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छावनी क्षेत्र में तेंदुए की दहशत, स्कूल परिसर और बंगले में लगाए पिंजरे

वाराणसी। उत्तर प्रदेश के वाराणसी जिले के छावनी क्षेत्र में पिछले कई दिनों से तेंदुए जैसे वन्यजीव की मौजूदगी की खबरों ने स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ा दी है। बंगला नंबर 61 और सेंट मेरीज कॉन्वेंट स्कूल के आसपास जानवर देखे जाने की सूचनाओं के बाद वन विभाग ने सतर्कता बढ़ा दी है। विभाग की ओर से संवेदनशील स्थानों पर पिंजरे लगाए गए हैं और वनकर्मियों को लगातार निगरानी करने के निर्देश दिए गए हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, पिंजरों में बकरी को चारे के रूप में रखा गया है, ताकि संदिग्ध वन्यजीव के पहुंचने पर उसे सुरक्षित पकड़ा जा सके। हालांकि वन विभाग को अभी तक तेंदुए की मौजूदगी का कोई ठोस प्रमाण नहीं मिला है। इसके बावजूद सुरक्षा के मद्देनजर तलाशी अभियान और निगरानी जारी रखी गई है। स्थानीय लोगों में भय का माहौल बना हुआ है और बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए छावनी क्षेत्र के दो विद्यालयों में पढ़ाई भी प्रभावित हुई है।
जानकारी के अनुसार, वाराणसी के छावनी क्षेत्र में पिछले सप्ताह से तेंदुआ दिखाई देने की लगातार सूचनाएं सामने आ रही हैं। सबसे पहले सेंट मेरीज कॉन्वेंट स्कूल परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरे में एक बड़े जानवर की तस्वीर दिखाई देने की जानकारी मिली थी। इसके बाद परिसर में तेंदुआ होने की आशंका जताई गई।
स्कूल परिसर में संदिग्ध वन्यजीव के दिखाई देने की खबर के बाद वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और आसपास के क्षेत्रों की तलाशी शुरू की। अधिकारियों ने परिसर में लगे कैमरों की तस्वीरों की जांच करने के साथ संभावित ठिकानों की तलाश की। हालांकि शुरुआती जांच में तेंदुए की मौजूदगी की पुष्टि नहीं हो सकी।
इसके बाद छावनी क्षेत्र के अन्य हिस्सों से भी इसी तरह की सूचनाएं मिलने लगीं। स्थानीय लोगों ने 39 जीटीसी परिसर, नदेसर और आसपास के कुछ इलाकों में तेंदुए जैसे जानवर को देखने का दावा किया। इन सूचनाओं के आधार पर वन विभाग ने अपने तलाशी अभियान का दायरा बढ़ा दिया।
वन विभाग ने बंगला नंबर 61 और सेंट मेरीज स्कूल सहित संवेदनशील स्थानों पर विशेष निगरानी की व्यवस्था की है। संदिग्ध वन्यजीव को पकड़ने के लिए पिंजरों का उपयोग किया जा रहा है। अधिकारियों का प्रयास है कि यदि क्षेत्र में वास्तव में तेंदुआ मौजूद है, तो उसे बिना किसी जनहानि के सुरक्षित पकड़ लिया जाए।
इस दौरान वनकर्मियों को नियमित रूप से क्षेत्र में भ्रमण करने और संभावित ठिकानों पर नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं। घनी झाड़ियों, खाली स्थानों और कम आवाजाही वाले इलाकों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
वन्यजीव की तलाश के लिए विभाग ने तीन टीमों को लगाया है। प्रत्येक टीम में पांच विशेषज्ञों को शामिल किए जाने की जानकारी सामने आई है। टीमों ने सेंट मेरीज स्कूल, 39 जीटीसी और नदेसर के विभिन्न हिस्सों में जांच की।
इसके अलावा गोरखपुर से पशु चिकित्सा विशेषज्ञों की टीम भी बुलाई गई है। जरूरत पड़ने पर वन्यजीव को बेहोश करके सुरक्षित पकड़ने की तैयारी की गई है। हालांकि किसी भी वन्यजीव को ट्रैंकुलाइज करने से पहले उसकी सही पहचान और मौजूदगी की पुष्टि आवश्यक होती है।
छावनी क्षेत्र में लगातार फैल रही खबरों का असर स्थानीय लोगों की दिनचर्या पर भी पड़ रहा है। कई परिवार बच्चों को अकेले बाहर भेजने से बच रहे हैं। शाम और रात के समय सुनसान इलाकों से गुजरने को लेकर भी लोग सतर्क हो गए हैं।
सबसे अधिक चिंता विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों की सुरक्षा को लेकर सामने आई है। सेंट मेरीज कॉन्वेंट स्कूल परिसर में संदिग्ध जानवर की तस्वीर सामने आने के बाद विद्यालय प्रबंधन ने एहतियातन स्कूल बंद करने का निर्णय लिया।
इसके बाद छावनी परिषद के विद्यालय को भी बंद रखा गया। सेंट मेरीज स्कूल में बच्चों की पढ़ाई जारी रखने के लिए ऑनलाइन कक्षाओं की व्यवस्था की गई है।
अभिभावकों का कहना है कि वन्यजीव की मौजूदगी की आशंका दूर होने तक बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। वहीं, लगातार स्कूल बंद रहने से विद्यार्थियों की नियमित शैक्षणिक गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं।
वन विभाग के सामने सबसे बड़ी चुनौती संदिग्ध वन्यजीव की वास्तविक पहचान और उसके संभावित ठिकाने का पता लगाना है। कई दिनों से तलाशी अभियान चलाए जाने के बावजूद अभी तक तेंदुए के स्पष्ट पदचिह्न या अन्य निर्णायक साक्ष्य सामने नहीं आए हैं।
वन क्षेत्राधिकारी संजय कुमार के अनुसार, सेंट मेरीज स्कूल, 39 जीटीसी और नदेसर क्षेत्र में जांच के दौरान कुछ छोटे जानवरों के पदचिह्न मिले हैं। हालांकि उन्हें तेंदुए के निशान के रूप में प्रमाणित नहीं किया जा सका।
अधिकारियों का कहना है कि जब तक यह स्पष्ट नहीं हो जाता कि क्षेत्र में कौन-सा जानवर दिखाई दिया था, तब तक सतर्कता जारी रखी जाएगी।
वन विभाग की टीम संदिग्ध वन्यजीव के संभावित रास्तों और ठिकानों पर भी निगरानी कर रही है। इसके लिए स्थानीय लोगों से मिली सूचनाओं की जांच की जा रही है।
इस बीच सोशल मीडिया पर भी तेंदुए से संबंधित कई तस्वीरें और संदेश प्रसारित हो रहे हैं। इनकी सत्यता स्पष्ट नहीं होने के कारण अधिकारियों ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान नहीं देने की अपील की है।
वन विभाग का कहना है कि किसी भी संदिग्ध जानवर के दिखाई देने पर नागरिक तुरंत संबंधित अधिकारियों को सूचना दें। बिना पुष्टि के तस्वीरें और संदेश साझा करने से अनावश्यक भय फैल सकता है।
स्थानीय लोगों की ओर से कुछ स्थानों पर तलाशी अभियान को और व्यापक बनाने की मांग की गई है। विशेष रूप से बंगला नंबर 42, 43, 54 और 61 के आसपास मौजूद घनी झाड़ियों में सघन जांच की आवश्यकता बताई जा रही है।
निवासियों का कहना है कि छावनी क्षेत्र में कई ऐसे स्थान हैं, जहां घनी झाड़ियों और कम मानवीय गतिविधियों के कारण किसी वन्यजीव के छिपने की संभावना हो सकती है। हालांकि इन स्थानों पर तेंदुआ मौजूद होने का प्रमाण सामने नहीं आया है।
गुरुवार, 29 अक्टूबर को लगातार बारिश होने के कारण वन विभाग का तलाशी अभियान प्रभावित हुआ। खराब मौसम के कारण कई स्थानों पर जमीनी जांच नहीं हो सकी। इसके बावजूद संवेदनशील क्षेत्रों में तैनात वनकर्मियों को निगरानी जारी रखने के निर्देश दिए गए।
वाराणसी की प्रभागीय वनाधिकारी निधि चौहान के अनुसार, चिन्हित क्षेत्रों में चौबीस घंटे निगरानी की व्यवस्था की गई है। लोगों से सतर्क रहने और बिना आवश्यकता सुनसान स्थानों पर नहीं जाने की अपील की गई है।
वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, तेंदुआ सामान्यतः मनुष्यों से दूरी बनाए रखने का प्रयास करता है। हालांकि अचानक आमना-सामना होने या जानवर के घिर जाने की स्थिति में खतरा उत्पन्न हो सकता है।
ऐसे में नागरिकों को विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता है। यदि किसी स्थान पर तेंदुआ या उससे मिलता-जुलता जानवर दिखाई दे, तो उसके नजदीक जाने, उसे घेरने या पकड़ने का प्रयास नहीं करना चाहिए।
फोटो और वीडियो बनाने के लिए वन्यजीव का पीछा करना भी खतरनाक हो सकता है। बच्चों को अकेले झाड़ियों और सुनसान स्थानों पर जाने से रोकना चाहिए। किसी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी मिलने पर वन विभाग या आपातकालीन सहायता नंबर 112 पर सूचना दी जा सकती है।
वन विभाग के लिए इस मामले में लोगों की सुरक्षा के साथ वन्यजीव की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी आवश्यक है। यदि वास्तव में तेंदुआ मौजूद है, तो उसे सुरक्षित तरीके से पकड़ना या उपयुक्त प्राकृतिक आवास की ओर जाने देना विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में किया जाना चाहिए।
फिलहाल वाराणसी के छावनी क्षेत्र में वन विभाग की टीमें लगातार निगरानी कर रही हैं। बंगला नंबर 61, सेंट मेरीज स्कूल और 39 जीटीसी जैसे संवेदनशील स्थानों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
कई दिनों की जांच के बाद भी तेंदुए की मौजूदगी प्रमाणित नहीं होने से स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। ऐसे में प्रशासन ने लोगों से संयम बनाए रखने, अफवाहों से बचने और सुरक्षा संबंधी निर्देशों का पालन करने की अपील की है।





