उत्तर प्रदेश

Lucknow: SIR प्रक्रिया में 1.04 करोड़ नामों का 2003 सूची से मिलान नहीं

Admindelhi1
10 Jan 2026 12:49 PM IST
Lucknow: SIR प्रक्रिया में 1.04 करोड़ नामों का 2003 सूची से मिलान नहीं
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लखनऊ: मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान के तहत अब बड़े पैमाने पर नोटिस बांटने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इस अभियान का उद्देश्य मतदाता सूची को पूरी तरह शुद्ध, अद्यतन और पारदर्शी बनाना है, ताकि आगामी चुनावों में किसी भी तरह की गड़बड़ी या भ्रम की स्थिति न रहे। चुनाव आयोग द्वारा कराए जा रहे इस विशेष अभियान में उन मतदाताओं को चिन्हित किया गया है, जिनका नाम वर्ष 2003 की मतदाता सूची से मेल नहीं खा सका है।

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार एसआईआर के तहत कुल 1.04 करोड़ ऐसे मतदाता सामने आए हैं, जिनकी मैपिंग 2003 की मतदाता सूची से नहीं हो पाई। मैपिंग न होने के कारण इन सभी मतदाताओं को नोटिस जारी किया जा रहा है। प्रशासन की ओर से यह स्पष्ट किया गया है कि नोटिस जारी होने के बाद न्यूनतम सात दिन का समय दिया जाएगा और इसके बाद ही सुनवाई की तिथि निर्धारित की जाएगी, ताकि संबंधित मतदाता बिना किसी जल्दबाजी के अपने दस्तावेज तैयार कर सकें और अपना पक्ष रख सकें।

चुनाव विभाग के सूत्रों के मुताबिक एसआईआर से जुड़ी पूरी प्रक्रिया को तकनीकी रूप से मजबूत किया जा रहा है। इसके लिए साफ्टवेयर में लगातार डाटा फीड किया जा रहा है और जरूरत के मुताबिक आवश्यक बदलाव भी किए जा रहे हैं, जिससे किसी तरह की तकनीकी खामी न रह जाए। अधिकारी यह भी सुनिश्चित कर रहे हैं कि प्रत्येक नोटिस सही पते पर पहुंचे और मतदाता तक पूरी जानकारी स्पष्ट रूप से पहुंचे।

नोटिस की संरचना भी काफी विस्तृत रखी गई है। यह नोटिस कुल दो पृष्ठों का होगा। पहले पृष्ठ पर नोटिस से जुड़ा पूरा विवरण, कारण और सुनवाई की प्रक्रिया से संबंधित जानकारी दर्ज रहेगी। वहीं दूसरे पृष्ठ पर 13 प्रकार के प्रमाण पत्रों की सूची दी जाएगी, जिन्हें मतदाता को सुनवाई के दौरान प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा।

सुनवाई के समय संबंधित मतदाता को निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ईआरओ) या सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (एईआरओ) के समक्ष उपस्थित होकर आवश्यक दस्तावेज पेश करने होंगे। इन दस्तावेजों के आधार पर यह तय किया जाएगा कि मतदाता का नाम सूची में बरकरार रखा जाएगा या नहीं। अधिकारियों का कहना है कि इस पूरी कवायद का मकसद केवल पात्र मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा करना है, साथ ही मतदाता सूची से अपात्र, मृतक या स्थानांतरित मतदाताओं के नाम हटाना भी है।

चुनाव आयोग का मानना है कि एसआईआर प्रक्रिया पूरी होने के बाद मतदाता सूची अधिक विश्वसनीय और त्रुटिरहित होगी, जिससे निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव कराने में मदद मिलेगी। प्रशासन ने मतदाताओं से अपील की है कि वे नोटिस मिलने पर घबराएं नहीं, बल्कि तय समय के भीतर आवश्यक दस्तावेजों के साथ सुनवाई में शामिल होकर सहयोग करें।

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