाहती है तो तत्काल प्रभाव से आरक्षण लागू किया जाए, न कि इसे परिसीमन जैसी जटिल प्रक्रिया से जोड़कर वर्षों तक लटकाया जाए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि समाजवादी पार्टी हमेशा महिलाओं के अधिकारों के पक्ष में रही है, लेकिन “देरी की राजनीति” को स्वीकार नहीं करेगी।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह बयान सीधे तौर पर केंद्र सरकार की रणनीति पर सवाल खड़ा करता है। विपक्ष का तर्क है कि परिसीमन की प्रक्रिया 2026 के बाद ही संभव है, ऐसे में महिला आरक्षण लागू होने में लंबा समय लग सकता है।

सूत्रों के मुताबिक, पिछले चुनावी आंकड़ों में महिलाओं की भागीदारी बढ़कर करीब 48% तक पहुंची, लेकिन संसद में उनका प्रतिनिधित्व अभी भी लगभग 15% के आसपास ही सीमित है। ऐसे में आरक्षण को तत्काल लागू करने की मांग तेज हो रही है।

इस मुद्दे पर विपक्षी दलों की एकजुटता भी देखने को मिल रही है। कई नेताओं का कहना है कि महिला आरक्षण को लागू करने में देरी करना सीधे तौर पर लोकतांत्रिक अधिकारों के साथ खिलवाड़ है।

अखिलेश यादव का यह बयान आने वाले चुनावों में बड़ा मुद्दा बन सकता है। उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में महिला वोटरों की संख्या निर्णायक मानी जाती है, और ऐसे में यह बहस सीधे चुनावी रणनीति को प्रभावित कर सकती है।

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