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कम पढ़ाई, बड़ा साइबर खेल! जालसाजों ने विदेशियों से ऐंठे अरबों रुपये

Lucknow लखनऊ : उत्तर प्रदेश पुलिस ने अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी के एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश किया है। राजधानी लखनऊ में शहीद पथ किनारे स्थित पॉश रिहायशी सोसाइटी ओमेक्स आर-2 में चल रहे एक फर्जी कॉल सेंटर से अमेरिकी नागरिकों को डिजिटल अरेस्ट और अन्य तरीकों से ठगने वाले गिरोह का खुलासा हुआ है। पुलिस के अनुसार, गिरोह ने पिछले छह महीनों में अमेरिकी नागरिकों से करीब 200 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी को अंजाम दिया है।
क्राइम ब्रांच, साइबर क्राइम सेल और स्थानीय पुलिस की संयुक्त टीम ने शुक्रवार तड़के ओमेक्स आर-2 के नौवें तल पर स्थित फ्लैटों में छापेमारी की। कार्रवाई के दौरान पुलिस ने गिरोह के सरगना समेत सात आरोपियों को गिरफ्तार किया। पकड़े गए आरोपियों में अधिकतर की शैक्षणिक योग्यता बेहद कम है। पुलिस के अनुसार, गिरोह में शामिल कई आरोपी सातवीं से दसवीं तक पढ़े हुए हैं, लेकिन तकनीकी तरीकों का इस्तेमाल कर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर साइबर अपराध कर रहे थे।
पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपियों ने सोसाइटी के चार फ्लैटों को अपना ठिकाना बना रखा था। यहां से अमेरिकी नागरिकों को फोन कर उन्हें डराया जाता था और अलग-अलग बहानों से पैसे ऐंठे जाते थे। आरोपी खुद को अमेरिकी जांच एजेंसियों, बैंक अधिकारियों या तकनीकी सहायता देने वाली कंपनियों का कर्मचारी बताकर लोगों को अपने जाल में फंसाते थे।
गिरोह के सदस्य डिजिटल अरेस्ट के नाम पर लोगों को धमकाते थे। वे पीड़ितों से कहते थे कि उनके नाम से अवैध गतिविधियां हुई हैं और अगर उन्होंने तुरंत पैसे जमा नहीं किए तो उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। डर के कारण कई लोग बड़ी रकम ट्रांसफर कर देते थे।
पुलिस को बरामद इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जांच में कई अहम सुराग मिले हैं। एक लैपटॉप से पता चला कि गिरोह ने एक अमेरिकी नागरिक से 70 हजार डॉलर, यानी भारतीय मुद्रा के हिसाब से करीब 70 लाख रुपये की ठगी की थी। इसके अलावा कंप्यूटर, लैपटॉप, मोबाइल फोन, डेटा शीट और अन्य डिजिटल सामग्री भी बरामद की गई है।
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, गिरोह अमेरिकी दफ्तरों के समय के अनुसार अपना कॉल सेंटर संचालित करता था। आरोपी वहां के समय और कामकाज की जानकारी के आधार पर पीड़ितों को कॉल करते थे, जिससे उन्हें बातचीत के दौरान शक न हो। रोजाना करीब 10 से 12 लोगों को निशाना बनाया जाता था।
जांच में यह भी सामने आया है कि गिरोह के सदस्य लंबे समय से इस तरह की वारदातों को अंजाम दे रहे थे। पुलिस अब आरोपियों के बैंक खातों, डिजिटल लेनदेन और विदेशों से जुड़े संपर्कों की जांच कर रही है। अधिकारियों को आशंका है कि इस नेटवर्क में और भी कई लोग शामिल हो सकते हैं।
गिरफ्तार आरोपियों में अहमदाबाद निवासी गिरोह का सरगना पुनीत कुमार वर्मा भी शामिल है। पुलिस अब उससे पूछताछ कर गिरोह के पूरे नेटवर्क और ठगी से जुड़े अन्य लोगों की जानकारी जुटा रही है।
उत्तर प्रदेश पुलिस का कहना है कि साइबर अपराधियों के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जा रहा है। डिजिटल अरेस्ट जैसे नए तरीकों से होने वाली ठगी को रोकने के लिए साइबर टीमों को विशेष निगरानी के निर्देश दिए गए हैं। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान कॉल पर डरकर पैसे ट्रांसफर न करें और संदिग्ध गतिविधि की तुरंत शिकायत करें।





