उत्तर प्रदेश

भगवान राम की बहन शांता ने भेजा अनोखा रक्षा सूत्र

nidhi
28 Aug 2026 7:13 AM IST
भगवान राम की बहन शांता ने भेजा अनोखा रक्षा सूत्र
x
धान और केले के रेशे से तैयार

महबूबगंज : अयोध्या में इस बार रक्षाबंधन का पर्व बेहद खास होने जा रहा है। भगवान श्रीराम की बहन मानी जाने वाली माता शांता की ओर से रामलला के लिए विशेष राखी भेजी गई है। यह राखी अपनी अनोखी कला और प्राकृतिक सामग्री के कारण चर्चा का विषय बनी हुई है। इसे धान और केले के रेशों से तैयार किया गया है, जो पर्यावरण संरक्षण और भारतीय परंपरा का सुंदर उदाहरण पेश करती है।

मान्यता के अनुसार माता शांता भगवान राम की बड़ी बहन थीं। धार्मिक ग्रंथों में उनका उल्लेख राजा दशरथ और माता कौशल्या की पुत्री के रूप में मिलता है। रक्षाबंधन के पावन अवसर पर शांता की ओर से रामलला के लिए भेजी गई इस राखी को भक्त भावनाओं और आस्था से जोड़कर देख रहे हैं।
प्राकृतिक सामग्री से तैयार की गई राखी
रामलला के लिए बनाई गई इस विशेष राखी को तैयार करने में पूरी तरह प्राकृतिक सामग्री का इस्तेमाल किया गया है। इसमें धान के दाने और केले के रेशों का प्रयोग किया गया है। कारीगरों ने इसे पारंपरिक तरीके से तैयार किया है, जिसमें भारतीय संस्कृति और प्रकृति के प्रति सम्मान को दर्शाया गया है। राखी को आकर्षक रूप देने के लिए इसमें पारंपरिक डिजाइन और धार्मिक भावनाओं से जुड़े तत्वों को शामिल किया गया है। इसे बनाने वाले कलाकारों का उद्देश्य ऐसी राखी तैयार करना था जो केवल सजावट की वस्तु न होकर आस्था और पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दे।
शांता और भगवान राम का रिश्ता
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार माता शांता भगवान राम की बड़ी बहन थीं। कहा जाता है कि राजा दशरथ की पुत्री शांता का पालन-पोषण राजा रोमपद के यहां हुआ था। रामायण से जुड़ी कई कथाओं में उनका उल्लेख मिलता है। भले ही भगवान राम की कथा में शांता का वर्णन सीमित रूप से मिलता है, लेकिन कई परंपराओं में उन्हें राम परिवार का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। इसी भाव के साथ रक्षाबंधन पर रामलला के लिए यह विशेष राखी भेजी गई है।
अयोध्या में रक्षाबंधन की तैयारियां
राम मंदिर में रक्षाबंधन को लेकर विशेष तैयारियां की जा रही हैं। बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस पावन अवसर पर रामलला के दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंच रहे हैं। मंदिर प्रशासन की ओर से भक्तों की सुविधा और व्यवस्था को लेकर विशेष इंतजाम किए जा रहे हैं। रक्षाबंधन के दिन रामलला के श्रृंगार और पूजा में भी विशेष परंपराओं का पालन किया जाएगा।
आस्था के साथ पर्यावरण का संदेश
धान और केले के रेशों से बनी यह राखी धार्मिक भावनाओं के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी देती है। आज के समय में जहां बाजार में प्लास्टिक और सिंथेटिक सामग्री से बनी राखियों का चलन बढ़ा है, वहीं प्राकृतिक राखियां भारतीय परंपरा और प्रकृति के बीच संतुलन का उदाहरण पेश करती हैं। रामलला को भेजी गई यह अनोखी राखी श्रद्धालुओं के बीच आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। भक्त इसे भाई-बहन के पवित्र रिश्ते, आस्था और भारतीय संस्कृति के प्रतीक के रूप में देख रहे हैं।

Next Story