उत्तर प्रदेश

Lucknow: अवैध शराब तस्करी का भंडाफोड़, गोसाईगंज में दो गिरफ्तार

Admindelhi1
20 July 2025 9:40 AM IST
Lucknow: अवैध शराब तस्करी का भंडाफोड़, गोसाईगंज में दो गिरफ्तार
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लखनऊ: गोसाईगंज थाना पुलिस ने अवैध शराब तस्करी के एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश करते हुए दो शातिर अंतर्राज्यीय शराब तस्करों को गिरफ्तार किया है। पकड़े गए अभियुक्तों की पहचान दिनेश कुमार परमार (45 वर्ष) और जगदीश (36 वर्ष), दोनों निवासी चापा नेर, थाना खांचरोद, जिला उज्जैन, मध्य प्रदेश के रूप में हुई है। पुलिस ने इनके कब्जे से 14,484 बोतल अंग्रेजी शराब (कुल 4,691 लीटर, अनुमानित कीमत 30 लाख रुपये) और एक फर्जी नंबर प्लेट लगी डीसीएम वाहन बरामद किया है। यह शराब पंजाब से बिहार तस्करी के लिए ले जाई जा रही थी। 18 जुलाई 2025 को गोसाईगंज थाना पुलिस को सूचना मिली कि वाहन संख्या UP23-BT-0307 वाली एक डीसीएम में पंजाब से बिहार अवैध अंग्रेजी शराब की तस्करी हो रही है, जो कबीरपुर के पास टाटा मोटर्स के सामने खड़ी है। सूचना पर तत्काल कार्रवाई करते हुए पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर वाहन में सवार दो व्यक्तियों को हिरासत में लिया। पूछताछ में ड्राइवर दिनेश कुमार और सहयोगी जगदीश ने बताया कि वाहन में लोहे के पाइप लदे हैं और इसके लिए दिल्ली की आर.के. इंटरप्राइजेज से असम की बिपिन इंटरप्राइजेज के नाम 10 टन लोहे के पाइप का बिल दिखाया, जिसका इनवॉइस नंबर 1/2025-26 और तारीख 15.07.2025 थी।

गुमराह करने के लिए तस्करी का अपनाया अनोखा तरीका

पुलिस ने जब वाहन की तलाशी ली तो पाया कि डीसीएम के पिछले हिस्से में 1.5 फुट लंबे और 20 फुट लंबे 120 लोहे के पाइप लदे थे, जिन्हें वेल्डिंग करके इस तरह रखा गया था कि बाहर से देखने में केवल पाइप ही नजर आएं। लेकिन जब पाइप हटाए गए, तो नीचे भारी मात्रा में विभिन्न ब्रांड्स की अंग्रेजी शराब की पेटियां मिलीं। यह शराब हिमाचल प्रदेश में निर्मित थी और चंडीगढ़ में बिक्री के लिए वैध थी, लेकिन इसे बिहार में तस्करी के लिए ले जाया जा रहा था, जहां शराबबंदी कानून लागू है। पुलिस ने वाहन की जांच की तो पता चला कि डीसीएम की नंबर प्लेट (UP23-BT-0307) फर्जी थी। वाहन के असली चेसिस नंबर की जांच की गई , जिसके आधार पर ई-चालान ऐप पर जांच करने पर वाहन का असली रजिस्ट्रेशन नंबर UP32-VN-7115 निकला। यह वाहन लखनऊ के विनय कुमार मिश्रा के नाम पंजीकृत था, जिन्होंने बताया कि उन्होंने यह वाहन पंजाब के रोहतास पुत्र देवीलाल को किराए पर दिया था। रोहतास ने न तो पैसा दिया और न ही वाहन लौटाया, जिसके खिलाफ विनय ने IGRS पर शिकायत और कोर्ट में मुकदमा दायर किया था।

पूछताछ में अभियुक्तों ने बताया कि वे फर्जी नंबर प्लेट और जाली दस्तावेजों का इस्तेमाल करते थे। शराब को छिपाने के लिए वाहन के पिछले हिस्से में लोहे के पाइप लदे होते थे, ताकि एक्स-रे मशीन से भी शराब का पता न चले। शराब चंडीगढ़ से लोड की जाती थी, और दिल्ली में माल भेजने वाले व्यक्ति द्वारा सिग्नल मोबाइल ऐप के जरिए बिल्टी उपलब्ध कराई जाती थी। बिहार में शराब को एमआरपी से तीन गुना कीमत पर बेचा जाता था, जिससे 4,691 लीटर शराब की कीमत लगभग 1 करोड़ रुपये हो जाती थी। सिग्नल ऐप का इस्तेमाल इसलिए किया जाता था ताकि मोबाइल नंबर ट्रेस न हो सकें।

तस्करी की शराब ले जाने के अपनाते थे ये रूट

तस्करी का रूट चंडीगढ़ से शुरू होकर अंबाला, हाथरस, आगरा एक्सप्रेस-वे, लखनऊ और पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे होते हुए बिहार (पटना के पास) तक था। रास्ते में अभियुक्त ढाबों या होटलों पर रुककर सिग्नल ऐप के जरिए मालिक और खरीदारों से संपर्क करते थे।

अभियुक्तों के खिलाफ थाना गोसाईगंज में सुसंगत धाराओं मुकदमा दर्ज किया गया। दोनों अभियुक्तों को हिरासत में लेकर जेल भेज दिया गया है। मुख्य सरगना रोहतास और अन्य फरार आरोपियों की तलाश जारी है।इस कार्रवाई में गोसाईगंज थाना पुलिस की सतर्कता और त्वरित कार्रवाई की सराहना की जा रही है। पुलिस उपायुक्त (दक्षिणी) ने इस सफलता के लिए पुलिस टीम को 25,000 रुपये के नकद पुरस्कार से सम्मानित किया है।

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