- Home
- /
- राज्य
- /
- उत्तर प्रदेश
- /
- Lucknow: अपूर्वा सेवा...
Lucknow: अपूर्वा सेवा समिति ने हिन्दी दिवस पर किया कवि सम्मेलन

लखनऊ: दिनांक 14 सितंबर 2028 दिन रविवार को हिन्दी दिवस के अवसर पर अपूर्वा सेवा समिति साहित्य समाज सेवा व पर्यावरण को समर्पित संस्था द्वारा काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया जिसमें देश प्रदेश के महनीय कवि, कवयित्री की गरिमामई उपस्थित रही। कार्यक्रम संस्था के अध्यक्ष आदरणीय संजय हमनवां रहे और व्यवस्थापक का कार्य भार दुर्गा प्रसाद जी ने संभाला । कार्यकम की संयोजिका सुप्रसिद्ध कवयित्री आदरणीया सुश्री वंदना विशेष गुप्ता जी ने सबका स्वागत किया। इस काव्य गोष्ठी में विशिष्ट अतिथि के रूप में साहित्य भूषण आशु कवि आदरणीय कमलेश मौर्य मृदु जी और गीतकार आदरणीय कलम किशोर भावुक जी रहे। एवं "अपूर्वा राजेश विद्रोही सम्मान 2025" से कमल किशोर भावुक को दिया गया. सभी कवि गणों को भी सम्मानित किया गया। सभी कवि, कवयित्री,और शायर ने अपनी कविता से सभी श्रोताओं ने खूब आनंदित किया। सभी कवियों शानदार पंक्तियां पढ़ी जो इस तरह की है,
कश्मीर हो कन्याकुमारी हो या कि
कामाख्या से लेकर कच्छ की खाड़ी।
राष्ट्र है हिन्दू ये हिंदुस्थान है
हिंदी बने बटवृक्ष हमारी।।
कमलेश मौर्य ' मृदु'
वंदन अपनी चंदन जैसी माटी का
भाव भरी अपनी भाषा का वंदन हो।
कमल किशोर भावुक
सदा मुश्किलें क्षति पहुँचाने मात्र नहीं आतीं
कभी-कभी आतीं पथ की अड़चने हटाने को
....योगी योगेश शुक्ल....
निवेदन है अभी ठहरो अभी जाओ नहीं ऐसे
अभी करनी है हम को तुमसे कितनी बात हिंदी में
लोकेश त्रिपाठी
बाकी सब भाषाएँ हैं सोना चाँदी,
पर हीरे का हार हमारी हिन्दी है।
..वंदना विशेष लखनऊ
क,का -कि,की भूले सभी मात्रा नहीं लगा पाते हैं
उनसठ, उनहत्तर में भी अंतर नही बता पाते हैं
कैसे हाथ बढ़ाएंगे ये भाषा के उत्थान में
हिंदी की दुर्दशा हो रही अपने हिंदुस्तान में ....
प्रियांशु तिवारी
सर्वे भवन्तु सुखिनः संदेश है हमारा
सुंदर सुशील संयम परिवेश है हमारा
करती प्रणाम दुनिया हिंदी के वास्ते ही
सारे जहां में रोशन ये देश है हमारा
ओम शर्मा ओम
जो दूसरों के शेर चोरी करके पढ़ता है
किसी ज़माने में च्वट्टा रहा होगा पहले
~निर्भय निश्छल
कोई क्या बिगाड़ेगा मेरा भला अब
मेरा हाथ थामे खड़े राम मेरे
-सेजल वैश्य (ओज )
मैंने कहा प्रभु जी वरदान मुझे दे दो
कवियों के बीच में सम्मान मुझे दे दो
अवरेन्द्र अवस्थी 'फौजी'
नए दौर की नई दिशाएं अब हम सबको चुनना होगा ।
जन मानस हेतु सदा ही राष्ट्रधर्म सबको गणना होगा ।।
कवि विष्णु दुबे "अमृत"
हैं जो परदे हटाने आएगा
अपना रिश्ता निभाने आएगा
मैं जो रूठा तो ये समझ कर की
कोई हमको मनाने आएगा
अमन मिश्रा
वारा न्यारा हो जाता है एक सहारा हो जाता है
सौ की पत्ती पकड़ाने पर काम हमारा हो जाता है।
अंकुर पाठक
भारत माता के मस्तक की जो गरिमामई बिंदी है
मनोभावों की अभिव्यक्ति की प्यारी भाषा हिन्दी है
~कीर्ति'वानी'
कहीं पर धर्म में दो गज के खातिर गर्दनें कटती,
सनातन धर्म में भाई सिंहासन छोड़ देता है।।
गौरव गौरवान्वित
हम हिंदी के बच्चे हमको,हिंदी माँ से प्यार है।
हिंदी की ममता का आँचल,देता हमें दुलार है।
प्रतिभा गुप्ता
हिंदी की सेवा से बढ़करके कुछ भी कर्तव्य नही,
शब्द साधकों से मां हिंदी को अगणित अरमान है।
योगेन्द्र 'योगी'
तुम्हारे सर से सरकने न देता ओढ़नी को
मैं घर से लेके कोई आलपीन आया नहीं





