उत्तर प्रदेश

Lucknow: विश्वविद्यालयों में समता और पारदर्शिता बढ़ाने का प्रयास

Admindelhi1
16 Jan 2026 3:11 PM IST
Lucknow: विश्वविद्यालयों में समता और पारदर्शिता बढ़ाने का प्रयास
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लखनऊ: प्रदेश के सभी सरकारी, निजी और डीम्ड विश्वविद्यालयों में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नए समता विनियम, 2026 लागू हो गए हैं। बुधवार को जारी गजट नोटिफिकेशन के साथ ही ये नियम प्रदेश भर के उच्च शिक्षण संस्थानों पर प्रभावी हो गए हैं। इन विनियमों का उद्देश्य उच्च शिक्षा संस्थानों में धर्म, जाति, लिंग, जन्म-स्थान और दिव्यांगता के आधार पर होने वाले किसी भी प्रकार के भेदभाव को पूरी तरह समाप्त करना है।

नए नियमों के तहत अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग और दिव्यांग छात्रों व कर्मचारियों के अधिकारों की सुरक्षा को विशेष रूप से प्राथमिकता दी गई है। यूजीसी ने स्पष्ट किया है कि शिक्षा का माहौल पूरी तरह समावेशी, सुरक्षित और समान अवसरों पर आधारित होना चाहिए, ताकि किसी भी वर्ग के छात्र या कर्मचारी के साथ अन्याय न हो।

यूजीसी के निर्देशानुसार अब प्रत्येक विश्वविद्यालय और कॉलेज में समान अवसर केंद्र (Equal Opportunity Centre) की स्थापना अनिवार्य होगी। यह केंद्र वंचित और कमजोर वर्गों के छात्रों व कर्मचारियों को शैक्षणिक मार्गदर्शन, छात्रवृत्ति, वित्तीय सहायता, परामर्श और सामाजिक सहयोग प्रदान करेगा। इसके साथ ही संस्थानों में एक समता समिति का गठन भी जरूरी किया गया है। इस समिति में शिक्षक, गैर-शिक्षण कर्मचारी, छात्र प्रतिनिधि और नागरिक समाज से जुड़े सदस्य शामिल होंगे।

समता समिति का दायित्व भेदभाव से संबंधित शिकायतों की निष्पक्ष जांच करना और समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करना होगा। इसके अलावा प्रत्येक संस्थान में समता हेल्पलाइन शुरू करना भी अनिवार्य कर दिया गया है। पीड़ित छात्र या कर्मचारी ऑनलाइन पोर्टल, ई-मेल या हेल्पलाइन नंबर के माध्यम से अपनी शिकायत दर्ज करा सकेंगे, ताकि उन्हें त्वरित राहत मिल सके।

यूजीसी ने यह भी स्पष्ट किया है कि नए समता विनियमों का पालन न करने वाले विश्वविद्यालयों और कॉलेजों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। इसमें मान्यता पर असर डालने से लेकर अनुदान रोकने जैसे कदम भी शामिल हो सकते हैं। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इन नियमों के लागू होने से प्रदेश के उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता और सामाजिक न्याय को मजबूती मिलेगी तथा छात्रों को भय और भेदभाव से मुक्त शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध हो|

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