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उत्तर प्रदेश
अयोध्या राम मंदिर में पहली बार कन्या पूजन रामलला को लगा 56 भोग
Ratna Netam
20 Oct 2026 9:45 PM IST

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अयोध्या। उत्तर प्रदेश के अयोध्या स्थित भव्य श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में मंगलवार को शारदीय नवरात्रि का समापन विशेष धार्मिक अनुष्ठानों और पूजा-अर्चना के साथ हुआ। इस अवसर पर रामलला का महाभिषेक किया गया और उन्हें 56 प्रकार के व्यंजनों का विशेष छप्पन भोग अर्पित किया गया। मंदिर परिसर में विधि-विधान से शस्त्र पूजा भी संपन्न हुई। इस बार नवरात्रि उत्सव की सबसे खास बात यह रही कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से पहली बार मंदिर परिसर में पारंपरिक कन्या पूजन आयोजित किया गया। इसमें लगभग 18 छोटी बच्चियों को देवी मां का स्वरूप मानकर उनकी पूजा-अर्चना की गई।मंदिर प्रशासन की ओर से जारी विज्ञप्ति के अनुसार, पूरे आयोजन के दौरान वैदिक मंत्रोच्चार और सनातन परंपराओं के अनुसार धार्मिक अनुष्ठान संपन्न किए गए। नवरात्रि के समापन के साथ विजयादशमी का पर्व भी श्रद्धापूर्वक मनाया गया।
सुबह रामलला का हुआ विशेष महाभिषेक
श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में मंगलवार सुबह धार्मिक कार्यक्रमों की शुरुआत गर्भगृह में विराजमान रामलला के महाभिषेक से हुई। मंदिर के पुजारियों ने वैदिक मंत्रों के साथ भगवान का विशेष अभिषेक किया।धार्मिक परंपराओं के अनुसार, रामलला को दूध, दही, घी, चीनी और नारियल पानी से स्नान कराया गया। इसके बाद भगवान की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई।महाभिषेक का आयोजन नवरात्रि के समापन पर विशेष धार्मिक अनुष्ठान के रूप में किया गया।
रामलला को अर्पित किया गया 56 व्यंजनों का भोग
नवरात्रि उत्सव के अवसर पर दोपहर की राजभोग आरती के समय रामलला को विशेष छप्पन भोग अर्पित किया गया।इस दौरान भगवान के समक्ष 56 प्रकार के व्यंजन रखे गए। हिंदू धार्मिक परंपरा में छप्पन भोग का विशेष महत्व माना जाता है। यह भगवान के प्रति श्रद्धा, भक्ति और समर्पण का प्रतीक है।मंदिर परिसर में शास्त्रीय विधि के अनुसार शस्त्र पूजा भी की गई। इसके अतिरिक्त परिसर स्थित दुर्गा मंदिर में मां दुर्गा के पवित्र शस्त्रों की अलग से पूजा-अर्चना की गई।
पहली बार मंदिर परिसर में हुआ कन्या पूजन
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने इस बार एक नई धार्मिक पहल करते हुए मंदिर की यज्ञशाला में कन्या पूजन का आयोजन किया।इस अनुष्ठान में लगभग 18 छोटी बच्चियों को देवी मां का स्वरूप मानकर सम्मानपूर्वक पूजा गया। धार्मिक परंपरा के अनुसार उनके चरण धोए गए और उन्हें चुनरी भेंट की गई।कन्या पूजन के माध्यम से नारी शक्ति के प्रति श्रद्धा और सम्मान का संदेश दिया गया। नवरात्रि के दौरान कन्याओं की पूजा को देवी दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की आराधना से जोड़कर देखा जाता है।
निर्मोही अखाड़े के स्वामी दिनेंद्र दास बने मुख्य यजमान
कन्या पूजन कार्यक्रम में निर्मोही अखाड़े के स्वामी दिनेंद्र दास मुख्य यजमान रहे। वह श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के ट्रस्टी भी हैं।धार्मिक अनुष्ठान आचार्य केशव और भवानी सिंह के मार्गदर्शन में संपन्न हुए। इस अवसर पर ट्रस्ट से जुड़े पदाधिकारी और अन्य सदस्य उपस्थित रहे।पूजन के बाद बच्चियों को पारंपरिक कन्या भोज कराया गया। उन्हें फल, चॉकलेट, टॉफी, स्टेशनरी सामग्री और दक्षिणा भेंट की गई।
शत चंडी पाठ और पूर्णाहुति के साथ अनुष्ठान संपन्न
शारदीय नवरात्रि की शुरुआत मंदिर परिसर में घटस्थापना के साथ हुई थी। रामलला के समक्ष पवित्र कलश स्थापित कर विशेष पूजा प्रारंभ की गई थी।नवरात्रि के दौरान मंदिर के पांच पुजारियों ने शत चंडी पाठ संपन्न कराया। नवमी पर दशांश हवन और पूर्णाहुति के साथ धार्मिक अनुष्ठानों का समापन हुआ।शत चंडी पाठ में देवी दुर्गा की आराधना की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह अनुष्ठान सुख, शांति और लोककल्याण की कामना से किया जाता है।
मंदिर ट्रस्ट के अधिकारी भी रहे मौजूद
इस विशेष आयोजन में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा (सेवानिवृत्त), ट्रस्ट से जुड़े जगदीश अफले और ट्रस्टी कृष्ण मोहन सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहे।सभी ने धार्मिक परंपराओं के अनुरूप आयोजित कार्यक्रम में भाग लिया। कन्या पूजन के दौरान बच्चियों का सम्मान किया गया और उन्हें उपहार देकर विदा किया गया।
विजयादशमी पर दिखाई दी सनातन परंपराओं की झलक
नवरात्रि के समापन के बाद श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में विजयादशमी का पर्व भी मनाया गया। यह त्योहार भगवान श्रीराम की रावण पर विजय और बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है।मंदिर परिसर में महाभिषेक, शस्त्र पूजा, छप्पन भोग और पहली बार हुए कन्या पूजन ने इस वर्ष के आयोजन को विशेष बनाया।इन धार्मिक कार्यक्रमों के माध्यम से श्रीराम जन्मभूमि मंदिर की आध्यात्मिक विरासत, सनातन संस्कृति और पारंपरिक पूजा पद्धतियों का महत्व सामने आया।
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