उत्तर प्रदेश

अहंकार छोड़ गुरु की शरण में आएं, मुनि अनुपम सागर ने बताया आत्मकल्याण का मार्ग

Ratna Netam
15 July 2026 8:58 PM IST
अहंकार छोड़ गुरु की शरण में आएं, मुनि अनुपम सागर ने बताया आत्मकल्याण का मार्ग
x

Khatauli खतौली : खतौली (मुजफ्फरनगर)। जक्की वाला स्थित श्री दिगंबर जैन मंदिर में बुधवार को भव्य एवं आध्यात्मिक धर्मसभा का आयोजन किया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया और पूज्य मुनि श्री 108 अनुपम सागर जी महाराज के प्रवचन का लाभ प्राप्त किया। धर्मसभा में मुनि श्री ने गुरु-शिष्य परंपरा के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि मानव जीवन को सही दिशा देने में गुरु की भूमिका सर्वोपरि होती है।

मुनि श्री अनुपम सागर जी महाराज ने अपने प्रवचन में कहा कि गुरु की असीम कृपा और उनका कुशल मार्गदर्शन ही व्यक्ति को जीवन के वास्तविक उद्देश्य तक पहुंचाता है। उन्होंने कहा कि योग्य गुरु का सान्निध्य मिलने से व्यक्ति भटकाव से बचता है और आत्मकल्याण के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा प्राप्त करता है।

उन्होंने कहा कि गुरु केवल शास्त्रों का ज्ञान देने वाले शिक्षक नहीं होते, बल्कि वे जीवन जीने की सही कला सिखाते हैं। गुरु अपने शिष्य के भीतर मौजूद अज्ञान रूपी अंधकार को ज्ञान के प्रकाश से दूर करते हैं और उसके जीवन में विवेक, संयम और सदाचार का दीप प्रज्वलित करते हैं।

मुनि श्री ने ज्ञान और अज्ञान के अंतर को समझाते हुए कहा कि केवल पुस्तकों का अध्ययन कर लेना ही पर्याप्त नहीं है। वास्तविक ज्ञान वह है, जो व्यक्ति के आचरण और व्यवहार में दिखाई दे। गुरु अपने अनुभव और तपस्या के माध्यम से शिष्य को जीवन के उन मूल्यों से परिचित कराते हैं, जो उसे आत्मिक उन्नति की ओर ले जाते हैं।

उन्होंने कहा कि सच्चे शिष्य का सबसे बड़ा कर्तव्य अपने गुरु के प्रति श्रद्धा, विनम्रता और समर्पण का भाव रखना है। जिस व्यक्ति के मन में गुरु के प्रति विश्वास और सम्मान होता है, उसके जीवन में ज्ञान का मार्ग स्वतः खुलने लगता है। वहीं अहंकार और अविश्वास व्यक्ति की प्रगति में बाधा बनते हैं।

धर्मसभा के दौरान मुनि श्री ने कहा कि गुरु का स्थान जीवन में अत्यंत ऊंचा होता है। गुरु केवल मार्ग दिखाने का कार्य नहीं करते, बल्कि शिष्य को उस मार्ग पर चलने की शक्ति और प्रेरणा भी प्रदान करते हैं। उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि वे अपने जीवन में अच्छे संस्कारों को अपनाएं और धर्म, संयम तथा सत्य के मार्ग पर चलें।

कार्यक्रम में मौजूद श्रद्धालुओं ने मुनि श्री के प्रवचनों को ध्यानपूर्वक सुना और उनके विचारों से प्रेरणा ली। मंदिर परिसर में पूरे समय आध्यात्मिक वातावरण बना रहा। श्रद्धालुओं ने मुनि श्री से आशीर्वाद प्राप्त कर धर्म मार्ग पर आगे बढ़ने का संकल्प लिया।

धर्मसभा के अंत में मंदिर समिति की ओर से मुनि श्री का सम्मान किया गया और सभी श्रद्धालुओं के लिए मंगलकामना की गई। आयोजन को सफल बनाने में मंदिर समिति के पदाधिकारियों और जैन समाज के लोगों का विशेष योगदान रहा।

Next Story