उत्तर प्रदेश

खलीलाबाद तहसील में भ्रष्टाचार के आरोपों पर भड़के वकील

Kavita2
3 Nov 2026 5:25 PM IST
खलीलाबाद तहसील में भ्रष्टाचार के आरोपों पर भड़के वकील
x

संतकबीरनगर। उत्तर प्रदेश के संतकबीरनगर जिले में खलीलाबाद तहसील की कार्यप्रणाली को लेकर अधिवक्ताओं का आक्रोश सामने आया है। मंगलवार को बड़ी संख्या में अधिवक्ताओं ने कलेक्ट्रेट परिसर में विरोध प्रदर्शन करते हुए तहसील के अधिकारियों और कर्मचारियों पर गंभीर आरोप लगाए। प्रदर्शन के बाद अधिवक्ताओं ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को संबोधित मांगों का ज्ञापन जिलाधिकारी अनुज मलिक को सौंपा। अधिवक्ताओं का आरोप है कि खलीलाबाद तहसील में राजस्व संबंधी मामलों का समय से निस्तारण नहीं किया जा रहा है। इससे आम नागरिकों को परेशानी हो रही है और न्यायिक प्रक्रिया पर भी सवाल उठ रहे हैं। अधिवक्ताओं ने चेतावनी दी कि समस्याओं का जल्द समाधान नहीं होने पर वे धरना-प्रदर्शन करने के लिए बाध्य होंगे।

प्रदर्शनकारी अधिवक्ताओं ने कहा कि खलीलाबाद तहसील में अधिकारियों और कर्मचारियों की कार्यशैली से वादकारी परेशान हैं। उनका आरोप है कि कई राजस्व मामलों की पत्रावलियां महीनों तक कार्यालयों में पड़ी रहती हैं, लेकिन उन पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं होती। अधिवक्ता लगातार पैरवी करते रहते हैं, इसके बावजूद संबंधित मामलों के निस्तारण में अनावश्यक देरी होती है।

अधिवक्ताओं का कहना है कि राजस्व न्यायालयों में लंबित मामलों के कारण आम लोगों को बार-बार तहसील के चक्कर लगाने पड़ते हैं। जमीन संबंधी विवाद, दाखिल-खारिज और अन्य राजस्व मामलों को लेकर पहुंचने वाले लोगों को समय से राहत नहीं मिल पाती। इससे उनका समय और पैसा दोनों खर्च होते हैं।

ज्ञापन में अधिवक्ताओं ने तहसील परिसर में कथित दलालों की सक्रियता का मुद्दा भी उठाया। उनका आरोप है कि जब वादकारी लंबे समय तक अपने मामलों के निस्तारण के लिए परेशान होते हैं, तो कुछ लोग जल्दी काम कराने का भरोसा देकर उनसे संपर्क करते हैं। अधिवक्ताओं का दावा है कि ऐसे लोगों के माध्यम से कुछ काम अपेक्षाकृत जल्दी हो जाते हैं, जबकि सामान्य प्रक्रिया से आवेदन करने वालों को इंतजार करना पड़ता है।

हालांकि, अधिवक्ताओं द्वारा लगाए गए भ्रष्टाचार और दलालों की सक्रियता के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों का पक्ष भी उपलब्ध विवरण में सामने नहीं आया है। इन आरोपों की वास्तविकता प्रशासनिक जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

प्रदर्शन में शामिल अधिवक्ताओं ने कहा कि राजस्व न्यायालय आम लोगों को न्याय दिलाने की महत्वपूर्ण व्यवस्था है। यहां जमीन, संपत्ति और अन्य राजस्व संबंधी मामलों की सुनवाई होती है। ऐसे में यदि पत्रावलियों के निस्तारण में अनावश्यक देरी होती है, तो इसका सीधा असर न्याय की उम्मीद लेकर आने वाले लोगों पर पड़ता है।

अधिवक्ताओं का कहना है कि तहसील में कामकाज पारदर्शी और समयबद्ध होना चाहिए। प्रत्येक मामले में नियमानुसार सुनवाई होनी चाहिए और संबंधित आदेश निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार पारित किए जाने चाहिए। इससे न केवल वादकारियों को राहत मिलेगी, बल्कि राजस्व न्यायालयों के प्रति जनता का विश्वास भी मजबूत होगा।

प्रदर्शनकारियों ने यह भी आरोप लगाया कि लंबे समय से लंबित पत्रावलियों के कारण अधिवक्ताओं की छवि प्रभावित हो रही है। जब किसी मामले में लगातार तारीखें पड़ती हैं और उसका समाधान नहीं होता, तो वादकारी अपने अधिवक्ता से भी सवाल करने लगते हैं। अधिवक्ताओं का तर्क है कि प्रशासनिक स्तर पर होने वाली देरी से न्यायिक प्रक्रिया में शामिल सभी पक्षों की विश्वसनीयता प्रभावित होती है।

अधिवक्ताओं ने मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन में खलीलाबाद तहसील की समस्याओं का संज्ञान लेने की मांग की। उन्होंने कहा कि संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की कार्यप्रणाली की समीक्षा की जानी चाहिए। साथ ही लंबित राजस्व मामलों के निस्तारण के लिए प्रभावी व्यवस्था बनाई जानी चाहिए, ताकि लोगों को अनावश्यक परेशानी न उठानी पड़े।

इस मामले में जिलाधिकारी अनुज मलिक को ज्ञापन सौंपे जाने के बाद अब प्रशासन के अगले कदम पर अधिवक्ताओं की नजर है। अधिवक्ताओं ने उम्मीद जताई है कि जिला प्रशासन उनकी शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए समस्याओं के समाधान की दिशा में पहल करेगा।

खलीलाबाद तहसील में अधिवक्ताओं और प्रशासन के बीच कार्यप्रणाली को लेकर विवाद पहले भी सामने आते रहे हैं। अगस्त 2026 में भी अधिवक्ताओं ने तहसीलदार के खिलाफ विरोध जताते हुए तबादले की मांग की थी। मई 2026 में एसडीएम पर अभद्रता का आरोप लगाते हुए अधिवक्ताओं ने न्यायिक कार्य के बहिष्कार का मुद्दा उठाया था। ये पूर्व घटनाएं मौजूदा शिकायतों की पुष्टि नहीं करतीं, लेकिन तहसील प्रशासन और अधिवक्ताओं के बीच लंबे समय से चले आ रहे तनाव को दर्शाती हैं।

राजस्व मामलों के निस्तारण में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए ऑनलाइन व्यवस्थाएं भी उपलब्ध हैं। संतकबीरनगर जिला प्रशासन की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, राजस्व न्यायालयों में चल रहे मामलों की सुनवाई की तारीख और आदेश जैसी जानकारी ऑनलाइन देखी जा सकती है। ऐसी व्यवस्था का प्रभावी उपयोग वादकारियों को उनके मामलों की स्थिति जानने में मदद कर सकता है।

अधिवक्ताओं का कहना है कि केवल ऑनलाइन जानकारी उपलब्ध होना पर्याप्त नहीं है। जरूरी यह भी है कि मामलों की सुनवाई और आदेश पारित करने की प्रक्रिया नियमित रूप से संचालित हो। यदि किसी पत्रावली में अनावश्यक देरी हो रही है, तो उसके कारणों की समीक्षा की जानी चाहिए।

इस पूरे विवाद का सबसे महत्वपूर्ण पहलू आम नागरिकों की परेशानी है। राजस्व न्यायालयों में आने वाले अनेक मामले जमीन और पारिवारिक संपत्ति से जुड़े होते हैं। ऐसे मामलों के लंबे समय तक लंबित रहने से संबंधित पक्षों के बीच तनाव बढ़ सकता है। आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के लिए बार-बार तहसील पहुंचना अतिरिक्त बोझ बन जाता है।

अधिवक्ताओं ने प्रशासन से मांग की है कि तहसील की कार्यप्रणाली में सुधार लाया जाए और कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच कराई जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि उनकी शिकायतों पर जल्द ध्यान नहीं दिया गया, तो आंदोलन को और तेज किया जा सकता है।

फिलहाल खलीलाबाद तहसील के अधिवक्ताओं के प्रदर्शन के बाद मामला जिला प्रशासन के संज्ञान में पहुंच गया है। अब देखना होगा कि शिकायतों पर क्या कदम उठाए जाते हैं और राजस्व न्यायालयों में लंबित मामलों के निस्तारण के लिए कौन-सी व्यवस्था अपनाई जाती है।

Next Story