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- किशाऊ बांध से बढ़ेगी...

बिजनौर। केंद्र सरकार की पहल के बाद किशाऊ बांध परियोजना को लेकर छह राज्यों के बीच सहमति बनने की बात सामने आई है। इस परियोजना के पूरा होने के बाद जिले को भी पानी मिलने की संभावना जताई जा रही है। इससे क्षेत्र में सिंचाई व्यवस्था को मजबूती मिलने और किसानों को फायदा होने की उम्मीद है।
जिले में वर्तमान समय में किसानों की फसलों की सिंचाई मुख्य रूप से पूर्वी मध्य गंगा नहर, पीली बांध जलाशय और रामगंगा बांध कालागढ़ से की जाती है। हालांकि, कृषि क्षेत्र के विस्तार और पानी की बढ़ती जरूरतों को देखते हुए अतिरिक्त जल स्रोतों की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
किशाऊ बांध परियोजना को इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। परियोजना के तहत पानी उपलब्ध होने से किसानों को सिंचाई के लिए बेहतर सुविधा मिल सकती है। इससे खेती पर निर्भर लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है।
किसान अपनी फसलों की सिंचाई के लिए नलकूपों के साथ-साथ नहरों के पानी का भी इस्तेमाल करते हैं। नहरों से मिलने वाला पानी खेती के लिए काफी महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि इससे बड़ी संख्या में किसानों को कम लागत में सिंचाई सुविधा मिलती है।
जानकारी के अनुसार, गंगा नदी पर बने बैराज से मध्य गंगा नहर फेज-1 और फेज-2 निकलती हैं, लेकिन इन नहरों का पानी अभी जिले के किसानों तक नहीं पहुंचता है। ऐसे में किशाऊ बांध परियोजना से पानी मिलने की संभावना किसानों के लिए बड़ी उम्मीद के रूप में देखी जा रही है।
इसके अलावा शारदा-यमुना-साबरमती लिंक नहर परियोजना के लिए भी जिले में सर्वे किया जा चुका है। इस परियोजना को लेकर भी लंबे समय से संभावनाएं तलाशी जा रही हैं। यदि इन योजनाओं को धरातल पर उतारा जाता है तो जिले की सिंचाई क्षमता में बड़ा सुधार हो सकता है।
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, पर्याप्त जल उपलब्ध होने से किसान एक से अधिक फसल लेने में सक्षम हो सकते हैं। इससे उत्पादन बढ़ने के साथ-साथ किसानों की आय में भी सुधार की संभावना रहती है।
किशाऊ बांध परियोजना को लेकर छह राज्यों के बीच सहमति बनने के बाद अब आगे की प्रक्रिया पर नजर है। परियोजना से जुड़े तकनीकी, वित्तीय और प्रशासनिक पहलुओं पर काम किया जाना है।
स्थानीय किसानों का कहना है कि सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध होना खेती की सबसे बड़ी जरूरत है। कई बार बारिश कम होने की स्थिति में किसानों को नलकूपों पर निर्भर रहना पड़ता है, जिससे लागत बढ़ जाती है। नहरों के माध्यम से पानी मिलने पर उन्हें काफी राहत मिल सकती है।
जल परियोजनाएं केवल सिंचाई तक सीमित नहीं होतीं, बल्कि इनके माध्यम से पेयजल और अन्य जरूरतों को भी पूरा करने में मदद मिलती है। हालांकि, ऐसी परियोजनाओं को पूरा करने में कई चरणों से गुजरना पड़ता है।
प्रशासन और संबंधित विभागों की ओर से इन परियोजनाओं को लेकर आगे की कार्रवाई की जाएगी। किसानों को उम्मीद है कि किशाऊ बांध परियोजना से जिले को मिलने वाला संभावित पानी जल्द ही सिंचाई व्यवस्था को बेहतर बनाएगा।
फिलहाल जिले के किसान इस परियोजना को लेकर आशान्वित हैं। यदि योजना के तहत पानी की उपलब्धता सुनिश्चित होती है तो कृषि क्षेत्र को नई दिशा मिल सकती है और किसानों को सिंचाई के लिए अतिरिक्त विकल्प मिलेंगे।





