उत्तर प्रदेश

Kanpur: ग्लोबल तनाव का असर, कानपुर की फैक्ट्रियों में काम घटा

Admindelhi1
23 March 2026 9:07 AM IST
Kanpur: ग्लोबल तनाव का असर, कानपुर की फैक्ट्रियों में काम घटा
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कानपुर: प्रिंटिंग और पैकेजिंग उद्योग पर अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों का गहरा असर देखने को मिल रहा है। अमेरिका, इस्राइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का प्रभाव अब स्थानीय उद्योगों तक पहुंच चुका है। कच्चे माल की कीमतों में भारी बढ़ोतरी और आपूर्ति में कमी के चलते शहर की कई इकाइयों को अपनी एक शिफ्ट बंद करनी पड़ी है। इससे उत्पादन क्षमता में गिरावट आई है और उद्योग संचालकों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।

शहर में लगभग 250 से अधिक प्रिंटिंग-पैकेजिंग इकाइयां संचालित हैं, जिनसे 5000 से 8000 लोगों को रोजगार मिलता है। मौजूदा परिस्थितियों में इन इकाइयों का उत्पादन घटकर लगभग 50 प्रतिशत रह गया है। उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि यदि जल्द ही स्थिति में सुधार नहीं हुआ, तो कई इकाइयों में पूरी तरह तालाबंदी की नौबत आ सकती है, जिससे हजारों लोगों की आजीविका प्रभावित होगी।

हाल ही में कानपुर प्रेस ओनर्स एसोसिएशन की एक महत्वपूर्ण बैठक उद्योग कुंज स्थित कार्यालय में आयोजित की गई, जिसमें उद्योग से जुड़े प्रमुख उद्यमियों और पदाधिकारियों ने भाग लिया। बैठक में बताया गया कि पिछले कुछ समय में डुप्लेक्स और अन्य पेपर बोर्ड की कीमतों में 10-12 प्रतिशत, लैमिनेशन फिल्म्स में 35-40 प्रतिशत, तथा क्राफ्ट पेपर और प्रिंटिंग इंक में 10-12 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हुई है। इसके अलावा एडहेसिव्स और अन्य उपभोग्य सामग्रियों में भी 30-35 प्रतिशत तक की वृद्धि दर्ज की गई है।

उद्योगपतियों का कहना है कि कच्चे माल की लागत बढ़ने से उत्पादन लागत में भारी इजाफा हो रहा है, जबकि बाजार में उत्पादों के दाम उसी अनुपात में नहीं बढ़ पा रहे हैं। ऐसे में उद्योग को चलाना मुश्किल होता जा रहा है। एसोसिएशन के अध्यक्ष अवधेश अवस्थी ने अन्य संबंधित उद्योगों से सहयोग की अपील करते हुए कहा कि वर्तमान परिस्थितियों को समझते हुए लागत के अनुसार उत्पादों के मूल्य बढ़ाने की आवश्यकता है।

महामंत्री दिनेश बरासिया ने भी चिंता जताते हुए कहा कि कच्चे माल की कीमतों में 10 से 40 प्रतिशत तक की वृद्धि और आपूर्ति में कमी ने उद्योग की रीढ़ कमजोर कर दी है। यदि समय रहते समाधान नहीं निकाला गया, तो कई इकाइयों को बंद करना पड़ सकता है। इस संकट ने न केवल उद्योग बल्कि उससे जुड़े हजारों श्रमिकों के भविष्य पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

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