उत्तर प्रदेश

23 मामलों में फांसी की सजा सुना चुके जज रवि कुमार दिवाकर का तबादला

Kavita2
24 Oct 2026 12:26 PM IST
23 मामलों में फांसी की सजा सुना चुके जज रवि कुमार दिवाकर का तबादला
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मुजफ्फरनगर। उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले में न्यायिक व्यवस्था से जुड़ा एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक बदलाव सामने आया है। महिला अपराधों से संबंधित मामलों की सुनवाई करने वाली फास्ट ट्रैक कोर्ट में तैनात न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर की जिम्मेदारी बदल दी गई है। उन्हें अब परिवार न्यायालय में अपर प्रधान न्यायाधीश के पद पर तैनात किया गया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट की ओर से शुक्रवार को जारी अधिसूचना के तहत जिले के तीन न्यायिक अधिकारियों की तैनाती में बदलाव किया गया है। इस फैसले के बाद न्यायिक अधिकारियों की नई जिम्मेदारियों को लेकर चर्चा शुरू हो गई है।

न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर अपने न्यायिक फैसलों को लेकर चर्चा में रहे हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उन्होंने विभिन्न मामलों में 23 बार फांसी की सजा सुनाई है। ऐसे में उनकी फास्ट ट्रैक कोर्ट से परिवार न्यायालय में तैनाती को एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, इस बदलाव को किसी विशेष न्यायिक फैसले से जोड़ने वाली आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जारी की अधिसूचना

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शुक्रवार को अधिसूचना जारी कर मुजफ्फरनगर जिले के तीन न्यायिक अधिकारियों की जिम्मेदारियों में फेरबदल किया। इसके तहत न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर को फास्ट ट्रैक कोर्ट से हटाकर परिवार न्यायालय में अपर प्रधान न्यायाधीश बनाया गया है।

इसके अलावा अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश मंजुला भलोटिया को महिला अपराधों की सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट की जिम्मेदारी दी गई है। वहीं, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश शिव कुमारी को 14वें वित्त आयोग के अंतर्गत गठित न्यायालय में तैनात किया गया है।

इस बदलाव के बाद तीनों न्यायिक अधिकारी अपने नए कार्यक्षेत्रों में संबंधित मामलों की सुनवाई और न्यायिक कार्यों का संचालन करेंगे। न्यायालयों के बीच अधिकारियों की तैनाती में बदलाव न्यायिक प्रशासन की नियमित प्रक्रिया का हिस्सा होता है।

23 मामलों में फांसी की सजा सुनाने को लेकर चर्चा में रहे दिवाकर

न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर का नाम गंभीर आपराधिक मामलों में सुनाए गए फैसलों को लेकर चर्चा में रहा है। उपलब्ध विवरण के अनुसार, उन्होंने अपने न्यायिक कार्यकाल में 23 मामलों में मृत्युदंड की सजा सुनाई है। इसी वजह से उनकी पहचान कठोर दंड वाले फैसले सुनाने वाले न्यायिक अधिकारियों के रूप में बनी है।

मृत्युदंड भारतीय दंड व्यवस्था में सबसे गंभीर सजाओं में से एक है। कानून के अनुसार, ऐसे मामलों में अदालत को अपराध की गंभीरता, उपलब्ध साक्ष्यों और कानूनी प्रावधानों के आधार पर निर्णय लेना होता है।

निचली अदालत द्वारा मृत्युदंड सुनाए जाने के बाद उसे लागू करने के लिए संबंधित हाईकोर्ट की पुष्टि आवश्यक होती है। इसलिए किसी मामले में फांसी की सजा सुनाया जाना और उसका अंतिम रूप से लागू होना अलग-अलग कानूनी प्रक्रियाएं हैं।

रवि कुमार दिवाकर की नई तैनाती के बाद उनके सामने आने वाले मामलों की प्रकृति बदल जाएगी। अब वे परिवार न्यायालय में पारिवारिक विवादों से जुड़े मामलों की सुनवाई करेंगे।

महिला अपराधों की सुनवाई करेंगी मंजुला भलोटिया

न्यायिक फेरबदल के तहत अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश मंजुला भलोटिया को फास्ट ट्रैक कोर्ट में तैनात किया गया है। उन्हें महिलाओं के खिलाफ अपराधों से संबंधित मामलों की सुनवाई की जिम्मेदारी दी गई है।

फास्ट ट्रैक अदालतों का उद्देश्य गंभीर और संवेदनशील मामलों का अपेक्षाकृत तेजी से निस्तारण करना है। विशेष रूप से महिलाओं के विरुद्ध अपराधों के मामलों में समय पर न्याय मिलना महत्वपूर्ण माना जाता है।

मंजुला भलोटिया की नई तैनाती के बाद संबंधित अदालत में लंबित मामलों की सुनवाई और न्यायिक प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी उनके पास होगी।

शिव कुमारी को भी मिली नई जिम्मेदारी

हाईकोर्ट की अधिसूचना के अनुसार, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश शिव कुमारी की तैनाती में भी बदलाव किया गया है। उन्हें 14वें वित्त आयोग के अंतर्गत गठित न्यायालय में जिम्मेदारी सौंपी गई है।

इस फेरबदल का उद्देश्य विभिन्न न्यायालयों में न्यायिक अधिकारियों की तैनाती को प्रशासनिक आवश्यकताओं के अनुसार व्यवस्थित करना है। नई नियुक्तियों के बाद संबंधित न्यायालयों में मामलों की सुनवाई नए पीठासीन अधिकारियों की देखरेख में होगी।

पहले भी चर्चा में रहे हैं न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर

रवि कुमार दिवाकर अपने न्यायिक कार्यकाल में कई चर्चित मामलों की सुनवाई कर चुके हैं। मुजफ्फरनगर से पहले वे वाराणसी के ज्ञानवापी परिसर से संबंधित मामले में दिए गए आदेश के कारण भी चर्चा में आए थे।

ताजा प्रकाशित रिपोर्टों के मुताबिक, उन्होंने मुजफ्फरनगर में 10 मामलों में 23 दोषियों को मृत्युदंड सुनाया था। उनके पूरे न्यायिक कार्यकाल में मृत्युदंड पाने वाले दोषियों की संख्या 35 बताई गई है।

नई तैनाती पर कार्यभार संभालने के निर्देश

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने संबंधित न्यायिक अधिकारियों को अपनी वर्तमान जिम्मेदारी सौंपकर नई तैनाती वाले पदों पर कार्यभार ग्रहण करने के निर्देश दिए हैं। इससे जिले की अलग-अलग अदालतों में न्यायिक कार्यों का संचालन नई व्यवस्था के अनुसार किया जाएगा।

रवि कुमार दिवाकर की तैनाती बदलने के कारणों का आधिकारिक विवरण उपलब्ध नहीं है। ऐसे में इसे उनके पूर्व फैसलों से जोड़ना उचित नहीं होगा।

फिलहाल इस प्रशासनिक बदलाव के बाद रवि कुमार दिवाकर परिवार न्यायालय में नई जिम्मेदारी संभालेंगे, जबकि अन्य न्यायिक अधिकारी अपने निर्धारित न्यायालयों में मामलों की सुनवाई करेंगे।

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