उत्तर प्रदेश

गोमती की बाढ़ से लखनऊ बेहाल, एक लाख से ज्यादा लोग पलायन को मजबूर

Kavita2
6 Oct 2026 9:21 AM IST
गोमती की बाढ़ से लखनऊ बेहाल, एक लाख से ज्यादा लोग पलायन को मजबूर
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लखनऊ। राजधानी लखनऊ में गोमती नदी की बाढ़ ने कई इलाकों में जनजीवन बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। फैजुल्लागंज, मल्लाही टोला और आसपास के बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों में हालात बेहद गंभीर बने हुए हैं। नदी का पानी घरों, गलियों, दुकानों और सड़कों तक पहुंच गया है। हजारों परिवारों की वर्षों की मेहनत से जुटाई गई गृहस्थी पानी में डूब चुकी है। कई लोगों के वाहन, घरेलू सामान और दुकानों में रखा माल भी बर्बाद हो गया है।

स्थिति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि बाढ़ से प्रभावित इलाकों की एक लाख से अधिक आबादी को अपने घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर जाना पड़ा है। जिन लोगों के घरों में पानी भर गया है, वे अपने परिवार के साथ रिश्तेदारों, परिचितों या अस्थायी ठिकानों पर शरण लेने को मजबूर हैं। कई परिवार ऐसे भी हैं, जिनके पास जाने के लिए कोई सुरक्षित जगह नहीं है और वे राहत की उम्मीद में प्रशासन की ओर देख रहे हैं।

फैजुल्लागंज और मल्लाही टोला में बाढ़ का असर सबसे ज्यादा दिखाई दे रहा है। यहां कई गलियों में पानी भरा हुआ है और लोगों का घरों से बाहर निकलना मुश्किल हो गया है। कई मकानों के अंदर कई फीट तक पानी पहुंचने के कारण सामान निकालना भी संभव नहीं हो पा रहा। जिन परिवारों ने किसी तरह जरूरी सामान बाहर निकाला, वे भी अब उसके सुरक्षित रहने को लेकर चिंतित हैं।

बाढ़ ने केवल घरों को ही नुकसान नहीं पहुंचाया, बल्कि लोगों की आजीविका पर भी बड़ा असर डाला है। छोटी दुकानें चलाने वाले दुकानदारों का सामान पानी में डूब गया है। कई लोगों के दोपहिया और चारपहिया वाहन भी पानी में फंसे हुए हैं। घरेलू उपकरण, फर्नीचर, राशन, कपड़े और जरूरी दस्तावेज खराब होने की आशंका ने पीड़ित परिवारों की चिंता और बढ़ा दी है।

सबसे गंभीर स्थिति उन परिवारों की है, जिनकी आय का कोई दूसरा साधन नहीं है। रोज कमाने-खाने वाले लोगों के सामने अब दोहरी चुनौती खड़ी हो गई है। एक तरफ उनका घर और सामान बर्बाद हुआ है, दूसरी तरफ कामकाज ठप होने से रोजमर्रा का खर्च चलाना भी मुश्किल हो गया है। ऐसे परिवारों के लिए अब सबसे बड़ी चिंता नुकसान का आकलन नहीं, बल्कि आने वाले दिनों में भोजन और रहने की व्यवस्था करना है।

बाढ़ग्रस्त इलाकों में हर तरफ बेबसी और अनिश्चितता का माहौल है। लोग पानी उतरने का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन इसके बाद की स्थिति को लेकर भी चिंतित हैं। पानी हटने के बाद घरों की सफाई, खराब सामान को हटाना, बिजली व्यवस्था बहाल करना और पीने के साफ पानी की उपलब्धता जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं।

इस बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बाढ़ प्रभावित लोगों से मुलाकात कर उनका हाल जाना। उन्होंने पीड़ित परिवारों को हरसंभव मदद का भरोसा दिलाया। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को प्रभावित लोगों तक राहत पहुंचाने और जरूरी व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। पीड़ितों ने भी मुख्यमंत्री के सामने अपनी समस्याएं रखीं और राहत की मांग की।

लखनऊ से सांसद और रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने भी स्थिति पर नजर रखी। उन्होंने अधिकारियों से फोन पर बाढ़ की स्थिति और राहत कार्यों के बारे में जानकारी ली। प्रशासनिक अमले को प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्यों को तेजी से आगे बढ़ाने के लिए कहा गया है।

फैजुल्लागंज, मल्लाही टोला और आसपास के इलाकों में राहत और बचाव व्यवस्था अब प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है। प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने के साथ-साथ भोजन, पीने का पानी और जरूरी दवाओं की उपलब्धता भी सुनिश्चित करनी होगी। पानी में लंबे समय तक रहने से संक्रमण और बीमारियों का खतरा भी बढ़ सकता है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्होंने पहले भी जलभराव और बाढ़ जैसी स्थिति देखी है, लेकिन इस बार नुकसान काफी अधिक है। कई परिवारों ने वर्षों की बचत से घर बनाया था और धीरे-धीरे घरेलू सामान जुटाया था। अब वही सबकुछ पानी में डूबा पड़ा है। कई लोग अपने घरों के बाहर खड़े होकर पानी उतरने का इंतजार कर रहे हैं।

बाढ़ से प्रभावित इलाकों में बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं की परेशानी सबसे अधिक है। सुरक्षित स्थानों तक पहुंचना, भोजन और दवाओं की व्यवस्था करना इन परिवारों के लिए बड़ी चुनौती बन गई है। कई परिवारों के सामने स्कूल जाने वाले बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित होने का संकट है।

प्रशासन की ओर से राहत कार्यों को तेज करने की जरूरत लगातार महसूस की जा रही है। प्रभावित लोग चाहते हैं कि नुकसान का जल्द सर्वे कराया जाए और आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाए। इसके साथ ही बाढ़ के बाद फैलने वाली बीमारियों को रोकने के लिए स्वास्थ्य विभाग की टीमों की तैनाती और साफ-सफाई की व्यवस्था भी जरूरी होगी।

गोमती की इस बाढ़ ने राजधानी के कई इलाकों में लोगों की जिंदगी को अचानक बदल दिया है। जिन घरों में कुछ दिन पहले तक सामान्य दिनचर्या चल रही थी, वहां अब पानी और बर्बादी का मंजर है। फिलहाल पीड़ित परिवारों की नजर सरकार और प्रशासन की मदद पर टिकी है। पानी उतरने के बाद असली नुकसान का पूरा आकलन सामने आएगा, लेकिन अभी सबसे बड़ी प्राथमिकता लोगों को सुरक्षित रखना और उनके लिए भोजन, पानी और रहने की व्यवस्था सुनिश्चित करना है।

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