उत्तर प्रदेश

रिफाह-ए-आम क्लब को अतिक्रमण मुक्त करने एलडीए ने चलाया बुलडोजर

SHIDDHANT
27 Aug 2025 12:26 AM IST
रिफाह-ए-आम क्लब को अतिक्रमण मुक्त करने एलडीए ने चलाया बुलडोजर
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LUCKNOW लखनऊ: ऐतिहासिक रिफाह-ए-आम क्लब को अतिक्रमण से मुक्त कराने के लिए लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) ने मंगलवार को बड़ी कार्रवाई की। भारी पुलिस बल और बुलडोजरों के साथ एलडीए की टीम क्लब परिसर में पहुंची और अवैध रूप से बने दुकानों और मकानों को ध्वस्त कर दिया। कार्रवाई के दौरान कुछ दुकानदारों और स्थानीय लोगों ने विरोध जताया, लेकिन प्रशासन की सख्ती के कारण विरोध बेअसर रहा।एलडीए के अपर सचिव ज्ञानेंद्र वर्मा ने बताया कि 2.18 लाख वर्गफीट में फैला रिफाह-ए-आम क्लब नजूल संपत्ति है। इसे 1886 में 99 साल की लीज पर आवंटित किया गया था, जो 1985 में समाप्त हो गई। इसके बाद क्लब एलडीए को सौंप दिया गया। वर्तमान में भवन का बड़ा हिस्सा जर्जर हो चुका है। एलडीए उपाध्यक्ष के पूर्व निरीक्षण के बाद इसे विकसित करने के लिए प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए गए थे।

कायाकल्प और विकास योजना क्लब परिसर को हेरिटेज लुक वाली बाउंड्रीवॉल से सुरक्षित किया जाएगा, जिससे इसकी ऐतिहासिक सुंदरता और संरचना बनी रहे। साथ ही, सड़कों, पाथ-वे, हॉर्टीकल्चर और लाइटिंग जैसे कार्य भी किए जाएंगे। क्लब को पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल पर संचालित करने की योजना है, जिसके लिए जल्द टेंडर जारी किए जाएंगे। इस विकास के बाद लखनऊवासियों को मैरेज लॉन, कैफेटेरिया और स्पोर्ट्स जैसी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध होंगी।अवैध कब्जों पर बुलडोजर कार्रवाई एलडीए के अनुसार, क्लब के कुछ हिस्सों पर 22 दुकानदारों और कुछ परिवारों ने अवैध कब्जा कर रखा था। एलडीए ने 25 अगस्त तक कब्जा हटाने की चेतावनी दी थी, लेकिन अनुपालन न होने पर मंगलवार को बुलडोजर से कार्रवाई की गई। विस्थापित परिवारों के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवास आवंटित करने के निर्देश भी दिए गए हैं, ताकि उन्हें किसी प्रकार की परेशानी न हो।

रिफाह-ए-आम क्लब का ऐतिहासिक महत्व रिफाह-ए-आम क्लब की स्थापना 19वीं सदी में हुई थी, जब अंग्रेजों के एमबी क्लब में भारतीय रजवाड़ों के प्रवेश पर रोक थी। उस समय ‘Indians and Dogs are Not Allowed’ का अपमानजनक बोर्ड लगा था। इससे आहत होकर ओयल, महमूदाबाद और मनकापुर एस्टेट के राजाओं ने 1860 में कैसरबाग में रिफाह-ए-आम क्लब की स्थापना की। यह क्लब लखनऊ की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहर का प्रतीक है।एलडीए की यह कार्रवाई क्लब को अतिक्रमण से मुक्त करने और इसके पुनर्विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। इसके पुनर्निर्माण के बाद यह स्थल न केवल लखनऊवासियों के लिए एक नया सांस्कृतिक और सुविधा केंद्र बनेगा, बल्कि शहर की ऐतिहासिक पहचान को भी बनाए रखने में सहायक होगा।

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