उत्तर प्रदेश

Kanpur: अलग-अलग रूट पर क्यूआर कोड से चलेंगे ई-रिक्शा

Admindelhi1
25 March 2025 10:29 AM IST
Kanpur: अलग-अलग रूट पर क्यूआर कोड से चलेंगे ई-रिक्शा
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"मंडलायुक्त ने बनाई रणनीति"

कानपुर: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा ई-रिक्शा चालकों का वेरिफिकेशन कराने के निर्देश के कुछ घंटों बाद ही मंडलायुक्त विजेंद्र पंडियन ने शहर के अफसरों के साथ समीक्षा बैठक में ई-रिक्शा के संचालन पर नियंत्रण की रणनीति को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया। बैठक में तय किया गया कि शहर को कई जोनों में बांटकर ई-रिक्शों को रूट के अनुसार क्यूआर कोड से संचालित किया जाएगा। साथ ही, लगभग पांच लाख ई-रिक्शों में से एक लाख ई-रिक्शों का तत्काल वेरिफिकेशन कराने के निर्देश दिए गए।

बैठक में लिए गए अहम फैसले

बैठक में ज्वाइंट सीपी हरीश चंदर, नगर आयुक्त सुधीर कुमार, डीसीपी ट्रैफिक और आरटीओ अधिकारी मौजूद रहे। मंडलायुक्त ने स्पष्ट किया कि कोई भी ड्राइवर ई-रिक्शा चला सकता है, लेकिन उसका वेरिफिकेशन अनिवार्य होगा। अनरजिस्टर्ड ई-रिक्शा के संचालन पर रोक लगाने के लिए टेक्नोलॉजी का सहारा लिया जाएगा और रजिस्ट्रेशन कैंप लगाए जाएंगे। रूट के हिसाब से क्यूआर कोड के जरिए ई-रिक्शा की पहचान की जाएगी।

चार जोनों में होगा संचालन

मंडलायुक्त ने बताया कि ई-रिक्शा के लिए चार जोन निर्धारित किए गए हैं। इंटीग्रेटेड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ITMS) से डाटा लेकर पोर्टल में एक अतिरिक्त कॉलम जोड़ा जाएगा। इसी के तहत ई-रिक्शा का संचालन होगा और अलग-अलग जोनों में उन्हें आवंटित किया जाएगा।

ई-रिक्शा स्टैंड होंगे निर्धारित

शहर में ई-रिक्शा स्टैंड बनाए जाएंगे और इनके लिए स्थान भी निर्धारित किया जाएगा। रजिस्ट्रेशन जांच के लिए आरटीओ की सहायता ली जाएगी और वाहन सारथी एप के माध्यम से वेरिफिकेशन की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

शहर में ई-रिक्शा की अराजकता बनी समस्या

शहर में ई-रिक्शा की बेलगाम स्थिति किसी से छिपी नहीं है। करीब एक लाख रजिस्टर्ड ई-रिक्शा के अलावा लगभग पांच लाख ई-रिक्शे सड़कों पर दौड़ रहे हैं। इनमें से कई नाबालिग और बिना लाइसेंस चालक ई-रिक्शा चला रहे हैं, जो बड़ी दुर्घटनाओं का कारण बन सकते हैं। दूसरे राज्यों और जिलों से आए कामगार भी ई-रिक्शा चलाकर कमाई कर रहे हैं, जिससे ट्रैफिक व्यवस्था बिगड़ रही है।

चालकों का वेरिफिकेशन बड़ी चुनौती

मंडलायुक्त ने माना कि ई-रिक्शा चालकों का वेरिफिकेशन सबसे बड़ी चुनौती है क्योंकि हजारों चालक बिना डीएल के वाहन चला रहे हैं और वे खुद वेरिफिकेशन के लिए सामने नहीं आएंगे। ई-रिक्शा मालिकों से रजिस्ट्रेशन शुल्क भी निर्धारित किया जाएगा ताकि नियमों का सख्ती से पालन हो सके।

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