उत्तर प्रदेश

Kanpur: सात फर्मों पर छह एफआईआर, नगर निगम ठेकों में सिंडिकेट का भंडाफोड़

Admindelhi1
26 Aug 2026 1:22 PM IST
Kanpur: सात फर्मों पर छह एफआईआर, नगर निगम ठेकों में सिंडिकेट का भंडाफोड़
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नगर निगम ठेकों में अनियमितता का खुलासा, छह एफआईआर के बाद दो गिरफ्तार

कानपुर: कानपुर नगर निगम में ठेकों के आवंटन और टेंडर प्रक्रिया में धांधली, अवैध वसूली और ठेकेदारों को डराने-धमकाने के मामले में सात फर्मों के खिलाफ छह एफआईआर दर्ज की गई हैं। पुलिस ने मंगलवार को दो ठेकेदारों को गिरफ्तार किया है, जबकि सिंडिकेट का सरगना बताए जा रहे आगरा निवासी गोविंद शर्मा की तलाश जारी है। उसकी लोकेशन राजस्थान में मिली है।

पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल ने बताया कि जांच में नगर निगम में एक सिंडिकेट सक्रिय होने की बात सामने आई है, जो तय करता था कि किस फर्म को ठेका मिलेगा, टेंडर किस दर पर डाला जाएगा और किस ठेकेदार को कितना काम मिलेगा। सिंडिकेट का संचालन गोविंद शर्मा करता था। नगर आयुक्त अर्पित उपाध्याय की पांच तहरीरों पर स्वरूप नगर थाने में पांच मुकदमे दर्ज हुए हैं, जबकि छठा मुकदमा ठेकेदार सनी सिंह की तहरीर पर फजलगंज थाने में हुआ है।

पुलिस के मुताबिक गोविंद शर्मा मूलरूप से आगरा का रहने वाला है और पहले छत्तीसगढ़ व मध्य प्रदेश में काम कर चुका है। कानपुर में उसने ठेकेदारों का नेटवर्क तैयार किया। उसके सिंडिकेट में संदीप जैन और रज्जन बाजपेई समेत अन्य ठेकेदारों की भूमिका सामने आई है। आरोप है कि गोविंद ठेकेदारों पर दबाव बनाकर 15 प्रतिशत डाउन रेट पर टेंडर डलवाता था। 85 प्रतिशत पर एक समान दर आने के बाद लकी ड्रा कराया जाता और सांठगांठ वाली फर्म को ठेका दिलाया जाता था।

जिन फर्मों के खिलाफ कार्रवाई हुई है, उनमें मेसर्स दिलीप बाजपेई, मेसर्स अजय इंटरप्राइजेज, मेसर्स पारसनाथ बिल्डर्स, कैला इंटरप्राइजेज, तिरुपति ट्रेडर्स और जगदंबा इंटरप्राइजेज शामिल हैं। जगदंबा इंटरप्राइजेज के खिलाफ दो मुकदमे दर्ज हुए हैं। आरोपितों पर धोखाधड़ी, डराने-धमकाने और रंगदारी वसूली समेत धाराओं में केस दर्ज किया गया है। पुलिस यह भी जांच रही है कि इन ठेकेदारों के नाम से कितनी अन्य फर्में संचालित हैं और टेंडर प्रक्रिया में किन लोगों की मिलीभगत थी।

मामले की जांच के लिए एसआईटी गठित की गई है। संबंधित फर्मों के जीएसटी टिन नंबर, बैंक खातों और वित्तीय लेन-देन की जांच हो रही है। करीब सात फर्मों को ब्लैकलिस्ट किया गया है। अधिकारियों की संभावित संलिप्तता की भी जांच की जाएगी।

मुख्यमंत्री की फटकार के बाद नगर आयुक्त ने करीब 100 करोड़ रुपये के टेंडर निरस्त कर दिए हैं। बड़े कामों से जुड़ी 27 फर्मों की जांच शुरू कर ठेकेदारों के भुगतान पर रोक लगा दी गई है। नई फर्मों के पंजीकरण पर भी रोक लगाई गई है। अब लंबित और आगामी कार्यों में ऑनलाइन ई-टेंडरिंग लागू करने की तैयारी है।

नगर निगम की टीम ने भौंती, किदवईनगर समेत कई स्थानों पर हॉट मिक्स प्लांट से जुड़े ठेकेदारों के ठिकानों पर जांच की। किदवईनगर में अजय इंटरप्राइजेज के प्लांट पर ताला मिला। बाद में फर्म संचालक अजय कुमार वाजपेयी ने मुख्य अभियंता को पत्र देकर बताया कि प्लांट दूसरी जगह शिफ्ट किया जा रहा है और तब तक उसका पंजीकरण निरस्त माना जाए।

नगर निगम में करीब 400 पंजीकृत ठेकेदार हैं, जिनमें 27 हॉट मिक्स प्लांट से जुड़े हैं। नियम के अनुसार प्रत्येक ठेकेदार के पास अपना प्लांट होना चाहिए, लेकिन जांच में आरोप है कि कई ठेकेदार एक ही प्लांट से काम कर रहे थे। 15वें वित्त के बजट में कथित बंदरबांट, अवैध वसूली और टेंडर प्रक्रिया में अनियमितताओं की भी जांच हो रही है। पुलिस आयुक्त ने कहा कि फरार गोविंद शर्मा की गिरफ्तारी के लिए टीमें दबिश दे रही हैं और जांच में दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

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