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हाईस्पीड कॉरिडोर के लिए अलीगढ़ के 10 गांवों में जमीन सौदे पर रोक

अलीगढ़ : अलीगढ़ से मुरादाबाद के बीच प्रस्तावित हाईस्पीड एक्सेस कंट्रोल कॉरिडोर परियोजना को लेकर प्रशासन ने बड़ा फैसला लिया है। परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण और विकास कार्यों को सुचारु रूप से आगे बढ़ाने के उद्देश्य से अलीगढ़ जिले के 10 गांवों की जमीन की खरीद-फरोख्त पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई है। इस निर्णय के बाद संबंधित गांवों में न केवल जमीन की खरीद-बिक्री पर प्रतिबंध रहेगा, बल्कि नामांतरण, बंटवारा, उपहार विलेख, पट्टा, लीज और अन्य प्रकार के राजस्व अभिलेखों में बदलाव भी अगले आदेश तक नहीं किए जा सकेंगे।
प्रशासन के अनुसार यह निर्णय कोल और गभाना तहसील के अंतर्गत आने वाले उन गांवों पर लागू किया गया है, जिनकी भूमि प्रस्तावित हाईस्पीड एक्सेस कंट्रोल कॉरिडोर की जद में आ रही है। अधिकारियों का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य परियोजना से प्रभावित भूमि में किसी भी प्रकार की अनियमित खरीद-फरोख्त, फर्जी लेनदेन या मुआवजा प्राप्त करने के उद्देश्य से किए जाने वाले अवैध हस्तांतरण को रोकना है।
बताया जा रहा है कि अलीगढ़-मुरादाबाद हाईस्पीड एक्सेस कंट्रोल कॉरिडोर क्षेत्रीय संपर्क को बेहतर बनाने वाली एक महत्वपूर्ण आधारभूत संरचना परियोजना है। इस परियोजना के पूरा होने के बाद पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जिलों के बीच आवागमन तेज और सुगम होने की उम्मीद है। साथ ही औद्योगिक, व्यापारिक और आर्थिक गतिविधियों को भी नई गति मिलने की संभावना जताई जा रही है।
जिला प्रशासन ने संबंधित राजस्व अधिकारियों, तहसीलदारों और उप-पंजीयक कार्यालयों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि प्रतिबंधित गांवों में किसी भी प्रकार का भूमि पंजीकरण, नामांतरण या स्वामित्व परिवर्तन से जुड़ा कार्य बिना सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के न किया जाए। इसके अलावा राजस्व अभिलेखों में किसी भी बदलाव पर भी रोक रहेगी।
अधिकारियों का कहना है कि परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया प्रारंभ होने से पहले इस प्रकार की रोक लगाना एक सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया है। इससे यह सुनिश्चित किया जाता है कि भूमि का वास्तविक स्वामित्व सुरक्षित रहे और मुआवजा उसी व्यक्ति को मिले, जो अधिग्रहण की अधिसूचना जारी होने के समय वास्तविक मालिक हो।
इस निर्णय के बाद प्रभावित गांवों के किसानों और जमीन मालिकों के बीच चर्चा का माहौल है। कुछ लोग इसे विकास परियोजना के लिए आवश्यक कदम मान रहे हैं, जबकि कई किसानों ने भविष्य में मिलने वाले मुआवजे और भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया को लेकर अपनी जिज्ञासाएं व्यक्त की हैं। प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि भूमि अधिग्रहण से संबंधित सभी प्रक्रियाएं निर्धारित नियमों और कानूनों के अनुसार पूरी पारदर्शिता के साथ संपन्न की जाएंगी।
राजस्व विभाग के अधिकारियों ने बताया कि जिन गांवों पर प्रतिबंध लगाया गया है, वहां भूमि से संबंधित किसी भी प्रकार का नया लेनदेन स्वीकार नहीं किया जाएगा। यदि कोई व्यक्ति प्रतिबंध के बावजूद अवैध तरीके से खरीद-बिक्री करने का प्रयास करता है, तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि बड़ी आधारभूत संरचना परियोजनाओं में भूमि अधिग्रहण से पहले इस प्रकार की रोक लगाने का उद्देश्य भूमि की कृत्रिम खरीद-बिक्री और कीमतों में अनावश्यक वृद्धि को रोकना होता है। इससे सरकार को अधिग्रहण प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने में भी मदद मिलती है।
अलीगढ़-मुरादाबाद हाईस्पीड एक्सेस कंट्रोल कॉरिडोर परियोजना को क्षेत्र के विकास की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसके निर्माण से यात्रा का समय कम होने के साथ-साथ माल परिवहन भी अधिक तेज और सुविधाजनक हो सकेगा। इससे उद्योगों, व्यापार और निवेश को बढ़ावा मिलने की संभावना है। इसके अलावा आसपास के क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर भी सृजित होने की उम्मीद जताई जा रही है।
प्रशासन ने प्रभावित गांवों के लोगों से अपील की है कि वे किसी भी अफवाह पर ध्यान न दें और भूमि से संबंधित किसी भी जानकारी के लिए सीधे तहसील या जिला प्रशासन से संपर्क करें। अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया है कि परियोजना से जुड़े सभी निर्णय शासन के दिशा-निर्देशों और कानूनी प्रक्रिया के तहत ही लिए जाएंगे।
फिलहाल प्रशासन द्वारा लगाए गए इस प्रतिबंध के बाद संबंधित 10 गांवों में भूमि से जुड़े सभी प्रकार के लेनदेन पर रोक प्रभावी हो गई है। अब लोगों की निगाहें परियोजना की आगामी अधिसूचनाओं, भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया और मुआवजा नीति पर टिकी हैं। माना जा रहा है कि आने वाले समय में इस परियोजना को लेकर प्रशासन प्रभावित किसानों और स्थानीय लोगों के साथ बैठकें भी आयोजित कर सकता है, ताकि उन्हें पूरी प्रक्रिया की जानकारी दी जा सके और उनकी शंकाओं का समाधान किया जा सके।





