उत्तर प्रदेश

19 साल बाद बदलेगी जमीन व्यवस्था, फर्जी पट्टों पर कार्रवाई शुरू

Saba Naaz
11 July 2026 2:32 PM IST
19 साल बाद बदलेगी जमीन व्यवस्था, फर्जी पट्टों पर कार्रवाई शुरू
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बहजोई (संभल)। फर्जी पट्टा आवंटन और भूमि अभिलेखों में हेरफेर के मामलों को लेकर संभल जिले में प्रशासन ने जांच का दायरा बढ़ा दिया है। मंडलायुक्त के निर्देश के बाद जिले में हुए पुराने भूमि आवंटनों की भी व्यापक पड़ताल शुरू कर दी गई है। वहीं, गुन्नौर तहसील क्षेत्र के ग्राम पंचायत असदपुर के गांव दिल्लीपुर सुखेला में करीब 19 वर्षों से चल रही चकबंदी प्रक्रिया अब अंतिम चरण में पहुंच गई है।

चकबंदी विभाग ने गांव में धारा 52 की कार्रवाई पूरी करने की दिशा में तेजी शुरू कर दी है। इसके बाद गांव के संशोधित राजस्व रिकॉर्ड को तहसील प्रशासन को सौंपने की तैयारी की जा रही है। लंबे समय से लंबित चकबंदी प्रक्रिया पूरी होने से ग्रामीणों को जमीन संबंधी विवादों से राहत मिलने की उम्मीद है।

फर्जी पट्टा आवंटन प्रकरण सामने आने के बाद प्रशासन ने दिल्लीपुर सुखेला सहित अन्य क्षेत्रों में भूमि रिकॉर्ड की गहन जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का उद्देश्य यह पता लगाना है कि कहीं सरकारी जमीनों का नियमों के खिलाफ आवंटन तो नहीं किया गया या अभिलेखों में किसी प्रकार की गड़बड़ी तो नहीं की गई।

चकबंदी विभाग की टीम गांव में सरकारी भूमि, तालाब, चारागाह और अन्य आरक्षित जमीनों का नए सिरे से सत्यापन कर रही है। राजस्व अभिलेखों में दर्ज जानकारी का मौके की वास्तविक स्थिति से मिलान किया जा रहा है। अधिकारियों द्वारा यह भी जांच की जा रही है कि किसी व्यक्ति को गलत तरीके से भूमि का लाभ तो नहीं दिया गया।

जांच के दौरान यह भी देखा जा रहा है कि किसी व्यक्ति के नाम पर दोहरा रकबा तो दर्ज नहीं है या फिर राजस्व रिकॉर्ड में जानबूझकर किसी तरह की त्रुटि तो नहीं की गई। विभाग प्रत्येक प्रविष्टि की बारीकी से जांच कर रहा है, ताकि भविष्य में जमीन को लेकर किसी भी प्रकार का विवाद उत्पन्न न हो।

प्रशासन का कहना है कि फर्जी तरीके से भूमि आवंटन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। पुराने रिकॉर्ड की जांच से यह भी सामने आएगा कि वर्षों पहले किए गए भूमि आवंटनों में नियमों का पालन हुआ था या नहीं।

बताया जा रहा है कि कुछ मामलों में फर्जी प्रविष्टियां दर्ज कर भूमि की श्रेणी बदलने और आवंटन करने की शिकायतें सामने आई थीं। इन मामलों में कार्रवाई के बाद अब प्रशासन ने पूरे जिले में भूमि रिकॉर्ड की निगरानी बढ़ा दी है।

चकबंदी विभाग की कार्रवाई से ग्रामीणों में भी उम्मीद जगी है कि लंबे समय से चले आ रहे भूमि विवादों का समाधान हो सकेगा। अधिकारियों का कहना है कि पारदर्शी प्रक्रिया के तहत सभी रिकॉर्ड की जांच की जा रही है और किसी भी अनियमितता मिलने पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

दिल्लीपुर सुखेला में 19 साल बाद चकबंदी प्रक्रिया पूरी होने से जमीन के रिकॉर्ड व्यवस्थित होंगे और ग्रामीणों को अपने अधिकारों को लेकर स्पष्टता मिलेगी। प्रशासन की यह कार्रवाई फर्जी भूमि आवंटन पर रोक लगाने और राजस्व व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है।

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