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Kanshi Ram Jayanti : कांशीराम जयंती पर मायावती का बड़ा बयान

लखनऊ | बसपा सुप्रीमो मायावती ने पार्टी के संस्थापक कांशीराम की जयंती के मौके पर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने हमेशा दलितों, पिछड़ों और वंचित वर्गों के विकास के लिए काम किया है, जबकि दूसरी पार्टियों के विकास के दावे सिर्फ हवा-हवाई हैं।
मायावती का BJP और कांग्रेस पर निशाना
लखनऊ में आयोजित कार्यक्रम में मायावती ने भाजपा और कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि इन पार्टियों ने सिर्फ बहुजन समाज को वोट बैंक की तरह इस्तेमाल किया, लेकिन उनके हितों के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया। उन्होंने कहा कि बसपा ही एकमात्र पार्टी है जो बिना किसी भेदभाव के समाज के कमजोर वर्गों के अधिकारों की रक्षा कर रही है।
बसपा सरकार के कार्य गिनाए
मायावती ने अपनी सरकार की उपलब्धियों को गिनाते हुए कहा कि जब बसपा सत्ता में थी, तब दलितों, पिछड़ों और वंचितों के लिए कई योजनाएं लागू की गईं। उन्होंने कहा:
- आरक्षण और सरकारी नौकरियों में बहुजनों को पूरा हक दिलाने का प्रयास किया गया।
- कई सामाजिक और आर्थिक सुधारों को लागू किया गया।
- उत्तर प्रदेश में दलित महापुरुषों के सम्मान में स्मारक और पार्क बनाए गए।
- कानून व्यवस्था को मजबूत करके दलितों और कमजोर वर्गों की सुरक्षा सुनिश्चित की गई।
BSP का 2024 चुनावी एजेंडा
मायावती ने इस मौके पर आगामी लोकसभा चुनाव 2024 के लिए भी अपनी रणनीति साफ कर दी। उन्होंने कहा कि बसपा पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता में आएगी और बहुजन समाज के लोगों को उनका पूरा अधिकार दिलाएगी। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से मिशन 2024 के लिए जी-जान से जुटने की अपील की।
बसपा कार्यकर्ताओं में जोश
कांशीराम जयंती के अवसर पर हजारों बसपा कार्यकर्ताओं ने पार्टी का झंडा लहराकर अपनी एकजुटता दिखाई। उन्होंने मायावती के भाषण का जोरदार समर्थन किया और बसपा के लिए पूरी ताकत से काम करने का संकल्प लिया।
कांशीराम के योगदान को किया याद
मायावती ने कहा कि कांशीराम ने बहुजन समाज के अधिकारों के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया। उनके विचारों पर चलकर ही समाज को सशक्त बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि बसपा उनके दिखाए रास्ते पर चलते हुए दलितों, पिछड़ों और वंचितों के लिए लड़ती रहेगी।
राजनीतिक हलचल तेज
मायावती के इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। जहां एक तरफ बसपा कार्यकर्ता इससे उत्साहित हैं, वहीं दूसरी ओर विरोधी दलों ने उनके दावों पर सवाल उठाए हैं। अब देखना यह होगा कि आगामी चुनावों में बसपा की रणनीति कितनी कारगर साबित होती है।





