उत्तर प्रदेश

Kaushambi: महाविद्यालय में जागरूकता अभियान शुरू

Admindelhi1
23 Sept 2025 10:17 AM IST
Kaushambi: महाविद्यालय में जागरूकता अभियान शुरू
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कौशाम्बी: जिले के राजकीय महाविद्यालय सिराथू, कौशाम्बी में 22 दिसंबर 2025 महाविद्यालय के प्राचार्य, प्रोफ़ेसर संजय प्रसाद शर्मा के कुशल निर्देशन में “मिशन शक्ति के पांचवें संस्करण” के तहत विभिन्न कार्यक्रम चलाया जा रहा है जिसके अन्तर्गत प्रतिदिन नारी सुरक्षा, सम्मान एवं स्वावलंबन से संबंधित आयोजन संचालित किये जा रहे हैं। इसी के तहत 22 सितम्बर 2025 को महाविद्यालय के प्राचार्य, प्रोफ़ेसर संजय प्रसाद शर्मा द्वारा सभी छात्र-छात्राओं को देश के निर्माण में उनकी भूमिका के महत्व को बताया गया। उन्होंने बताया कि आधुनिकतावाद के इस दौर में जहां एक तरफ़ इन्सान बेरोज़गारी, भूख, ग़रीबी, और मानसिक अवसाद से जूझ रहा है, तो वहीं दूसरी तरफ़ उसे हमेशा की तरह अपने आत्मसम्मान व आत्मरक्षा की चिन्ता भी बनी हुई है।

अन्य भारतीयों की तरह नारी समाज भी इससे अछूता नहीं है। हम नारी सुरक्षा, सम्मान व स्वावलम्बन के फ़िक्रमन्द तो हुए हैं लेकिन क्या हमारा समाज उन्हें वह सुरक्षा कवच दे पाया है जिसका वे वास्तव में हक़दार हैं? उत्तर है, शायद नहीं। हम आये दिन देखते हैं कि हमारी लड़कियों और महिलाओं पर शारीरिक हमले( फिजिकल वायलेंस) व साइबर हमले( साइबर वायलेंस) होते रहते हैं। इन्हीं सारे सवालों का हल ढूँढने के लिये और हमारी बहू-बेटियों को सुरक्षा मुहैया कराने के लिये केन्द्र सरकार के निर्देश पूरे देश में मिशन शक्ति जैसी योजनायें चलाई जा रही हैं। भारत सरकार व उत्तर प्रदेश सरकार के निर्देश पर राजकीय महाविद्यालय सिराथू, में आज नारीवाद के तहत महिला सशक्तिकरण के विषय में विस्तारपूर्वक बताया गया। उनको समझाया गया कि पुरुषों और महिलाओं के बीच राजनीतिक, आर्थिक, व्यक्तिगत और सामाजिक समानता होनी चाहिये। लैंगिक शोषण को समाप्त किया जाना चाहिए क्योंकि इसका उद्देश्य समाज में महिलाओं के साथ होने वाले किसी भी प्रकार के उत्पीड़न और भेदभाव को समाप्त करना है। महिलाओं के अधिकारों को बढ़ावा देना एक सभ्य समाज की निशानी है। प्रजनन अधिकार, मतदान अधिकार, वेतन समानता और शिक्षा जैसे महिलाओं के अधिकारों को सुरक्षित और विस्तारित किया जाना भी बहुत जरूरी है।

नारीवाद के प्रमुख उद्देश्यों में समाज में बदलाव लाना भी शामिल है। यह पितृसत्तात्मक सोच को चुनौती देता है, जहाँ अक्सर पुरुष दृष्टिकोण को प्राथमिकता दी जाती है, और एक ऐसे समाज की स्थापना करता है जो सभी के लिए न्यायपूर्ण और समावेशी हो। अंतर्संबंध के सम्बन्ध में बताया गया कि नारीवाद यह भी स्वीकार करता है कि महिलाओं के अनुभव उनके लिंग के अलावा नस्ल, वर्ग, यौन अभिविन्यास और अन्य पहचानों से भी प्रभावित होते हैं, जिससे उनके सामने आने वाली बाधाएँ अधिक जटिल हो जाती हैं। कार्यक्रम का संचालन डॉ० जसविन्दर कोर ने किया। इस अवसर पर महाविद्यालय के सभी प्राध्यापक, प्राध्यापिकाएं और कर्मचारी उपस्थित रहे।

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