उत्तर प्रदेश

Lucknow बिल्डिंग अग्निकांड: 15 लोगों की मौत दम घुटने से, पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में खुलासा

Kavita2
25 Jun 2026 10:50 AM IST
Lucknow बिल्डिंग अग्निकांड: 15 लोगों की मौत दम घुटने से, पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में खुलासा
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Uttar Pradesh उत्तर प्रदेश: लखनऊ में सोमवार को एक बहुमंजिला इमारत में लगी भीषण आग में मारे गए सभी 15 लोगों की मौत दम घुटने (स्मोक इनहेलेशन) के कारण हुई है। मृतकों में ज्यादातर छात्र शामिल थे। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में यह स्पष्ट हुआ है कि आग से सीधे जलने की गंभीर चोटें किसी भी शव पर नहीं पाई गईं, बल्कि मौत का मुख्य कारण जहरीले धुएं में सांस लेना था।

पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के अनुसार, आग के दौरान इमारत में मौजूद प्लास्टिक, फोम और अन्य सिंथेटिक सामग्री जलने से अत्यधिक जहरीला धुआं उत्पन्न हुआ। इसी धुएं को सांस के माध्यम से शरीर में लेने के कारण लोगों की मौत हो गई। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे धुएं में कार्बन मोनोऑक्साइड और अन्य विषैले गैसें तेजी से शरीर में ऑक्सीजन की कमी पैदा करती हैं, जिससे व्यक्ति कुछ ही मिनटों में बेहोश होकर दम तोड़ सकता है।

यह दर्दनाक हादसा उस समय हुआ जब इमारत के भीतर कई लोग मौजूद थे, जिनमें बड़ी संख्या में छात्र भी शामिल थे। आग लगने के बाद धुआं तेजी से पूरे भवन में फैल गया, जिससे लोगों को बाहर निकलने का मौका नहीं मिल सका। शुरुआती जांच में यह भी सामने आया है कि इमारत की संरचना और आपातकालीन निकास व्यवस्था ने भी स्थिति को और गंभीर बना दिया।

दमकल विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर आग पर काबू पाने का प्रयास किया, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी। इमारत के भीतर फंसे लोग भारी धुएं के कारण सुरक्षित बाहर नहीं निकल सके। राहत और बचाव कार्य के दौरान सभी 15 शव बरामद किए गए।

पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि किसी भी मृतक के शरीर पर गंभीर जलने के निशान नहीं थे, जिससे यह स्पष्ट होता है कि मौत आग की लपटों से नहीं बल्कि धुएं के कारण हुई। यह स्थिति आमतौर पर बंद या कम वेंटिलेशन वाली इमारतों में आग लगने के दौरान देखी जाती है, जहां जहरीला धुआं तेजी से फैलता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी घटनाओं में सबसे बड़ा खतरा दृश्य आग नहीं बल्कि अदृश्य जहरीला धुआं होता है। यह धुआं सांस के जरिए शरीर में जाकर फेफड़ों और मस्तिष्क तक ऑक्सीजन की आपूर्ति को रोक देता है, जिससे व्यक्ति कुछ ही मिनटों में बेहोश हो सकता है।

घटना के बाद प्रशासन ने मामले की विस्तृत जांच के आदेश दिए हैं। यह भी देखा जा रहा है कि क्या इमारत में अग्नि सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था या नहीं। प्रारंभिक स्तर पर सुरक्षा इंतजामों को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं, खासकर आपातकालीन निकास और फायर अलार्म सिस्टम को लेकर।

मृतकों के परिवारों में इस घटना को लेकर गहरा शोक है। ज्यादातर छात्र होने के कारण यह हादसा कई परिवारों के लिए असहनीय क्षति बन गया है। स्थानीय लोगों ने भी इमारत की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं और सख्त कार्रवाई की मांग की है।

अग्निशमन विभाग और प्रशासन की टीमें अब इस बात की जांच कर रही हैं कि आग किस कारण से लगी और क्या इसे शुरुआती चरण में ही नियंत्रित किया जा सकता था। इसके अलावा यह भी जांच की जा रही है कि इमारत में फायर सेफ्टी उपकरण मौजूद थे या नहीं और क्या उनका सही तरीके से उपयोग हुआ।

कुल मिलाकर, लखनऊ की यह दर्दनाक घटना एक बार फिर शहरी इमारतों में अग्नि सुरक्षा की गंभीर स्थिति को उजागर करती है। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट ने यह साफ कर दिया है कि यह मौतें आग से नहीं बल्कि जहरीले धुएं के कारण दम घुटने से हुईं, जो इस हादसे को और भी भयावह बनाता है।

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