उत्तर प्रदेश

Lucknow: अनामिका सिंह मर्डर केस में कोर्ट सख्त, दोषी को आजीवन जेल

Admindelhi1
4 Nov 2025 11:16 AM IST
Lucknow: अनामिका सिंह मर्डर केस में कोर्ट सख्त, दोषी को आजीवन जेल
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लखनऊ: चिनहट इलाके में अनामिका सिंह की बेरहमी से हत्या करने वाले उसके किराएदार अर्जुन सोनी और उसके दोस्त वीरेंद्र कुमार यादव को कोर्ट ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई है. लूट में असफल होने पर दोनों अपराधियों ने 2 साल की मासूम बेटी के सामने इस खौफनाक वारदात को अंजाम दिया था. बता दें कि यह घटना लखनऊ के चिनहट थाना क्षेत्र के भरवारा गांव में हुई थी. 36 वर्षीय अनामिका सिंह की उनके घर में घुसकर हत्या की गई. यह वारदात 19 मई 2023 को हुई थी. हत्या का मास्टरमाइंड अनामिका के पति का किराएदार अर्जुन सोनी निकला. अर्जुन ने लूट के इरादे से अपने दोस्त वीरेंद्र कुमार यादव के साथ मिलकर साजिश रची थी. वीरेंद्र फर्जी जियो फाइबर एजेंट बनकर घर में घुसा और लूट में असफल रहने पर अनामिका को चाकू से गोद डाला.

पुलिस जांच में सामने आया कि अर्जुन सोनी ने अपने दोस्त वीरेंद्र यादव के साथ मिलकर लूट की योजना बनाई. साजिश के तहत, वीरेंद्र ने एक शातिर तरीका अपनाया. उसने फर्जी 'JIO BIJAY BIKASH' लिखा परिचय पत्र बनवाया. दो दिन पहले इंटरनेट खराब होने की शिकायत दर्ज होने का बहाना बनाकर, वीरेंद्र 19 मई को पति के ऑफिस जाते ही दोपहर करीब 1:40 बजे घर में घुसा. इस दौरान अनामिका ने जब विरोध किया, तो लूट में असफल रहने पर दरिंदों ने उन पर हमला कर दिया.

अनामिका के शरीर पर चाकू के 34 वार थे, जो अपराधियों की क्रूरता को दर्शाते हैं. तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक आलोक राव ने बताया कि पुलिस ने मौके से काली मंकी कैप और फर्जी परिचय पत्र बरामद किया था. बाद में, वीरेंद्र की निशानदेही पर इंदिरा डैम के पास से खून लगा धारदार चाकू भी बरामद हुआ. कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR), सीसीटीवी फुटेज और पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने साबित कर दिया कि अर्जुन सोनी और वीरेंद्र यादव ही घटनास्थल पर मौजूद थे और उन्होंने मिलकर इस जघन्य अपराध को अंजाम दिया था.

इस जघन्य मामले में लखनऊ की अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश नीरज बारनवाल की अदालत ने 3 नवंबर 2025 को फैसला सुनाया. अदालत ने दोनों अभियुक्तों वीरेंद्र कुमार यादव और अर्जुन सोनी को दोषी करार दिया. उन्हें IPC की धारा 302 (हत्या), 120B (साजिश), 394 (लूट), 449 (अनाधिकृत प्रवेश) समेत फर्जी दस्तावेज बनाने की धाराओं में आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई. इसके अलावा, दोनों पर 10-10 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है.

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