उत्तर प्रदेश

Kanpur: सीएमओ पर गिरी गाज, डीएम से विवाद बना वजह

Admindelhi1
20 Jun 2025 10:11 AM IST
Kanpur: सीएमओ पर गिरी गाज, डीएम से विवाद बना वजह
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कानपुर: जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह और मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. हरिदत्त नेमी के बीच चल रहे विवाद का पटापेक्ष आखिरकार शासन ने गुरुवार को कर दिया। विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना सहित तीन विधायकों की पैरवी भी सीएमओ को नहीं बचा सकी और शासन ने उन्हे निलंबित करते हुए महानिदेशालय से संबद्ध कर दिया है वहीं डीएम की कुर्सी बरकरार है। शासन ने कानपुर में डा. उदयनाथ को मुख्य चिकित्साधिकारी की जिम्मेदारी सौंपी है।

बागपत से कानपुर भेजे गए तेजतर्रार जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने अपना पद ग्रहण करते ही ताबड़तोड़ कार्रवाइयां करनी शुरू कर दी थीं। इसी क्रम में उन्होंने बीती तीन फरवरी को शासन द्वारा आम जनता को दी जाने वाली स्वास्थ्य सेवाओं और उनसे जुड़े अधिकारियों व कर्मचारियों की जानकारी जुटाने के उद्देश्य से रामादेवी स्थित सीएमओ दफ्तर से लेकर मान्यवर काशीराम ट्रामा सेंटर पहुंचकर जमीनी हकीकत को जाना। इस दाैरान सीएमओ डॉ हरी दत्त नेमी समेत 34 कर्मचारी अनुपस्थित पाए गए थे। इस पर उन्होंने कड़ी नाराजगी जाहिर करते हुए सभी का एक दिन का वेतन रोकने की कार्रवाई के आदेश दिए थे।

डीएम ने कार्रवाई से जुड़ा अपना बयान भी सोशल मीडिया पर जारी किया था। जिसमें उन्होंने बताया था कि जिम्मेदार पद पर बैठे सीएमओ साहब जब ईमानदारी से अपना काम नहीं करेंगे तो बाकी अधिकारी क्या करेंगे? इसके बाद से लगातार डीएम सीएचसी और पीएचसी पहुंचकर स्थितियों का जायजा लेते रहे। जहां पर कई तरह की अनियमिताएं पाई गयीं। जिसे लेकर हर बार लापरवाह अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्रवाई भी की गई। लगातार स्वास्थ्य विभाग में मिल रही खामियों के चलते जिलाधिकारी ने सीएमओ को हटवाने के लिए शासन को पत्र लिखा।

इसी बीच सीएमओ डाॅ हरिदत्त नेमी के दो ऑडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए जिनमें वह जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह के खिलाफ अभद्र भाषा का प्रयोग करते हुए सुनाई दिए। हालांकि सीएमओ ने यह स्पष्ट करते हुए कहा कि ऑडियो पर सुनाई दे रही आवाज उनकी नहीं बल्कि वह एआई जेनरेटेड वॉइस है। जो उन्हें बदनाम करने के लिए षड्यंत्र के तहत किया गया है।

हालांकि डीएम द्वारा शासन को लिखे गए पत्र और सोशल मीडिया पर वायरल हो रही ऑडियो सीएमओ के लिए चिंता का विषय बनी हुई थी। जिसके चलते उन्होंने उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना से मुलाकात करी। जिस पर महाना ने सीएमओ की पैरवी करते हुए 11 जून को उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक को पत्र लिखा। सीएमओ के समर्थन में एमएलसी अरुण पाठक ने 14 जून और विधायक सुरेंद्र मैथानी ने 15 जून को पत्र लिखकर उन्हें शहर में बनाये रखने का आग्रह किया लेकिन इसके अगले ही दिन 16 जून को बिठूर विधानसभा से भाजपा विधायक अभिजीत सिंह सांगा और किदवई नगर विधानसभा के विधायक महेश त्रिवेदी ने सीएमओ को भ्रष्टाचारी बताते हुए मुख्यमंत्री के नाम पत्र लिख दिया और जिलाधिकारी का बचाव किया।

धीरे-धीरे यह मामला प्रदेश स्तर तक पहुंचा तब जाकर सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव ने भी इस मामले पर चुटकी लेते हुए कहा कि यह सीएम और डिप्टी सीएम के बीच का विवाद है। डबल इंजन का दावा करने वाली इस सरकार के इंजन अब आपस में टकराने लगे हैं। डिब्बे बेपटरी तो हाे ही गये हैं और अब गार्ड के डिब्बे भी इसकी जद में आ गये हैं। सपा अध्यक्ष की टिप्पणी के 24 घंटे के अंदर शासन द्वारा बड़ी कार्रवाई की गई और सीएमओ काे निलंबित करते हुए महानिदेशालय से संबद्ध कर दिया गया और डीएम की कुर्सी बरकरार रही। इस प्रकार कानपुर के डीएम और सीएमओ विवाद की घटना का पटाक्षेप हाे गया, लेकिन कानपुर में गुरूवार काे दिनभर चर्चा का विषय बना रहा। सीएमओ डाॅ हरिदत्त नेमी की जगह शासन ने श्रावस्ती के उदयनाथ को कानपुर का नया मुख्य चिकित्सा अधिकारी बनाया है।

शासन ने कानपुर के सीएमओ डा. हरिदत्त नेमी को निलंबित कर भले ही डीएम और सीएमओ के विवाद की घटना का पटाक्षेप कर दिया हो लेकिन निलंबित सीएमओ ने प्रेस वार्ता कर साफ कर दिया है, मामला यहीं तक सीमित नहीं रहेगा। उन्होंने जिलाधिकारी जितेन्द्र प्रताप सिंह पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि पूरे मामले को लेकर न्यायालय की शरण में जाऊंगा। उन्होंने जिलाधिकारी पर आरोप लगाते हुए कहा कि अधिकारियों के सामने मीटिंग हॉल में मुझे जाति सूचक शब्द बोलकर बेइज्जत किया जाता था।

निलंबित सीएमओ ने बताया कि पदभार ग्रहण करते ही प्रतिनिधियों से मुझे शिकायतें मिली कि डॉ सुबोध प्रकाश यादव अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी नर्सिंग होम के पद पर पिछले दो दशकों से तैनात हैं। साथ ही वह कई भ्रष्टाचार में भी संलिप्त हैं। इसको लेकर उन्हे उस पद से हटाकर जिला क्षय रोग अधिकारी की जिम्मेदारी सौंपी थी। वहीं डीएम साहब मुझे सिस्टम में रहकर काम करने की हिदायत देते थे। यही नहीं मीटिंगों के दौरान मेरे साथ दुर्व्यवहार किया जाता था। कई बार तो मुझे जाति सूचक शब्दों का प्रयोग करते हुए प्रताड़ित किया गया। जिसकी लिखित व मौखिक शिकायत मैंने खुद प्रमुख सचिव से भी की थी। अब मैं इस मामले को लेकर कोर्ट की शरण में जाऊंगा।

उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि जब से उनकी कानपुर में तैनाती हुई है तब से वह पूरी ईमानदारी से अपना काम कर रहे थे लेकिन भ्रष्टाचार में संलिप्त कुछ लोगों को बेनकाब करते ही मुझे इस तरह की सजा मिली है। जिलाधिकारी ने मुझे सीबीआई से चार्जशीटेड जेएम फार्मा को एक करोड़ 60 लाख 47 हजार रुपये भुगतान करने को कहा था लेकिन मैने भुगतान करने से पहले फार्मा की जांच कराई तो वह भी भ्रष्टाचार में संलिप्त पाई गई। इसलिए मैंने उसका पेमेंट नहीं कराया। मेरे इस फैसले से नाराज जिलाधिकारी ने मुझे जाति सूचक शब्द बोलते हुए कहा कि सिस्टम में रहना सीख लो, नहीं तो कभी कुछ नहीं कर पाओगे।

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