उत्तर प्रदेश

Kanpur: कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे तैयार, सफर होगा तेज और आसान

Admindelhi1
23 March 2026 9:11 AM IST
Kanpur: कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे तैयार, सफर होगा तेज और आसान
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कानपुर: कानपुर और लखनऊ के बीच सफर को तेज, सुरक्षित और सुगम बनाने वाला बहुप्रतीक्षित कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे अब पूरी तरह तैयार हो चुका है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने निर्माण कार्य पूरा कर प्रधानमंत्री कार्यालय को लोकार्पण के लिए प्रस्ताव भेज दिया है। संभावना है कि अगले महीने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस एक्सप्रेसवे का उद्घाटन करेंगे, जिसके अगले ही दिन इसे आम जनता के लिए खोल दिया जाएगा। इस परियोजना के शुरू होते ही दोनों शहरों के बीच यात्रा का समय घटकर मात्र 45 मिनट रह जाएगा।

वर्तमान में लगभग 80 किलोमीटर की दूरी तय करने में दो घंटे तक का समय लग जाता है, क्योंकि मौजूदा हाईवे पर ट्रैफिक का दबाव अधिक रहता है और कई स्थानों पर जाम की स्थिति बन जाती है। ऐसे में यह एक्सप्रेसवे क्षेत्र के लाखों लोगों के लिए राहत लेकर आएगा। एनएचएआई के अनुसार, इस 63 किलोमीटर लंबे एक्सप्रेसवे पर वाहन 120 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल सकेंगे, जिससे यात्रा समय में लगभग आधी कमी आएगी।

एक्सप्रेसवे के निर्माण पर करीब 3600 करोड़ रुपये की लागत आई है। इसमें चार बड़े पुल, 25 छोटे पुल, चार फ्लाईओवर, पैदल यात्रियों के लिए 11 अंडरपास और हल्के वाहनों के लिए 13 अंडरपास बनाए गए हैं। लखनऊ से बनी तक करीब 18 किलोमीटर का हिस्सा एलिवेटेड बनाया गया है, जबकि इसके आगे आजादनगर और शुक्लागंज (उन्नाव) तक का हिस्सा पूरी तरह नया तैयार किया गया है।

इस एक्सप्रेसवे की टोल व्यवस्था भी आधुनिक और सुविधाजनक रखी गई है। यहां पारंपरिक टोल प्लाजा नहीं होंगे, बल्कि पांच स्थानों पर प्रवेश और निकास द्वार बनाए गए हैं। फास्टैग के माध्यम से प्रवेश करते समय वाहन दर्ज होंगे और निकास बिंदु पर दूरी के अनुसार टोल स्वतः कट जाएगा। यह व्यवस्था बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे की तर्ज पर लागू की गई है, जिससे वाहनों को रुकना नहीं पड़ेगा और यातायात सुचारू बना रहेगा।

सुरक्षा के लिहाज से भी इस एक्सप्रेसवे को अत्याधुनिक तकनीकों से लैस किया गया है। पूरे मार्ग पर 63 सीसीटीवी कैमरे और 16 वीडियो डिटेक्शन सिस्टम लगाए गए हैं, जो हर गतिविधि पर नजर रखेंगे। किसी भी दुर्घटना की स्थिति में कंट्रोल रूम को तुरंत सूचना मिलेगी और दावा है कि 15 मिनट के भीतर राहत दल मौके पर पहुंच जाएगा। साथ ही, 120 किमी प्रति घंटा से अधिक गति पर वाहन चलाने वालों के खिलाफ स्वचालित चालान की व्यवस्था भी की गई है।

हालांकि इस परियोजना को जून 2025 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन जमीन अधिग्रहण और विद्युत लाइनों के स्थानांतरण में देरी के कारण इसमें कुछ विलंब हुआ। अब निर्माण पूरा होने के बाद यह एक्सप्रेसवे न केवल यात्रा को आसान बनाएगा, बल्कि क्षेत्र के आर्थिक और औद्योगिक विकास को भी नई गति प्रदान करेगा।

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